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उत्तराखंड में राशन कार्ड घोटाला: अपात्रों को अनाज बांटकर गरीबों का हक मारा गया – खाद्य विभाग की नाकामी उजागर, विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता के बिना ऐसा घोटाला संभव नहीं, लेकिन कौन करेगा जांच?

देहरादून, 26 अप्रैल 2026: उत्तराखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में फर्जी और अपात्र राशन कार्डों का घोटाला लगातार सामने आ रहा है। हजारों फर्जी कार्डों के जरिए गरीबों के लिए предназначित सस्ता अनाज (गेहूं, चावल) अवैध तरीके से ब्लैक मार्केट में बेचा जा रहा था। इस घोटाले ने न केवल राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया, बल्कि वास्तविक गरीब परिवार भोजन सुरक्षा से वंचित रहे।

सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता के बिना ऐसा बड़ा घोटाला संभव ही नहीं था। फिर भी जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं – कौन करेगा निष्पक्ष जांच, जब खुद खाद्य विभाग इसमें फंस सकता है?

घोटाले के आंकड़े और जिलेवार खुलासे

  • ऊधम सिंह नगर: 2025 में सत्यापन अभियान में 2,450 फर्जी राशन कार्ड पकड़े गए। हाईकोर्ट ने फरवरी 2025 में इस जिले के घोटाले की जांच के आदेश दिए और चार महीने में रिपोर्ट मांगी।
  • देहरादून: जुलाई 2025 में 9,428 फर्जी आयुष्मान कार्ड फर्जी राशन कार्डों के आधार पर बनाए गए। 3,323 राशन कार्ड निरस्त किए गए।
  • हरिद्वार: 5,895 फर्जी कार्ड (सफेद, पीले और गुलाबी) रद्द किए गए।
  • पूर्ण राज्य: 2025-26 में 6,000 से अधिक अपात्र कार्ड निरस्त। कुछ अभियानों में 70,000 यूनिट फर्जी कार्डों का पता चला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अप्रैल 2026 में फिर से पूरे राज्य में सत्यापन अभियान शुरू करने के निर्देश दिए।

फर्जी राशन कार्डों के आधार पर आयुष्मान कार्ड बनाकर बाहरी राज्यों के लोग भी उत्तराखंड की स्वास्थ्य योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे थे।

कौन लोग रडार पर हैं?

जांच में मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियां शामिल हैं:

  • आर्थिक रूप से मजबूत परिवार (वार्षिक आय ₹6 लाख से अधिक, सरकारी नौकरी वाले या विदेश में रहने वाले)।
  • डुप्लिकेट कार्डधारक।
  • बाहरी राज्यों के प्रवासी जिन्होंने फर्जी दस्तावेज (आधार, निवास प्रमाण) जमा किए।
  • फेयर प्राइस शॉप (FPS) डीलर, जो फर्जी कार्डों पर अनाज उठाकर ब्लैक मार्केट में बेचते थे।
  • मध्यस्थ और दलाल जो फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे।

विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता: घोटाले की जड़

विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता के बिना ऐसा बड़ा घोटाला संभव नहीं था। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ऊधम सिंह नगर मामले में साफ कहा कि विभागीय अधिकारी और राशन डीलर एक-दूसरे के साथ मिलीभगत (hand-in-glove) में थे

  • जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत के आरोप लगे। पुराने मामलों (जैसे किच्छा, 2021) में DSO पर सीधे आरोप लगे कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया और जूनियर अधिकारियों पर दोष मढ़ दिया।
  • फर्जी कार्ड बनाने, आधार सीडिंग करने, e-KYC में गड़बड़ी करने और निरस्त कार्डों का डेटा गलत तरीके से इस्तेमाल करने में अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। देहरादून मामले में पुलिस जांच कर रही है कि किन जिला स्तर के अधिकारियों ने फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने में मदद की।
  • नियमित सत्यापन न करना, फर्जी दस्तावेज स्वीकार करना और FPS डीलरों पर निगरानी न रखना — ये सभी लापरवाहियां अधिकारी स्तर पर हुईं।

खाद्य विभाग की नाकामी क्यों?

यह घोटाला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की व्यवस्थागत विफलता को उजागर करता है:

  • NFSA के तहत केवल पात्र (BPL/AAY) परिवारों को लाभ मिलना चाहिए, लेकिन आय, निवास और परिवार स्थिति का नियमित सत्यापन नहीं हुआ।
  • Aadhaar seeding और डिजिटल मॉनिटरिंग में ढिलाई रही।
  • FPS डीलरों पर प्रभावी निगरानी का अभाव।
  • हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद समय पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई।

परिणामस्वरूप गरीबों का अनाज अपात्रों और ब्लैक मार्केट तक पहुंचा।

पर कौन करेगा जांच? – सबसे बड़ा सवाल

जब खुद खाद्य विभाग के अधिकारी संदिग्ध हैं, तो निष्पक्ष जांच कौन करेगा?

  • हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जांच सौंपी है, लेकिन कई बार विभागीय अधिकारी जांच में सहयोग नहीं करते।
  • पुलिस FIR दर्ज करती है, लेकिन बड़े स्तर पर राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव का खतरा रहता है।
  • विपक्ष और पर्यवेक्षक मांग कर रहे हैं कि स्वतंत्र एजेंसी (जैसे CBI, ED या लोकायुक्त) जांच करे, ताकि सच्चाई सामने आए।
  • मुख्यमंत्री धामी ने सख्त निर्देश दिए हैं, लेकिन अमल में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

सरकार की कार्रवाई और आगे के कदम

  • सभी जिलों में सत्यापन अभियान तेज किया गया।
  • अपात्र कार्ड रद्द करने के साथ बाजार मूल्य वसूली और FIR दर्ज की जा रही है।
  • नागरिकों से अपील: फर्जी ट्रांजेक्शन देखने पर हेल्पलाइन 1967 या 1800-180-2000 पर शिकायत करें।
  • पोर्टल: rcmspds.uk.gov.in पर राशन कार्ड स्टेटस चेक करें।

यह घोटाला उत्तराखंड में कल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है। विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता बिना बड़े पैमाने पर घोटाला नहीं चल सकता। अब जरूरत है निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की, ताकि दोषी अधिकारियों और डीलरों पर सख्त कार्रवाई हो और गरीबों का हक सुरक्षित रहे।

नोट: मामला जांच के अधीन है। आधिकारिक अपडेट के लिए खाद्य विभाग या हाईकोर्ट के आदेश देखें। फर्जी कार्ड रखने वाले स्वेच्छा से सरेंडर करें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई होगी।

देवभूमि उत्तराखंड में पारदर्शी व्यवस्था बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

By The Common Man

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