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मीठा ज़हर बनती कोल्ड ड्रिंक्स? बढ़ती बीमारियों के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेष रिपोर्ट | स्वास्थ्य डेस्क

नई दिल्ली: गर्मी हो, पार्टी हो या फिर रोज़मर्रा की थकान — कोल्ड ड्रिंक्स आज करोड़ों लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं। लेकिन क्या ये रंग-बिरंगे, आकर्षक और स्वादिष्ट पेय वास्तव में स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हैं? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश सॉफ्ट ड्रिंक्स में अत्यधिक चीनी, कृत्रिम फ्लेवर, एसिड, कैफीन और विभिन्न प्रकार के प्रिजर्वेटिव होते हैं, जिनका लगातार सेवन शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

कोल्ड ड्रिंक में आखिर होता क्या है?

एक सामान्य कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक में निम्न प्रमुख तत्व पाए जाते हैं:

1. अत्यधिक चीनी (Added Sugar)

एक 300–350 मिलीलीटर की बोतल में लगभग 30 से 40 ग्राम तक चीनी हो सकती है, जो 7–10 चम्मच चीनी के बराबर है।

संभावित प्रभाव:

  • मोटापा
  • टाइप-2 डायबिटीज
  • फैटी लिवर
  • दांतों का क्षय
  • हृदय रोगों का बढ़ता खतरा

2. फॉस्फोरिक एसिड (Phosphoric Acid)

कोला आधारित पेयों में स्वाद और संरक्षण के लिए प्रयोग किया जाता है।

संभावित प्रभाव:

  • हड्डियों से कैल्शियम की कमी
  • किडनी पर अतिरिक्त दबाव
  • किडनी स्टोन का जोखिम बढ़ना

3. कैफीन (Caffeine)

कई कोला पेयों में कैफीन मिलाया जाता है।

संभावित प्रभाव:

  • नींद की समस्या
  • घबराहट और बेचैनी
  • बच्चों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता प्रभावित होना
  • रक्तचाप बढ़ना

4. सोडियम बेंजोएट (Sodium Benzoate – E211)

यह एक सामान्य प्रिजर्वेटिव है जो पेय पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए मिलाया जाता है।

वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि कुछ परिस्थितियों में सोडियम बेंजोएट विटामिन-C के साथ प्रतिक्रिया कर बेंजीन नामक पदार्थ बना सकता है, जिसे कैंसरकारी रसायन माना जाता है। हालांकि नियामक संस्थाएं निर्धारित सीमाओं के भीतर इसके उपयोग की अनुमति देती हैं, लेकिन लंबे समय तक अत्यधिक सेवन को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

5. कृत्रिम रंग (Artificial Colours)

  • कैरामेल कलर (E150d)
  • टार्ट्राजीन (E102)
  • सनसेट येलो (E110)

इनका उपयोग पेय को आकर्षक रंग देने के लिए किया जाता है।

6. कार्बन डाइऑक्साइड गैस

यही गैस कोल्ड ड्रिंक में बुलबुले पैदा करती है।

संभावित प्रभाव:

  • गैस और पेट फूलना
  • एसिडिटी
  • पाचन संबंधी समस्याएं

क्यों बढ़ रही है चिंता?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार भारत में मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। मीठे पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन इन बीमारियों के प्रमुख जोखिम कारकों में माना जाता है।

बच्चों और किशोरों में नियमित कोल्ड ड्रिंक सेवन:

  • मोटापे का जोखिम बढ़ाता है
  • दांतों को नुकसान पहुंचाता है
  • पोषण की कमी पैदा कर सकता है
  • स्वस्थ भोजन की आदतों को प्रभावित करता है

क्या ‘डाइट’ और ‘शुगर-फ्री’ ड्रिंक्स सुरक्षित हैं?

कई शुगर-फ्री पेयों में कृत्रिम मिठास (Artificial Sweeteners) जैसे:

  • Aspartame
  • Sucralose
  • Acesulfame-K

का उपयोग किया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन उत्पादों में कैलोरी कम हो सकती है, लेकिन इन्हें पूरी तरह स्वास्थ्यवर्धक नहीं माना जा सकता। इसलिए इनका सेवन भी सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए।

प्राकृतिक विकल्प क्या हैं?

विशेषज्ञ कोल्ड ड्रिंक्स की जगह निम्न विकल्प अपनाने की सलाह देते हैं:

ताजे फल

  • आम
  • संतरा
  • मौसमी
  • तरबूज
  • खरबूजा
  • अनार
  • पपीता

प्राकृतिक पेय

  • नारियल पानी
  • नींबू पानी
  • छाछ
  • लस्सी
  • बेल का शरबत
  • सत्तू का पेय
  • गन्ने का रस
  • जलजीरा

पारंपरिक भारतीय पेय

  • आम पन्ना
  • ठंडाई
  • रागी पेय
  • जौ का शरबत
  • हर्बल ड्रिंक्स

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

पोषण विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति कभी-कभार कोल्ड ड्रिंक पीता है तो तत्काल नुकसान की संभावना कम होती है, लेकिन रोजाना या अत्यधिक मात्रा में सेवन स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है।

वे सलाह देते हैं:

  • कोल्ड ड्रिंक्स को दैनिक जीवन का हिस्सा न बनाएं।
  • बच्चों को नियमित रूप से मीठे पेय न दें।
  • पानी, ताजे फल और प्राकृतिक पेयों को प्राथमिकता दें।
  • पैक्ड उत्पाद खरीदते समय लेबल अवश्य पढ़ें।

व्यवस्थित खानपान क्यों जरूरी?

कोल्ड ड्रिंक्स स्वाद और तात्कालिक ताजगी तो देती हैं, लेकिन इनमें मौजूद अत्यधिक चीनी, एसिड, कैफीन और प्रिजर्वेटिव लंबे समय में स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों के दौर में प्राकृतिक फलों, नारियल पानी, छाछ और पारंपरिक भारतीय पेयों की ओर लौटना स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी विकल्प साबित हो सकता है।

By B P Singh

News and public affairs

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