देहरादून, 28 जुलाई। उत्तराखंड में सोमवार रात हुई मूसलाधार बारिश ने देहरादून जनपद के कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया। कई संपर्क मार्ग बाधित हो गए, जलभराव की स्थिति बनी और नंदा की चौकी के पास बने नए पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया। लेकिन जिला प्रशासन ने जिस तेजी और समन्वय के साथ हालात पर नियंत्रण पाया, वह प्रशासनिक कार्यशैली का एक उल्लेखनीय उदाहरण बनकर सामने आया।
रातभर नहीं सोए जिलाधिकारी, खुद संभाला मोर्चा
जैसे ही भारी बारिश और नुकसान की सूचनाएं मिलने लगीं, जिलाधिकारी आशीष चौहान ने पूरी प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय कर दिया। अधिकारियों के अनुसार डीएम पूरी रात कंट्रोल रूम और फील्ड टीमों के साथ लगातार संपर्क में रहे। उन्होंने स्वयं विभिन्न स्थानों की स्थिति की निगरानी की और राहत एवं पुनर्बहाली कार्यों की पल-पल समीक्षा करते रहे।
सुबह होते ही फील्ड में पहुंचे, जमीनी हालात का लिया जायजा
रातभर हालात पर नजर रखने के बाद मंगलवार सुबह जिलाधिकारी स्वयं देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों के निरीक्षण पर निकल पड़े। उन्होंने प्रभावित इलाकों का दौरा कर अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक निर्देश दिए। उनका जोर केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हर समस्या के तत्काल समाधान पर रहा।
12 घंटे में नंदा की चौकी मार्ग पर फिर दौड़ने लगे वाहन
बारिश के कारण नंदा की चौकी के पास बने नए पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने से लोगों को आशंका थी कि मार्ग कई दिनों तक बंद रहेगा। लेकिन जिला प्रशासन ने युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू कराया और लगभग 12 घंटे के भीतर मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया। इस तेज कार्रवाई से हजारों यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को बड़ी राहत मिली।
अधिकांश बंद सड़कें भी हुईं चालू
केवल नंदा की चौकी ही नहीं, बल्कि जनपद के विभिन्न हिस्सों में बारिश और मलबे के कारण बंद हुई अधिकांश सड़कों को भी प्रशासन ने तेजी से खुलवाया। जेसीबी मशीनों, लोक निर्माण विभाग, आपदा प्रबंधन, पुलिस तथा अन्य विभागों की संयुक्त टीमों ने लगातार काम कर आवागमन सामान्य करने का प्रयास किया।
बिजली, पेयजल और अन्य सेवाओं को सामान्य करने पर विशेष जोर
जिलाधिकारी ने बिजली और पेयजल विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां भी आपूर्ति बाधित हुई है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सेवाएं बहाल की जाएं। जलभराव वाले क्षेत्रों में पानी की निकासी तथा आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं को सामान्य करने के लिए भी लगातार अभियान चलाया गया।
‘समस्या नहीं, समाधान’ की कार्यशैली बनी पहचान
प्रशासनिक हलकों में आशीष चौहान की कार्यशैली को “सॉल्यूशन ओरिएंटेड एडमिनिस्ट्रेशन” के रूप में देखा जा रहा है। उनका फोकस आरोप-प्रत्यारोप या औपचारिक बैठकों से अधिक जमीनी स्तर पर समस्याओं का त्वरित समाधान निकालने पर रहा। यही कारण रहा कि आपदा जैसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी प्रशासन तेजी से सामान्य स्थिति बहाल करने में सफल रहा।
क्षतिग्रस्त पुल की जांच के निर्देश
नंदा की चौकी के पास नए पुल की एप्रोच रोड को हुए नुकसान ने निर्माण गुणवत्ता और मानसून के दौरान आधारभूत ढांचे की मजबूती को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं। जिलाधिकारी ने इस मामले में तकनीकी जांच के निर्देश दिए हैं और स्पष्ट किया है कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने की प्रशासन की सराहना
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन समय रहते सक्रिय नहीं होता तो लोगों को कई दिनों तक आवागमन, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ सकती थी। लोगों ने राहत एवं पुनर्बहाली कार्यों की गति की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन का फील्ड में सक्रिय रहना जनता का विश्वास बढ़ाने वाला कदम है।
नेतृत्व की परीक्षा में सफल प्रशासन
आपदा के समय प्रशासन की असली परीक्षा होती है। देहरादून में हुई भारी बारिश के बाद जिस प्रकार जिला प्रशासन ने रातभर लगातार काम करते हुए सड़कें खुलवाईं, आवश्यक सेवाएं बहाल कराईं और प्रमुख मार्गों पर यातायात सामान्य कराया, उसे प्रभावी प्रशासनिक नेतृत्व का उदाहरण माना जा रहा है। यह घटनाक्रम इस बात को भी रेखांकित करता है कि यदि जिलाधिकारी स्वयं मैदान में उतरकर नेतृत्व करें तो राहत और पुनर्बहाली कार्यों की गति कई गुना बढ़ सकती है। देहरादून के लोगों का कहना है जब आपदा में जिलाधिकारी उनके बीच खड़ा है तो उन्हें हौंसला मिलता है।
