देवभूमि के लोग | विशेष रिपोर्ट
देहरादून/बागेश्वर/अल्मोड़ा/खटीमा। उत्तराखंड के गौरवशाली कत्यूरी राजवंश के नाम पर “Katyuri Kingdom” नाम से वाइन ब्रांड लॉन्च किए जाने के बाद कत्यूरी समाज में व्यापक असंतोष और विरोध देखने को मिल रहा है। समाज के विभिन्न सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, युवाओं तथा प्रवासी उत्तराखंडवासियों ने इसे उत्तराखंड की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान के साथ अनुचित जोड़ बताते हुए ब्रांड का नाम वापस लेने की मांग की है।
सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उनका कहना है कि कत्यूरी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि उत्तराखंड के स्वर्णिम इतिहास, संस्कृति, मंदिर परंपरा और हजारों वर्षों की विरासत का प्रतीक है। ऐसे ऐतिहासिक नाम का मादक पेय के ब्रांड के रूप में उपयोग समाज की भावनाओं को आहत करता है।
कौन बना रहा है यह ब्रांड?
उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, Golden Fun Foods & Beverage Pvt. Ltd. नामक कंपनी ने अपनी प्रीमियम वाइन श्रृंखला के अंतर्गत “Katyuri Kingdom” ब्रांड प्रस्तुत किया है। कंपनी की स्थापना वर्ष 2015 में ए. के. गुप्ता (A.K. Gupta) और डॉ. नीमा गुप्ता करवा द्वारा की गई बताई गई है। कंपनी का बुटीक वाइनरी परिसर उत्तराखंड के शिवारिक क्षेत्र के सिन्याड़ी (Sinyadi) गांव में स्थित बताया गया है। कंपनी का कहना है कि उसका उद्देश्य उत्तराखंड की स्थानीय उपज, हिमालयी विरासत और प्रीमियम वाइन निर्माण को वैश्विक पहचान देना है।
कंपनी के अनुसार उसकी वाइन श्रृंखला में स्थानीय फलों जैसे सेब, नाशपाती, प्लम, काफल, हिसालू, आम और विभिन्न साइट्रस फलों से उत्पाद तैयार किए जाते हैं तथा इन्हें उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है।
समाज का क्या कहना है?
कत्यूरी समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि किसी ऐतिहासिक राजवंश, जिसने उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को स्थापित किया, उसके नाम का उपयोग शराब या वाइन के लिए करना अनुचित है। उनका कहना है कि यह केवल एक व्यापारिक नाम नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, इतिहास और सम्मान से जुड़ा विषय है।
समाज ने राज्य सरकार, आबकारी विभाग तथा संबंधित कंपनी से इस विषय पर तत्काल हस्तक्षेप करने और ब्रांड का नाम बदलने की मांग की है।
पहले भी हो चुका है विवाद
उत्तराखंड में इससे पहले भी धार्मिक एवं सांस्कृतिक नामों वाले शराब ब्रांडों को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। “त्रिकाल” नामक व्हिस्की ब्रांड पर भी विरोध हुआ था, जिसके बाद राज्य सरकार ने स्पष्ट किया था कि उस ब्रांड को राज्य में निर्माण, पंजीकरण अथवा बिक्री की अनुमति नहीं दी गई थी।
कत्यूरी समाज की प्रमुख मांगें
- “कत्यूरी” नाम का शराब या अन्य मादक उत्पादों के लिए उपयोग तत्काल बंद किया जाए।
- संबंधित कंपनी ब्रांड नाम वापस ले या उसका नाम परिवर्तित करे।
- संबंधित कंपनी तत्काल सार्वजनिक माफी मांगे और उत्तराखण्ड से व्यवसाय बंद कर वापस भगायाजाए।
- राज्य सरकार से जिसने भी इस ब्रांड को शराब हेतु उपयोग करने की अनुमति दी, उसको बर्खास्त कर जेल में डाला जाए।
- उत्तराखंड सरकार ऐतिहासिक राजवंशों, लोकनायकों, देवी-देवताओं और सांस्कृतिक प्रतीकों के व्यावसायिक उपयोग पर स्पष्ट नीति बनाए।
- राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए कानूनी व्यवस्था विकसित की जाए।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे लोकतांत्रिक और कानूनी माध्यमों से अपना विरोध दर्ज कराएंगे तथा सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा करते हैं।
यह विवाद उत्तराखंड में सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक पहचान और व्यावसायिक ब्रांडिंग के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस का विषय बन गया है।
कत्यूरी समाज ने तत्काल कार्यवाही हेतु सरकार को लिखा है, तथा वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि कार्यवाही न होने पर जिम्मेदारी सरकार की होगी।
