प्रशासन के आग्रह पर आंदोलनकारियों ने निकाला जुलूस, 11 नवंबर तक सांकेतिक धरना जारी रहेगा; सरकार को 14 नवंबर तक मांगों पर गंभीरता दिखाने की चेतावनी
अस्कोट, पिथौरागढ़। जनसमस्याओं और क्षेत्र की उपेक्षा को लेकर अस्कोट सहित पूरे आसपास के क्षेत्र में जनता के बीच भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। क्षेत्र में बुनियादी जनसुविधाओं की कमी, सरकारी व्यवस्थाओं की बदहाली और शासन-प्रशासन की कथित उदासीनता को लेकर लोगों में लगातार आक्रोश बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र की समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण अब जनता आंदोलन के रास्ते पर उतरने को मजबूर है।
इसी क्रम में अस्कोट में जारी आंदोलन के तहत आज आंदोलनकारियों ने जुलूस निकालकर अपनी आवाज बुलंद की। दीपावली पर्व को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की ओर से मांगे गए सहयोग के बाद आंदोलनकारियों ने अनशन के स्थान पर सांकेतिक धरना देकर आज का कार्यक्रम संपन्न किया।

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। घोषणा के अनुसार 11 नवंबर यानी भाई दूज तक सांकेतिक धरना जारी रहेगा, जबकि 12 नवंबर से पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि 14 नवंबर के बाद भी यदि मुख्यमंत्री एवं प्रदेश सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक एवं निर्णायक रूप दिया जाएगा।आज के कार्यक्रम में दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, मातृशक्ति, व्यापारियों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की। आंदोलनकारियों ने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता की एकजुटता ही इस संघर्ष की सबसे बड़ी ताकत है।

डीडीहाट क्षेत्र में बढ़ता जनआक्रोश सरकार और प्रशासन के लिए एक गंभीर संकेत है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार पहाड़ के इस सीमांत क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से लेकर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएगी या जनता को अपनी मांगों के लिए आंदोलन और तेज करना पड़ेगा?

इस अवसर पर अस्कोट एवं आसपास क्षेत्र के तमाम आम नागरिक, बच्चे , बुजुर्ग युवा और तमाम संगठन अस्कोट विकास समिति के बैनर तले लगातार धरने पर डटे हुवे हैं।
देवभूमि के लोग | विशेष रिपोर्ट