उत्तराखंड के इतिहास में विशेष स्थान रखने वाला अस्कोट आज पलायन, रोजगार के अभाव, मानव-वन्यजीव संघर्ष और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। पुस्तकालय, संग्रहालय, कृषि अनुसंधान केंद्र और डिग्री कॉलेज की स्थापना की मांग भी उठी।
अस्कोट, पिथौरागढ़। उत्तराखंड के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े अस्कोट कस्बे की वर्तमान स्थिति ने क्षेत्र के विकास को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड के इतिहास और विभिन्न ऐतिहासिक लेखों में उल्लेखित अस्कोट आज भी सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस क्षेत्र की पहचान समृद्ध इतिहास और विरासत से जुड़ी रही है, वहां विरासत संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के विकास पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, रोजगार के सीमित अवसरों के कारण युवा पलायन करने को मजबूर हैं। खेती-किसानी भी अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। जंगली जानवरों के हमलों और फसलों को होने वाले नुकसान से ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित होती है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में रोजगार सृजन, कृषि को मजबूत बनाने और युवाओं को स्थानीय स्तर पर अवसर उपलब्ध कराने की मांग की है।
अस्कोट के विकास के लिए प्रमुख मांगें
अस्कोट विकास संघर्ष समिति और ग्रामीण एकता मंच से जुड़े लोगों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जिलाधिकारी पिथौरागढ़ के माध्यम से ज्ञापन भेजकर 13 सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- नगर पंचायत का दर्जा: अस्कोट को नगर पंचायत घोषित किया जाए।
- मल्लिकार्जुन मंदिर का विकास: मंदिर का सौंदर्यीकरण कर मोटर मार्ग को जीआईसी फील्ड तक पहुंचाया जाए।
- स्वास्थ्य सुविधाएं: जिला अस्पताल अथवा अति विशिष्ट चिकित्सा केंद्र का उच्चीकरण किया जाए तथा स्वास्थ्य विभाग की खाली भूमि पर प्रशिक्षण केंद्र स्थापित हो।
- सड़क संपर्क: अस्कोट से दयाकोट, गैराड़, धार और जम्तड़ी तक मोटर मार्ग तथा देवल से कूटा तक सड़क का निर्माण किया जाए।
- गांवों को सड़क से जोड़ना: बेड़ा से शहीद महिमन सिंह बिष्ट के गांव गडाली और बड़ीगांव तक संपर्क मार्ग बनाया जाए।
- मिनी स्टेडियम: बैड़ा में मिनी स्टेडियम का निर्माण कराया जाए।
- शवदाह केंद्र: हंसेश्वर घाट (तीतरी) में शवदाह केंद्र बनाया जाए।
- पेयजल योजना: स्वीकृत अस्कोट–गोरीछाल लिफ्ट पेयजल योजना के लिए वित्तीय स्वीकृति जारी की जाए।
- पॉलिटेक्निक की स्थापना: आईटीआई की खाली भूमि पर पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थापित किया जाए।
- पुल और सड़क सुधार: हेल्पिया–जैठीगांव मार्ग का डामरीकरण किया जाए तथा सांवलसेरा–ल्यूडापानी में मोटर पुल बनाया जाए।
- कथित झूठे मुकदमों की वापसी: गौरव हत्याकांड के विरोध में दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाए।
- नामकरण: राजकीय इंटर कॉलेज का नाम समाजसेवी स्वर्गीय राजेन्द्र सिंह पाल के नाम पर रखा जाए।
- स्थानीय विकास एवं रोजगार: क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने और युवाओं के पलायन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
विरासत संरक्षण के साथ शिक्षा और कृषि पर जोर
ग्रामीणों ने अस्कोट के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए एक बेहतर सार्वजनिक पुस्तकालय, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए संग्रहालय, कृषि अनुसंधान केंद्र और डिग्री कॉलेज की स्थापना की जरूरत भी उठाई है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि पुस्तकालय और डिग्री कॉलेज से युवाओं को शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे। कृषि अनुसंधान केंद्र पहाड़ी खेती, स्थानीय फसलों और वन्यजीवों से होने वाले नुकसान से निपटने के उपायों पर काम करने में मददगार हो सकता है। वहीं, संग्रहालय के माध्यम से अस्कोट के इतिहास, लोकसंस्कृति और पारंपरिक विरासत को संरक्षित कर सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐतिहासिक पहचान रखने के बावजूद अस्कोट आज पलायन, कमजोर कृषि व्यवस्था, रोजगार के अभाव और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में क्षेत्र के विकास के लिए समग्र और दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है।
6 नवंबर तक का अल्टीमेटम
समिति ने चेतावनी दी है कि 6 नवंबर 2026 तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 7 नवंबर से क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। ज्ञापन में 10 नवंबर से भूख हड़ताल और इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर चुनाव बहिष्कार जैसे कदम उठाने की बात कही गई है।
अस्कोट का मुद्दा केवल सड़क और पेयजल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहाड़ में पलायन रोकने, स्थानीय रोजगार बढ़ाने, कृषि को मजबूत करने, शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने और ऐतिहासिक विरासत बचाने से भी जुड़ा है। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इन मांगों पर क्या निर्णय लेता है और अस्कोट के विकास के लिए समयबद्ध कार्ययोजना कब तैयार होती है
इस अवसर पर ग्रामीण एकता मंच के संयोजक तरुण पाल जी के आह्वान पर ग्राम प्रधान (देवल टिकेंद्र पाल जी,हिनकोट कपिल पाल जी,चमलेख गार्जिया गायत्री बसेड़ा जी,खोलियागांव अंकिता पाल जी,रसगाडी रेखा धामी जी,जमतड़ी बाजार मुकेश महर जी,क्षेत्र पंचायत सदस्य(रसगाडी कमला पाल जी,देवल राज गोपाल गोपी)साथ ही नरेंद्र बसेड़ा जी,मन्नू लंठी जी,महेश पाल जी,जय सिंह बसेड़ा जी,हरीश पाल जी,आनंद कुवंर जी,हरीश पंत जी,आन सिंह जी, राजेस चंद जी,बिजय भंडारी जी,भवान सिंह जी,अर्जुन पाल जी,अर्जुन धामी जी और अस्कोट विकास समिति के सदस्यगण एवं युवा समाजसेवी रोशन पाल समेत जागरूक युवा मौजूद रहे।
