बेंगलुरु में स्वतंत्रता दिवस पर HMT घड़ियों की एक दिन में ₹35 लाख से अधिक बिक्री ने जगाई पुरानी यादें, वहीं नैनीताल के रानीबाग में कभी सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी बनी HMT फैक्ट्री आज बंद
उत्तराखंड/कर्नाटक | विशेष रिपोर्ट | देवभूमि के लोग न्यूज़
एक तरफ कर्नाटक के बेंगलुरु में HMT घड़ियों की रिकॉर्ड बिक्री ने साबित कर दिया कि भारतीयों के दिल में आज भी इस स्वदेशी ब्रांड के लिए जबरदस्त भरोसा और भावनात्मक जुड़ाव मौजूद है, तो दूसरी तरफ उत्तराखंड के रानीबाग में कभी हजारों लोगों के सपनों और रोजगार का केंद्र रही HMT Watch Factory अब इतिहास का हिस्सा बन चुकी है।
स्वतंत्रता दिवस पर बेंगलुरु में HMT Watches की एक दिन की बिक्री ₹35 लाख से अधिक पहुंची। रिपोर्टों के अनुसार हजारों ग्राहक सीमित संस्करण और दुर्लभ HMT घड़ियां खरीदने पहुंचे। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने युवाओं की प्रतिक्रिया को लेकर खुशी जताई।
यह खबर सिर्फ HMT की बिक्री की खबर नहीं है।
यह उत्तराखंड के लिए एक बड़ा सवाल भी है—
जिस ब्रांड की घड़ियां आज कर्नाटक में रिकॉर्ड बिक रही हैं, उसी ब्रांड की उत्तराखंड स्थित फैक्ट्री आखिर क्यों बंद हो गई?
रानीबाग में 1982 में शुरू हुई थी HMT की बड़ी औद्योगिक इकाई
नैनीताल जिले के रानीबाग में HMT Watch Factory की स्थापना 12 नवंबर 1982 को हुई थी।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार स्थापना के समय यहां 986 कर्मचारी कार्यरत थे। यह केवल एक फैक्ट्री नहीं थी, बल्कि पहाड़ के इस क्षेत्र में औद्योगिक रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार थी।
आज जब उत्तराखंड में पहाड़ों से पलायन, स्थानीय रोजगार की कमी और औद्योगिक अवसरों की कमी लगातार चर्चा का विषय हैं, तब रानीबाग की HMT फैक्ट्री का इतिहास और उसका बंद होना विशेष महत्व रखता है।
फिर HMT रानीबाग क्यों बंद हुई?
इस सवाल का जवाब सरकारी दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज है।
भारत सरकार के अनुसार HMT Watches Limited को 1993 से लगातार घाटा हो रहा था और कंपनी अपने कर्मचारियों के वेतन की जरूरत तक पूरी करने की स्थिति में नहीं रह गई थी।
इसी आर्थिक संकट के चलते 6 जनवरी 2016 को Cabinet Committee on Economic Affairs (CCEA) ने HMT Watches Limited सहित कुछ HMT सहायक कंपनियों को बंद करने की मंजूरी दी।
इसके बाद कर्मचारियों के लिए VRS/VSS की व्यवस्था की गई और शेष कर्मचारियों को retrenchment compensation दिया गया।
लेकिन कहानी में एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ भी था
रानीबाग फैक्ट्री पूरी तरह बंद होने से पहले भी एक घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया था कि क्या इस इकाई में उत्पादन की क्षमता वास्तव में खत्म हो चुकी थी?
दिसंबर 2015 में बेंगलुरु कार्यालय से रानीबाग फैक्ट्री को 5,500 घड़ियों का ऑर्डर मिला था।
ऑर्डर की अनुमानित कीमत करीब ₹1.5 करोड़ बताई गई थी।
इस आदेश को पूरा करने के लिए लगभग दो साल से बंद पड़ी फैक्ट्री को अस्थायी रूप से दोबारा शुरू किया गया और मार्च 2016 तक उत्पादन पूरा करने की योजना बनाई गई।
यानी जिस फैक्ट्री को बंद करने की प्रक्रिया चल रही थी, उसी से कुछ समय पहले उत्पादन का ऑर्डर भी लिया गया था।
यह घटना आज भी एक बड़ा सवाल छोड़ती है—
क्या फैक्ट्री को आधुनिक तकनीक, नया निवेश, बेहतर मार्केटिंग और नए बिजनेस मॉडल के साथ पुनर्जीवित किया जा सकता था?
HMT के संकट की वजह केवल उत्तराखंड की फैक्ट्री नहीं थी
यह समझना भी जरूरी है कि रानीबाग का बंद होना केवल उत्तराखंड की प्रशासनिक या स्थानीय समस्या नहीं थी।
HMT Watches पूरे देश में आर्थिक संकट से जूझ रही थी।
CAG की पुरानी समीक्षा में HMT के सामने तकनीकी उन्नयन की कमी, पूंजी की कमी, कमजोर मार्केटिंग और बदलती मांग के अनुरूप कारोबारी रणनीति में कमी जैसे मुद्दों को रेखांकित किया गया था। विशेष रूप से mechanical watches की मांग में गिरावट का उल्लेख भी किया गया था।
दूसरी ओर सरकारी दस्तावेजों में HMT Watches, HMT Chinar Watches और HMT Bearings को chronically sick कंपनियों के रूप में चिन्हित किया गया था।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि केवल उत्तराखंड में फैक्ट्री होने के कारण HMT बंद हुई।
लेकिन सवाल यह जरूर है कि—
क्या घाटे में चल रही कंपनी के पुनर्गठन में उत्तराखंड की संपत्ति, कुशल मानव संसाधन और उत्पादन क्षमता को बचाने का पर्याप्त प्रयास किया गया?
दक्षिण भारत में HMT का औद्योगिक आधार क्यों मजबूत रहा?
HMT का इतिहास ही बताता है कि बेंगलुरु और दक्षिण भारत उसके औद्योगिक विकास के प्रमुख केंद्र रहे।
HMT की पहली Watch Factory 1962 में बेंगलुरु में स्थापित हुई।
इसके बाद 1972 में बेंगलुरु में दूसरी Watch Factory और 1978 में तुमकुर में Watch Factory स्थापित हुई।
यानी कर्नाटक में HMT का केवल बिक्री नेटवर्क नहीं था, बल्कि लंबे समय से उसका औद्योगिक, तकनीकी और डिजाइनिंग इकोसिस्टम विकसित हुआ।
HMT के ऐतिहासिक दस्तावेजों में बेंगलुरु और तुमकुर को watch manufacturing से जोड़ा गया है।
आज क्या स्थिति है?
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है।
आज HMT Watches Limited पुरानी अर्थों वाली स्वतंत्र उत्पादन कंपनी के रूप में सक्रिय नहीं है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इसकी closure process चल रही है/इसे closure के तहत रखा गया है।
लेकिन HMT Limited ने बेंगलुरु स्थित Auxiliary Business Division के माध्यम से HMT घड़ियों की assembly और sale जारी रखी है ताकि इस ऐतिहासिक ब्रांड को जीवित रखा जा सके। भारी उद्योग मंत्रालय भी इसे इसी रूप में वर्णित करता है।
2024-25 में बेंगलुरु के Auxiliary Business Division ने लगभग ₹9.05 करोड़ की watch assembly और ₹14.83 करोड़ की sales दर्ज की।
यानी तस्वीर यह नहीं है कि HMT की पूरी watch manufacturing industry दक्षिण में उसी पुराने रूप में चल रही है।
वास्तविकता यह है कि बेंगलुरु में HMT की watch-related assembly और sales गतिविधि जारी है, जबकि रानीबाग की पुरानी manufacturing unit बंद हो चुकी है।
और यही है उत्तराखंड का सबसे बड़ा सवाल
उत्तराखंड में HMT का विशाल औद्योगिक परिसर था।
पुरानी रिपोर्टों के अनुसार रानीबाग परिसर 91 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला था और वहां 500 से अधिक मशीनें थीं। कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाएं भी थीं।
लेकिन आज वहां उत्पादन नहीं हो रहा।
यह केवल एक फैक्ट्री बंद होने की कहानी नहीं है।
यह उस औद्योगिक क्षमता के खत्म होने की कहानी है जिसमें—
मशीनें थीं।
कुशल कर्मचारी थे।
तकनीकी ज्ञान था।
बाजार से जुड़ा ब्रांड था।
और उत्पादन का दशकों का अनुभव था।
क्या उत्तराखंड में कंपनियां इसलिए नहीं टिकतीं क्योंकि यहां industrial ecosystem नहीं बनाया गया?
यह प्रश्न HMT से आगे जाता है।
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में कई बार उद्योग स्थापित किए जाते हैं, लेकिन उनके आसपास—
- ancillary industries,
- component manufacturing,
- skilled technical training,
- R&D centres,
- logistics network,
- supplier ecosystem,
- export infrastructure
का पर्याप्त विकास नहीं हो पाता।
नतीजा यह होता है कि मुख्य इकाई कमजोर पड़ती है तो उसके साथ पूरा औद्योगिक ecosystem भी समाप्त हो जाता है।
इसके विपरीत दक्षिण भारत में बेंगलुरु, तुमकुर, चेन्नई, कोयंबटूर, हैदराबाद, कोच्चि आदि क्षेत्रों में लंबे समय से तकनीकी संस्थानों, उद्योगों, suppliers और skilled manpower का ecosystem विकसित हुआ है।
यही कारण है कि वहां एक कंपनी के बंद होने या कमजोर पड़ने के बावजूद उसी औद्योगिक आधार पर नई कंपनियां और नए उद्योग उभर सकते हैं।
उत्तराखंड के लिए HMT की कहानी एक चेतावनी
उत्तराखंड में रोजगार की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि राज्य की बड़ी आबादी को रोजगार के लिए मैदानी शहरों और दूसरे राज्यों की ओर जाना पड़ता है।
ऐसे में रानीबाग जैसी औद्योगिक इकाई को केवल एक पुरानी सरकारी फैक्ट्री के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है।
इसे यह समझने के उदाहरण के रूप में देखना चाहिए कि—
अगर किसी पहाड़ी क्षेत्र में एक बार बड़ा manufacturing ecosystem खत्म हो गया तो उसे दोबारा खड़ा करना बेहद मुश्किल होता है।
क्या HMT रानीबाग को फिर से औद्योगिक हब बनाया जा सकता है?
यह सवाल आज भी उठाया जा सकता है।
हालांकि 2016 में केंद्र सरकार ने बंद HMT इकाइयों को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव नहीं होने की बात कही थी।
वहीं सरकारी जवाब में यह भी कहा गया था कि बंद इकाइयों की immovable assets को सरकारी नीति के अनुसार केंद्र सरकार के मंत्रालयों/CPSEs या परिस्थितियों के अनुसार राज्य सरकार अथवा अन्य संस्थाओं को transfer किया जा सकता है।
इसलिए आज जरूरत भावनात्मक रूप से केवल “HMT वापस लाओ” कहने की नहीं, बल्कि यह तय करने की है कि रानीबाग की औद्योगिक संपत्ति का भविष्य क्या हो।
रानीबाग में बन सकता है नया Manufacturing & Technology Hub
यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो पुराने औद्योगिक परिसर को आधुनिक मॉडल में बदला जा सकता है।
यह जरूरी नहीं कि वहां फिर वही पुरानी घड़ियां बनाई जाएं।
इसके बजाय यहां—
Precision Manufacturing Hub
Electronics & Components Hub
Defence Components Manufacturing
Medical Devices Manufacturing
Renewable Energy Components
Robotics & Automation
Watch & Precision Engineering
Skill Development + R&D Centre
जैसी गतिविधियों को विकसित किया जा सकता है।
HMT की कहानी से उत्तराखंड क्या सीख सकता है?
पहला सबक—सिर्फ उद्योग लगाना पर्याप्त नहीं
उद्योग के आसपास पूरा ecosystem बनाना होगा।
दूसरा—तकनीकी अपग्रेड जरूरी है
पुरानी मशीनों पर पुराने उत्पाद बनाते रहना बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं दिला सकता।
तीसरा—स्थानीय युवाओं को industry-ready बनाना होगा
ITI, polytechnic, engineering institutions और industries को एक साथ जोड़ना होगा।
चौथा—पहाड़ में उद्योगों को केवल subsidy से नहीं बचाया जा सकता
उन्हें बाजार, logistics, technology और skilled manpower भी चाहिए।
पांचवां—बंद होने से पहले revival plan होना चाहिए
किसी PSU के लगातार घाटे में जाने के बाद अचानक closure के बजाय समय रहते restructuring, technology upgrade और professional management पर काम होना चाहिए।
कर्नाटक की ₹35 लाख बिक्री और उत्तराखंड की बंद फैक्ट्री—एक ही कहानी के दो पहलू
बेंगलुरु में HMT घड़ियों के लिए हजारों लोगों का पहुंचना बताता है कि ब्रांड की मांग और भावनात्मक पहचान पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
वहीं रानीबाग की बंद फैक्ट्री बताती है कि केवल लोकप्रिय ब्रांड होना पर्याप्त नहीं।
जरूरत है—
technology + manufacturing + marketing + investment + skilled manpower + strong supply chain
की।
सबसे बड़ा सवाल: पहाड़ में उद्योग क्यों नहीं बचते?
उत्तराखंड को अब इस सवाल पर गंभीर नीति बनानी होगी।
क्या पहाड़ों में स्थापित उद्योगों को केवल जमीन और शुरुआती incentives देकर छोड़ दिया जाता है?
क्या सरकार उद्योग बंद होने के संकेतों की निगरानी करती है?
क्या कंपनियों के लिए regional industrial support system है?
क्या स्थानीय युवाओं को उसी उद्योग से जुड़े skills दिए जाते हैं?
क्या पुराने industrial campuses को नए industries में बदलने की योजना है?
क्या उत्तराखंड अपनी पुरानी industrial assets का audit कर रहा है?
अगर इन सवालों के जवाब नहीं खोजे गए तो HMT रानीबाग की कहानी अकेली नहीं रहेगी।
देवभूमि के लोगों का सवाल
कर्नाटक में HMT की घड़ी हाथों में फिर दिखाई दे रही है।
बेंगलुरु में लोग अपने पुराने भारतीय ब्रांड के लिए पैसे खर्च कर रहे हैं।
युवा HMT को फिर पहचान दे रहे हैं।
लेकिन उत्तराखंड में उसी HMT का एक बड़ा औद्योगिक अध्याय बंद पड़ा है।
इसलिए उत्तराखंड को केवल यह नहीं पूछना चाहिए कि HMT क्यों बंद हुई?
बल्कि अब यह पूछना चाहिए—
“रानीबाग की जमीन, मशीनरी और औद्योगिक विरासत का अगला भविष्य क्या होगा?”
“क्या उत्तराखंड में बंद हो चुके औद्योगिक परिसरों को नए Manufacturing Hubs में बदला जा सकता है?”
“क्या पहाड़ के युवाओं को रोजगार देने के लिए यहां आधुनिक precision manufacturing और technology industries लाई जा सकती हैं?”
क्या करना जरूरी?
HMT की कहानी भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के उत्थान, संघर्ष और पुनर्गठन की कहानी है।
कर्नाटक में आज HMT की घड़ियों के प्रति दिखाई दे रहा उत्साह यह बताता है कि भारतीय ब्रांड की विरासत खत्म नहीं हुई है।
लेकिन रानीबाग की बंद फैक्ट्री यह भी बताती है कि विरासत को जिंदा रखने के लिए केवल भावनाएं नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, निवेश, प्रबंधन, बाजार और औद्योगिक नीति चाहिए।
उत्तराखंड के लिए अब सबसे बड़ा अवसर यह हो सकता है कि बंद पड़े पुराने industrial campuses को “म्यूजियम” नहीं, बल्कि “भविष्य के Manufacturing & Technology Hubs” में बदला जाए।
HMT की घड़ी शायद बंद हो गई हो, लेकिन उत्तराखंड की औद्योगिक घड़ी अभी भी दोबारा चलाई जा सकती है।
— देवभूमि के लोग न्यूज़ | विशेष औद्योगिक रिपोर्ट