NMC से मिली Letter of Permission; सीमांत क्षेत्र के युवाओं के लिए चिकित्सा शिक्षा का नया अवसर
पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के लिए चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। स्व. जगजीवन राम राजकीय मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़ में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से MBBS की पढ़ाई शुरू करने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से Letter of Permission (LoP) जारी होने की जानकारी सामने आई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए कहा कि NMC की मंजूरी से सीमांत क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।
NMC की मंजूरी से क्या बदलेगा?
पिथौरागढ़ जैसे सीमांत और पर्वतीय जिले में मेडिकल कॉलेज शुरू होना केवल MBBS सीटों के विस्तार का विषय नहीं है। इससे स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र के अपेक्षाकृत निकट चिकित्सा शिक्षा का अवसर मिल सकता है और मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विस्तार की संभावना भी बढ़ेगी।
मेडिकल कॉलेज की स्थापना लंबे समय से क्षेत्र की प्रमुख मांग रही है। सरकार द्वारा पहले कॉलेज के लिए बुनियादी ढांचे और संसाधनों को विकसित करने की दिशा में काम किया गया था। कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 2026 में विभिन्न विभागों में वरिष्ठ चिकित्सकों की नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया दर्ज है, जो संस्थान के अकादमिक एवं चिकित्सकीय ढांचे को विकसित किए जाने को दर्शाती है।

कितनी MBBS सीटें?
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। मुख्यमंत्री की सोशल मीडिया पोस्ट के साथ दिखाई दे रहे NMC के 15 सितंबर 2026 के Letter of Permission में आवेदन/विषय के संदर्भ में 100 MBBS सीटों के वार्षिक intake का उल्लेख दिखाई देता है।
इसलिए अंतिम सीट संख्या को NMC के आधिकारिक आदेश/कॉलेज की प्रवेश अधिसूचना से पुष्टि करना उचित होगा। 100 सीटों की मंजूरी मिलने पर उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की कुल MBBS सीटें 625 से बढ़कर 725 हो जाएंगी।
सीमांत क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण? लेकिन स्पेशलिस्ट डॉक्टर और गुणवत्ता अधिक जरूरी।
पिथौरागढ़, चंपावत, धारचूला, मुनस्यारी और आसपास के दुर्गम क्षेत्रों के साथ साथ नेपाल के लोगों को गंभीर बीमारी की स्थिति में बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़ी विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होने से स्थानीय स्तर पर उपचार की उपलब्धता बढ़ सकती है।
साथ ही, स्थानीय युवाओं के लिए डॉक्टर बनने की राह में एक नया संस्थागत अवसर तैयार होगा। लेकिन स्पेशलिस्ट डॉक्टर आज भी चुनौती बने हुवे हैं। अल्मोड़ा, हल्द्वानी, श्रीनगर में मेडिकल कॉलेज पहले से हैं किंतु हालात वहां भी अच्छे नहीं कहे जाते, और रेफेरल सिस्टम धड़ल्ले से जारी है। वहीं टकाना टाइम्स की संपादक ऊषा जोशी एवं कई स्थानीय लोगों ने इसे केंद्रीय अस्पताल अथवा ऐम्स दिल्ली की शाखा के रूप संचालित करने की मांग की है।
अब अगली चुनौती
NMC की अनुमति मिलना महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन मेडिकल कॉलेज की सफलता केवल MBBS कक्षाएं शुरू होने से तय नहीं होगी। पर्याप्त फैकल्टी, आधुनिक प्रयोगशालाएं, हॉस्टल, पुस्तकालय, ICU, जांच सुविधाएं, विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और मजबूत अस्पताल व्यवस्था को लगातार बनाए रखना जरूरी होगा, जो एक बेहतर गुणवत्ता का अस्पताल बनाने के जरूरी है।