पांच सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे, फैट और SNF की मात्रा में कमी; यूरिया-डिटर्जेंट समेत जहरीली मिलावट नहीं मिली
हल्द्वानी।
दूध को लेकर उपभोक्ताओं के बीच भरोसे का बड़ा सवाल खड़ा करने वाली खबर हल्द्वानी से सामने आई है। नैनीताल जिलाधिकारी के निर्देश पर चलाए गए खाद्य सुरक्षा अभियान के दौरान हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र में विभिन्न कंपनियों के दूध के लिए गए पांच नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से लिए गए इन नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला, रुद्रपुर भेजा गया था। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित खाद्य कारोबारियों और कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात विभाग ने कही है।
5 अगस्त को लिए गए थे नमूने
जानकारी के मुताबिक सहायक आयुक्त एएस रावत के नेतृत्व में वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी अभय कुमार सिंह ने 5 अगस्त 2026 को हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र में वितरकों से दूध के नमूने लिए थे।
इन नमूनों में मदर डेयरी, परम, मधुसूदन और हेल्थवेज जैसे ब्रांडों का दूध शामिल था। प्रयोगशाला जांच में पांच नमूनों को अधोमानक पाया गया।
किस दूध में क्या कमी मिली?
जांच में सामने आई कमियां इस प्रकार हैं—
| दूध/ब्रांड | निर्धारित मानक | जांच में मिला |
|---|---|---|
| परम स्टैंडर्ड मिल्क | 4.5% फैट | 3.75% फैट |
| मधुसूदन काऊ मिल्क | 3.2% फैट | 3.11% फैट |
| 8.3% SNF | 8.0% SNF | |
| हेल्थवेज स्टैंडर्ड मिल्क | 4.5% फैट | 4.27% फैट |
| 8.5% SNF | 7.21% SNF | |
| खुला मिश्रित दूध (गाय-भैंस) | 4.5% फैट | 2.96% फैट |
| 8.5% SNF | 6.59% SNF | |
| मदर डेयरी काऊ मिल्क | 3.2% फैट | 3.04% फैट |
इन आंकड़ों से साफ है कि सबसे उल्लेखनीय कमी हेल्थवेज के SNF और खुले मिश्रित दूध के फैट व SNF में दिखाई दी।
राहत की बात: जहरीले रसायन नहीं मिले
हालांकि रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण राहत भी है। जांच के अनुसार इन नमूनों में यूरिया, स्टार्च, नमक, न्यूट्रलाइजर, शुगर और कृत्रिम सिंथेटिक रंग की मौजूदगी नहीं मिली।
यानी उपलब्ध जांच रिपोर्ट के आधार पर यह मामला सीधे तौर पर यूरिया या डिटर्जेंट जैसी जहरीली मिलावट का नहीं, बल्कि दूध के निर्धारित फैट और SNF मानकों को पूरा न करने का है। इसी वजह से नमूनों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत अधोमानक घोषित किया गया।
आखिर SNF क्या होता है और इसकी कमी क्यों महत्वपूर्ण है?
SNF यानी Solids-Not-Fat दूध में मौजूद वे ठोस पोषक तत्व हैं जो वसा के अलावा होते हैं। इनमें मुख्य रूप से प्रोटीन, लैक्टोज और खनिज आदि शामिल होते हैं।
दूध की गुणवत्ता जांच में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होता कि दूध सफेद है या स्वाद सामान्य है। उसकी निर्धारित संरचना और गुणवत्ता मानकों को पूरा करना भी जरूरी है।
इसलिए किसी नमूने में फैट या SNF की मात्रा निर्धारित मानक से कम मिलने पर वह दूध sub-standard श्रेणी में आ सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए बड़ा सवाल
हल्द्वानी जैसे बड़े शहर में दूध की खपत रोजाना हजारों परिवारों में होती है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के आहार में दूध की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में गुणवत्ता मानकों में कमी का मामला केवल कारोबारी नियमों तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि यह उपभोक्ता के अधिकार और खाद्य सुरक्षा का मुद्दा बन जाता है।
हालांकि वर्तमान जांच में खतरनाक रसायनों की मौजूदगी नहीं मिली है, फिर भी उपभोक्ताओं के लिए यह जानना जरूरी है कि जिस दूध को वे निर्धारित कीमत देकर खरीद रहे हैं, उसमें घोषित अथवा निर्धारित गुणवत्ता मानक पूरे हो रहे हैं या नहीं।
कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार अधोमानक पाए गए नमूनों के आधार पर संबंधित खाद्य कारोबारियों और कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि हल्द्वानी में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों ने आम लोगों से संदिग्ध खाद्य पदार्थों की सूचना विभाग को देने की अपील की है।
अब विभाग से पूछे जाने चाहिए ये सवाल
इस कार्रवाई के बाद निगरानी व्यवस्था को लेकर कुछ महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आते हैं—
पहला, यदि नामी ब्रांडों के दूध के नमूने अधोमानक पाए गए हैं तो ऐसे नमूनों की दोबारा जांच या विस्तृत सैंपलिंग कितने स्थानों पर होगी?
दूसरा, क्या संबंधित बैच का दूध अभी भी बाजार में उपलब्ध है और यदि है तो उसके संबंध में विभाग ने क्या कदम उठाए हैं?
तीसरा, जिन वितरकों से नमूने लिए गए थे, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी?
चौथा, क्या संबंधित कंपनियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है?
पांचवां, क्या जिले के अन्य शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों—जैसे नैनीताल, भवाली, रामनगर, लालकुआं और भीमताल—में भी इसी तरह व्यापक सैंपलिंग की जाएगी?
इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह कार्रवाई केवल नमूने लेने और रिपोर्ट जारी करने तक सीमित रहती है या इसके बाद वास्तविक प्रवर्तन कार्रवाई भी होती है।
देशभर में खाद्य गुणवत्ता को लेकर बढ़ी चिंता
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में खाद्य सुरक्षा और मानकों के अनुपालन को लेकर निगरानी पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हालिया राष्ट्रीय आंकड़ों पर आधारित एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में जांचे गए लगभग हर पांचवें खाद्य नमूने में मानकों का उल्लंघन पाया गया, जबकि उल्लंघनों की तुलना में दोषसिद्धि का अनुपात काफी कम रहा।
इससे एक व्यापक सवाल उठता है—सैंपल फेल होने के बाद कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है?
सिर्फ प्रयोगशाला रिपोर्ट तैयार होना पर्याप्त नहीं है। उपभोक्ता सुरक्षा के लिए सैंपलिंग, ट्रेसिंग, बैच की पहचान, बाजार से हटाना जहां आवश्यक हो, जवाबदेही और कानूनी कार्रवाई—पूरी प्रक्रिया का प्रभावी होना जरूरी है।
हल्द्वानी की कार्रवाई से निकला बड़ा संदेश
हल्द्वानी में हुई जांच का सबसे बड़ा संदेश यह है कि सिर्फ नामी ब्रांड का नाम गुणवत्ता की गारंटी नहीं माना जा सकता। खाद्य सुरक्षा विभाग की नियमित और वैज्ञानिक जांच ही यह निर्धारित कर सकती है कि कोई खाद्य उत्पाद निर्धारित मानकों पर खरा उतर रहा है या नहीं।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार पांच दूध नमूनों में गुणवत्ता संबंधी कमियां मिली हैं, लेकिन उनमें यूरिया, स्टार्च, नमक, न्यूट्रलाइजर, शुगर और कृत्रिम रंग नहीं पाए गए। इसलिए इसे “जहरीला दूध” या “रसायन मिला दूध” कहना उपलब्ध जांच के आधार पर सही नहीं होगा।
कैसे करें सैंपल जांच और शिकायत
- ऑनलाइन शिकायत करें
FSSAI की आधिकारिक वेबसाइट� पर जाकर Food Safety Connect/Consumer Grievance विकल्प इस्तेमाल करें।
शिकायत में लिखें:
दुकान/डेयरी का नाम और पूरा स्थान
दूध का ब्रांड/नाम
पैकेट का Batch/Lot Number
Manufacturing/Expiry date
खरीद की तारीख
बिल/रसीद की फोटो
पैकेट की फोटो
आपको किस बात पर संदेह है—फैट/SNF, खराब स्वाद, गंध, फटना, मिलावट आदि
स्पष्ट रूप से लिखें: “कृपया संबंधित उत्पाद का आधिकारिक खाद्य सुरक्षा सैंपल लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में जांच कराई जाए।”
शिकायत दर्ज होने पर Unique Complaint/Ticket Number मिलता है, जिससे स्थिति ट्रैक की जा सकती है। - सीधे FSSAI हेल्पलाइन पर भी शिकायत करें
FSSAI हेल्पलाइन: 1800-11-2100
समय: सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक।
ईमेल: helpdesk-foscos@fssai.gov.in �
FSSAI
FSSAI Consumer Grievance/Contact - शिकायत में खास तौर पर क्या मांगें?
शिकायत में सिर्फ “दूध खराब है” न लिखें। यह मांग रखें:
“संबंधित खाद्य प्रतिष्ठान का निरीक्षण कर दूध का विधिवत आधिकारिक नमूना FSS Act के तहत लिया जाए तथा अधिकृत खाद्य प्रयोगशाला में फैट, SNF, मिलावट एवं अन्य लागू खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच कराई जाए। जांच रिपोर्ट/की गई कार्रवाई की सूचना शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए।”
FSSAI के Food Safety Officer Manual में consumer complaint को सैंपल लेने का आधार माना गया है; अधिकारी परिस्थितियों के अनुसार निरीक्षण, साक्ष्य संग्रह और नमूना जांच के लिए भेज सकता है। - अपना दूध खुद लैब में ले जाकर जांच कराने से अलग है सरकारी सैंपल
अगर आपका उद्देश्य कानूनी कार्रवाई करवाना है, तो सबसे बेहतर है कि आप पहले विभाग से official sample collection करवाएं।
FSSAI के अनुसार निजी/स्वतंत्र खाद्य परीक्षण के लिए FSSAI-recognized/NABL-accredited laboratories भी उपलब्ध हैं, लेकिन FSSAI स्वयं सामान्य उपभोक्ता के लिए नियमित commercial testing service नहीं देता।
इसलिए “सरकारी अधिकारी द्वारा सैंपल उठवाना” और “निजी लैब में खुद जांच कराना”—दो अलग चीजें हैं। - शिकायत के साथ क्या सुरक्षित रखें?
पैकेट न फेंकें। यदि संभव हो तो:
📦 पूरा पैकेट
📸 सामने और पीछे की फोटो
🔢 Batch/Lot Number
📅 Manufacturing & Expiry Date
🧾 बिल
🏪 दुकान का नाम/पता
📹 जरूरत हो तो खरीद का वीडियो/फोटो
सब सुरक्षित रखें।
खासकर उस पैकेट को न खोलें जिसे आप संभावित आधिकारिक जांच के लिए उपलब्ध कराना चाहते हैं। - अगर विभाग कार्रवाई नहीं करता
शिकायत का Ticket/Complaint Number संभालकर रखें। FSSAI की प्रक्रिया में शिकायत राज्य के Designated Officer और फिर संबंधित Food Safety Officer तक भेजी जा सकती है; अधिकारी जांच और सैंपलिंग कर सकता है। �
FSSAI
यदि कार्रवाई संतोषजनक न हो तो उसी शिकायत संख्या का हवाला देते हुए FSSAI में escalation/दुबारा grievance किया जा सकता है।
देवभूमि के लोग न्यूज