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उत्तर भारत में गर्मी की लहरों और ओजोन स्तर के कारण हृदय रोग से मौतें बढ़ीं: अध्ययन

नई दिल्ली: गर्मी की लहरों (हीटवेव) के दौरान सतह पर ओजोन का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों और फेफड़ों की बीमारियों (COPD) से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। द हिंदू में प्रकाशित खबर के अनुसार, एक नए सहकर्मी-समीक्षित अध्ययन ने इस खतरे को उजागर किया है।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

  • npj Clean Air जर्नल (Nature Portfolio) में 12 जून को प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, उत्तरी भारत में हीटवेव के दौरान सतह ओजोन का स्तर 85-110 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच जाता है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित सीमा 70 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से काफी अधिक है।
  • वर्ष 2024 की गर्मी की लहरों के दौरान इस ओजोन एक्सपोजर से लगभग 26,500 मौतें हुईं — इनमें इस्केमिक हार्ट डिजीज (इस्चेमिक हृदय रोग) और क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) प्रमुख हैं।
  • एक सामान्य हीटवेव दिवस पर अतिरिक्त 490 हृदय रोग से संबंधित और 342 COPD से संबंधित मौतें होने का अनुमान है। कुल मिलाकर एक दिन में करीब 830 अतिरिक्त मौतें

ओजोन कैसे बनता है और क्यों खतरनाक?

ओजोन सीधे उत्सर्जित नहीं होता, बल्कि सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में अन्य प्रदूषकों (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, HCHO आदि) के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है। गर्मी बढ़ने पर यह प्रक्रिया तेज हो जाती है। अध्ययन के लेखकों ने कहा कि ओजोन हृदय और फेफड़ों के लिए बेहद हानिकारक है।

हीटवेव के दिनों में ओजोन स्तर ऊंचा रहता है और गर्मी समाप्त होने के 3-4 दिन बाद भी बना रहता है। यही कारण है कि गर्मी के मौसम में मौतों का आंकड़ा काफी बढ़ जाता है।

अध्ययन की विशेषताएं

  • यह भारत में हीटवेव के दौरान सतह ओजोन का पहला व्यापक, दीर्घकालिक और देशव्यापी आकलन है।
  • अध्ययन 2010, 2016, 2019 और 2024 के प्रमुख एल नीनो वर्षों पर आधारित है।
  • पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में ओजोन स्तर में सबसे तेज दीर्घकालिक वृद्धि दर्ज की गई।
  • अनुमान आबादी के एक अरब से अधिक लोगों पर आधारित हैं, जहां थोड़ी-सी भी जोखिम वृद्धि हजारों मौतों का कारण बन सकती है।
  • अध्ययन में निरंतर ग्राउंड-लेवल ओजोन माप उपलब्ध न होने के कारण मॉडलिंग का सहारा लिया गया।

विशेषज्ञों की चिंता

लेखकों ने कहा कि पिछले अध्ययन ज्यादातर अलग-अलग शहरों या क्षेत्रों तक सीमित थे। यह अध्ययन पूरे देश के स्तर पर ओजोन के प्रभाव को दर्शाता है। सतह ओजोन न केवल गर्मी के दिनों में बल्कि मौसम के बाहर भी मौतों में योगदान देता है।

संदर्भ

अध्ययनकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि ओजोन और अन्य प्रदूषकों (NO₂ आदि) का संयुक्त प्रभाव श्वसन तंत्र को सीधे नुकसान पहुंचाता है। गर्मी की लहरें इस समस्या को और बढ़ा रही हैं।

सरकारी और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए सुझाव:

  • वायु गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करना।
  • हीटवेव अलर्ट सिस्टम में ओजोन स्तर को भी शामिल करना।
  • आमजन को जागरूक करना, खासकर हृदय रोग और COPD से पीड़ित लोगों को।
  • वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण और अन्य स्रोतों पर सख्त नियंत्रण।

यह अध्ययन जलवायु परिवर्तन, बढ़ती गर्मी और वायु प्रदूषण के संयुक्त खतरे को रेखांकित करता है। विशेषकर उत्तरी भारत (दिल्ली-एनसीआर, यूपी, पंजाब, हरियाणा आदि) में गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य जोखिम पहले से कहीं अधिक हो गए हैं।

स्रोत: द हिंदू समाचार पत्र (जेकब कोशी द्वारा रिपोर्ट)।

नागरिकों को सलाह दी जाती है कि हीटवेव और खराब वायु गुणवत्ता के दिनों में घर के अंदर रहें, मास्क का उपयोग करें और डॉक्टर की सलाह लें।

सरकार को इस अध्ययन के आधार पर प्रभावी नीतियां बनाने की जरूरत है।

By B P Singh

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