ट्रक ने IRB जवानों से भरी बस को मारी टक्कर, कई घायल; लाख दावों के बावजूद नहीं रुक रहे हादसे, लगातार हादसों के बावजूद सिस्टम कब जागेगा?
देहरादून | विशेष रिपोर्ट
देहरादून का मोहब्बेवाला–आशारोड़ी क्षेत्र एक बार फिर बड़े सड़क हादसे का गवाह बना है। मंगलवार सुबह आशारोड़ी चेकपोस्ट के पास तेज रफ्तार ट्रक ने IRB प्रथम बटालियन के जवानों को ले जा रही बस को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस पलट गई और कई लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
तीन दिन पहले भी हुआ था हादसा
सबसे गंभीर सवाल यह है कि इसी स्थान पर कुछ दिन पहले भी बड़ा सड़क हादसा हुआ था। रिपोर्टों के मुताबिक तीन दिन पहले इसी क्षेत्र में तेज रफ्तार ट्रक ने यूपी पुलिस में तैनात एक इंस्पेक्टर की कार को टक्कर मारी थी। इसके बावजूद मंगलवार को उसी क्षेत्र में दोबारा भारी वाहन की टक्कर से बड़ा हादसा हो गया।
यानी सवाल सिर्फ वाहन चालकों की लापरवाही का नहीं है। सवाल यह भी है कि एक ही स्थान पर बार-बार दुर्घटनाएं होने के बाद स्थायी सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई?
मोहब्बेवाला कब बनेगा हादसों से मुक्त?
मोहब्बेवाला और आशारोड़ी क्षेत्र देहरादून का महत्वपूर्ण प्रवेश मार्ग है। यहां भारी वाहनों की आवाजाही लगातार रहती है। ऐसे में सड़क डिजाइन, स्पीड नियंत्रण, चेकपोस्ट व्यवस्था, रोशनी, संकेतक, लेन प्रबंधन और ट्रैफिक निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
लेकिन बार-बार हादसे यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि क्या प्रशासन और संबंधित विभाग हादसे के बाद ही सक्रिय होते हैं?
अगर किसी स्थान पर लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं तो उसे केवल “दुर्घटना” कहकर आगे बढ़ जाना पर्याप्त नहीं है। वहां के ब्लैक स्पॉट का वैज्ञानिक ऑडिट, वाहन गति की निगरानी, भारी वाहनों के संचालन की समीक्षा और सड़क इंजीनियरिंग की कमियों को तत्काल दूर करना जरूरी है।
इंजीनियरिंग और जिम्मेदारी पर भी सवाल
लगातार हादसों के बाद सड़क निर्माण और यातायात प्रबंधन से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
कहां है सड़क सुरक्षा ऑडिट?
कहां हैं स्पीड-कंट्रोल के प्रभावी इंतजाम?
कहां है भारी वाहनों की निगरानी?
और बार-बार हादसे वाले स्थान को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
सिर्फ हादसे के बाद पुलिस पहुंचना और घायलों को अस्पताल पहुंचाना समाधान नहीं है। हादसे को रोकना ही वास्तविक सड़क सुरक्षा है।
देहरादून में सड़क हादसों का बढ़ता संकट
इसी बीच राज्य स्तर पर सामने आए आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं। 2026 के पहले आठ महीनों में उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई है और देहरादून भी उन जिलों में शामिल है जहां सड़क हादसों की समस्या गंभीर बनी हुई है।
ऐसे में मोहब्बेवाला जैसे संवेदनशील मार्गों को लेकर प्रशासन को तात्कालिक और स्थायी कार्ययोजना बनानी होगी।
देहरादून की जनता का सवाल
मोहब्बेवाला अब सिर्फ एक सड़क का नाम नहीं रह गया है—यह देहरादून की सड़क सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा बन चुका है। रोज होते हादसों से आम लोग खौफ जदा हैं। आए दिन। सड़क हादसे होना आम बात हो चुकी है।
एक ही क्षेत्र में लगातार हादसे हों, कुछ दिन पहले हादसा हो और उसके तुरंत बाद फिर भारी वाहन दुर्घटना कर दे, तो प्रशासन, संबंधित विभाग और सड़क इंजीनियरिंग व्यवस्था से जवाब मांगना जरूरी है।
हादसा होने के बाद मुआयना नहीं, हादसा होने से पहले रोकथाम चाहिए। खराब डिजाइन की सड़क बनाने वाले इंजीनियर और ठेकेदारों पर मुकदमा होना चाहिए।
मोहब्बेवाला को हादसों का “नासूर” बनने से रोकने के लिए जिम्मेदार विभागों को जवाबदेही तय करनी होगी। आखिर कब तक देहरादून की सड़कों पर हादसे होते रहेंगे और सिस्टम हर बार हादसे के बाद जागता रहेगा? मोहब्बेवाला निवासी वरुण मल्ल ने बताया कि क्षेत्र के निवासी लगातार हादसों से भवभीत हैं, हर एक्सीडेंट के बाद प्रशासन पुलिस आती है और अगले दिन फिर हादसा हो जाता है। प्रशासन ने अन्य कारणों पर भी शीघ्र कार्य करना चाहिए।
देवभूमि के लोग न्यूज़ | विशेष रिपोर्ट