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सोना-चांदी पर सरकार का बड़ा झटका: कस्टम ड्यूटी बढ़ने से कीमतें चढ़ीं, अब निवेशकों के लिए ये हैं बेहतर विकल्प

नई दिल्ली, 13 मई 2026: सोना और चांदी खरीदने वालों को रातोंरात बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने कीमती धातुओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को बढ़ाकर 10% कर दिया है, जिससे सोने पर कुल इंपोर्ट ड्यूटी अब 15% हो गई है। नई दरें आज से लागू हो गई हैं। इस फैसले से फिजिकल गोल्ड महंगा हो गया है, जबकि आम आदमी, शादी-ब्याह करने वाले परिवार और निवेशक दोनों की जेब पर असर पड़ेगा।

आज के बाजार भाव (दिल्ली/मुंबई, गुडरिटर्न के अनुसार)

24 कैरेट सोना (प्रति 10 ग्राम):

  • आज: ₹1,54,140
  • कल: ₹1,54,130
  • बदलाव: +₹10 (तीन दिनों में कुल ₹1,640 की बढ़ोतरी)

प्रति ग्राम: ₹15,414
22 कैरेट सोना: भी इसी अनुपात में महंगा।

चांदी (प्रति किलो):

  • आज: ₹2,90,100
  • कल: ₹2,90,000
  • बदलाव: +₹100 (दो दिनों में ₹15,100 की तेजी)

चेन्नई में चांदी सबसे महंगी (₹3,00,100 प्रति किलो) पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अब घरेलू ड्यूटी बढ़ोतरी के कारण बाजार में लगातार तेजी का ट्रेंड बना हुआ है।

क्यों बढ़ाई ड्यूटी?

सरकार का यह कदम बढ़ते सोने के आयात (वित्त वर्ष 2025-26 में 24%+ की वृद्धि) और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव को कम करने के लिए उठाया गया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है। बढ़ा हुआ आयात व्यापार घाटा बढ़ा रहा था और रुपया कमजोर हो रहा था। UAE सहित सभी स्रोतों से आने वाले सोने पर नई ड्यूटी लागू होगी।

आम आदमी पर प्रभाव

  • शादी-ब्याह के सीजन में गहने और जेवर महंगे पड़ेंगे।
  • मेकिंग चार्ज, 3% GST और अब बढ़ी हुई इंपोर्ट ड्यूटी से कुल लागत काफी बढ़ जाएगी।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर, मेडिकल उपकरण जैसे उद्योगों में चांदी की लागत बढ़ने से उत्पादन महंगा हो सकता है।
  • सर्राफा बाजार में रिटेल प्राइस में और इजाफा होने की संभावना।

सोना निवेश के स्मार्ट विकल्प: फिजिकल गोल्ड से दूर रहें

फिजिकल सोने की बढ़ती लागत, स्टोरेज, सुरक्षा और मेकिंग चार्ज को देखते हुए विशेषज्ञ अब पेपर/डिजिटल गोल्ड विकल्पों की सलाह दे रहे हैं। ये विकल्प कम खर्च, ज्यादा सुविधा और बेहतर टैक्स ट्रीटमेंट देते हैं।

1. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) – सबसे बेहतर विकल्प
सरकार द्वारा जारी, 2.5% सालाना ब्याज + सोने की कीमत बढ़ोतरी। 8 साल की अवधि (5 साल बाद निकासी संभव)। मैच्योरिटी पर पूर्ण रूप से टैक्स फ्री। लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए आदर्श।

2. गोल्ड ETF
Nippon India ETF Gold BeES, HDFC Gold ETF आदि। स्टॉक एक्सचेंज पर आसानी से खरीद-बिक्री। कोई GST नहीं, कम खर्च, हाई लिक्विडिटी। 12 महीने बाद 12.5% LTCG टैक्स।

3. डिजिटल गोल्ड
MMTC-PAMP, Groww, PhonePe, Paytm आदि प्लेटफॉर्म। ₹1 से शुरू, UPI से खरीद-बिक्री। छोटी SIP के लिए अच्छा, लेकिन 3% GST लगता है।

4. गोल्ड म्यूचुअल फंड्स
SIP के जरिए नियमित निवेश, प्रोफेशनल मैनेजमेंट।

विकल्पों की तुलना

विकल्पअतिरिक्त लाभGST/चार्जलिक्विडिटीटैक्स लाभकिसके लिए best?
फिजिकल गोल्डकोई नहीं3% + मेकिंगऔसत24 माह बाद 12.5%जेवर उपयोग
SGB2.5% ब्याजशून्यमध्यममैच्योरिटी टैक्स फ्रीलॉन्ग-टर्म निवेश
Gold ETFकोई नहींशून्यबहुत अच्छी12 माह बाद 12.5%ट्रेडिंग और लिक्विडिटी
डिजिटल गोल्डकोई नहीं3% + स्प्रेडबहुत अच्छी24 माह बाद 12.5%छोटी राशि SIP

भविष्य की संभावनाएं:
ड्यूटी का पूरा असर अगले कुछ दिनों में और दिख सकता है। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता बनी रही तो कीमतें और बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि पोर्टफोलियो में 5-10% गोल्ड रखें, लेकिन फिजिकल के बजाय SGB या ETF को प्राथमिकता दें। लंबी अवधि में सोना सुरक्षित माना जाता है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव रह सकता है।

सलाह: निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता, लक्ष्य और वर्तमान नियम जांच लें। KYC कंप्लायंट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें और जरूरत पड़ने पर प्रमाणित फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।

सरकार का यह कदम अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में है, लेकिन निवेशकों को अब स्मार्ट और लागत-प्रभावी विकल्प चुनने होंगे। बाजार की नजर अब आगे के ट्रेंड और किसी नई सरकारी अधिसूचना पर है।

By The Common Man

News and public affairs

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