उत्तराखंड में मानसून की रफ्तार धीमी, मानसून का इंतजार इस बार थोड़ा लंबा हो सकता है। सामान्य तौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून 20 जून तक प्रदेश में दस्तक दे देता है, लेकिन इस वर्ष इसकी गति धीमी पड़ने के कारण कुछ दिनों की देरी की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून फिलहाल कई क्षेत्रों में ठहराव की स्थिति में है, जिससे इसके उत्तराखंड पहुंचने की रफ्तार प्रभावित हुई है।
प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां लगातार सक्रिय बनी हुई हैं।
खासकर पर्वतीय जिलों में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है.
जबकि मैदानी और तराई क्षेत्रों में अभी तक व्यापक वर्षा देखने को नहीं मिली है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है
कि मानसून की सक्रियता बढ़ने के बाद पूरे राज्य में अच्छी बारिश शुरू हो सकती है।
उत्तराखंड में मानसून की रफ्तार क्यों हुई धीमी?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) नहीं बन पाने के कारण ,
मानसून को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक अनुकूल परिस्थितियां नहीं मिल रही हैं।
यही वजह है कि मानसून की दोनों प्रमुख शाखाएं—अरब सागर और बंगाल की खाड़ी शाखा—अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
स्काईमेट के मौसम विज्ञानी महेश पलावत के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने पर मानसूनी हवाओं को उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलती है।
वर्तमान में ऐसी स्थिति नहीं बनने से मानसून की प्रगति धीमी हो गई है।
उत्तराखंड में मानसून से क्या पड़ेगा असर?
मानसून का उत्तराखंड में समय पर पहुंचना खेती, जल स्रोतों और भूजल स्तर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
राज्य के अधिकांश किसान खरीफ फसलों की बुवाई के लिए मानसूनी बारिश पर निर्भर रहते हैं।
यदि मानसून में अधिक देरी होती है तो कृषि गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल चिंता की स्थिति नहीं है और आने वाले दिनों में मौसम की परिस्थितियों में सुधार संभव है।
अगले कुछ दिनों का मौसम
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक डॉ. सी.एस. तोमर के अनुसार अगले दो से तीन दिनों के दौरान बागेश्वर, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी,
समेत कई पर्वतीय जिलों में हल्की से मध्यम बारिश ,गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
वहीं देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और अन्य मैदानी इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क बना रह सकता है।
उन्होंने बताया कि 18 जून के बाद सक्रिय होने वाला नया पश्चिमी विक्षोभ मौसम में बदलाव ला सकता है,
जिससे बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
किसानों और लोगों की नजरें मानसून पर
भीषण गर्मी और उमस के बीच प्रदेश के लोगों की नजरें अब मानसून की अगली प्रगति पर टिकी हुई हैं।
मौसम विभाग का मानना है कि यदि अनुकूल परिस्थितियां बनीं तो मानसून जल्द ही फिर से गति पकड़ सकता है और उत्तराखंड में व्यापक वर्षा का दौर शुरू हो सकता है।
