नई दिल्ली, 19 जनवरी 2026: राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) द्वारा NEET PG 2025 के थर्ड राउंड काउंसलिंग के लिए क्वालीफाइंग कटऑफ में की गई भारी कटौती ने पूरे देश के मेडिकल समुदाय को हिला कर रख दिया है। 13 जनवरी 2026 को जारी नोटिफिकेशन के तहत SC/ST/OBC (रिजर्व्ड कैटेगरी) के लिए कटऑफ को 40th percentile (235 अंक) से घटाकर 0th percentile (लगभग -40 अंक) कर दिया गया, जबकि जनरल/EWS के लिए 50th percentile (276 अंक) से घटाकर 7th percentile (103 अंक) और जनरल PwBD के लिए 5th percentile (90 अंक) कर दिया गया।
यह फैसला स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर लिया गया, ताकि लगभग 18,000 से अधिक खाली PG मेडिकल सीटों को भरा जा सके। लेकिन डॉक्टर्स के संगठनों ने इसे मेरिट का घोर अपमान, मेडिकल एजुकेशन की गुणवत्ता पर हमला और पेशेंट सेफ्टी के लिए खतरा बताया है। अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) दाखिल हो चुकी है।
कटऑफ कटौती का कारण: सरकार और IMA का पक्ष
राउंड 1 और 2 काउंसलिंग के बाद हजारों सीटें खाली रह गईं, खासकर प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटी में हाई फीस, नॉन-क्लिनिकल ब्रांचेज में कम रुचि और नए सीटों की देरी के कारण। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने भी स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर कटऑफ कम करने की मांग की थी, ताकि रेजिडेंट डॉक्टर्स की कमी से सरकारी अस्पतालों में मरीजों की देखभाल प्रभावित न हो।
NBEMS का कहना है कि यह “ऑप्टिमल यूटिलाइजेशन ऑफ सीट्स” के लिए जरूरी कदम है, और पहले भी ऐसे फैसले हो चुके हैं। सरकार का दावा है कि इससे डॉक्टर्स की कमी दूर होगी और ग्रामीण इलाकों में स्पेशलिस्ट उपलब्ध होंगे।
डॉक्टर्स का आक्रोश और विरोध: क्यों मचा बवाल?
- माइनस 40 अंक वाले कैंडिडेट्स भी अब काउंसलिंग में शामिल हो सकते हैं, जो नेगेटिव मार्किंग से आता है। डॉक्टर्स का कहना है कि इससे मिनिमम नॉलेज की कमी वाले लोग स्पेशलाइजेशन (सर्जरी, क्रिटिकल केयर आदि) में आएंगे।
- FAIMA, FORDA, United Doctors Front (UDF) और अन्य संगठनों ने इसे “स्टैंडर्ड्स का डायल्यूशन” और “मेडिकल प्रोफेशन की अखंडता पर हमला” करार दिया।
- चिंता है कि ऐसे स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स से पेशेंट सेफ्टी और पब्लिक हेल्थ खतरे में पड़ सकती है, खासकर लंबे समय में इलाज की गुणवत्ता गिर सकती है।
- कई डॉक्टर्स का आरोप है कि यह फैसला प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सीटों की नीलामी (auctioning) को बढ़ावा देगा, जहां पैसे से मेरिट ऊपर हो जाएगी।
- UDF ने इसे “well-oiled system” का हिस्सा बताया, जो प्राइवेट माफिया को फायदा पहुंचाता है।
सुप्रीम कोर्ट में PIL: विवरण और चुनौतियां
दाखिल तारीख: 16 जनवरी 2026
डायरी नंबर: Diary No. 3085/2026
आर्टिकल: संविधान के आर्टिकल 32 के तहत
पिटीशनर:
- Dr. Lakshya Mittal (United Doctors Front – UDF के प्रेसिडेंट)
- सोशल वर्कर Harisharan Devgan
- न्यूरोसर्जन Dr. Saurav Kumar
- Dr. Akash Soni (World Medical Association सदस्य)
- अन्य डॉक्टर्स और मेडिकल बॉडीज के प्रतिनिधि
मुख्य आधार और चुनौतियां:
- मेरिट का उल्लंघन: टॉपर (707 अंक) और नेगेटिव (-40 अंक) वाले दोनों अब योग्य, जो मेरिट-बेस्ड सिस्टम का मजाक उड़ाता है।
- संवैधानिक उल्लंघन: आर्टिकल 14 (समानता) और आर्टिकल 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन, क्योंकि कम योग्यता वाले डॉक्टर्स से पेशेंट्स की जान जोखिम में।
- मेडिकल स्टैंडर्ड्स पर खतरा: पोस्टग्रेजुएट ट्रेनिंग में न्यूनतम स्किल्स की कमी से भविष्य में इलाज प्रभावित होगा।
- प्राइवेट कॉलेजों को फायदा: यह फैसला कमर्शियलाइजेशन को बढ़ावा देगा।
- पेशेंट सेफ्टी: लाखों मरीजों की जान खतरे में।
मांगी गई राहतें:
- 13 जनवरी 2026 के NBEMS नोटिफिकेशन को रद्द किया जाए।
- मूल कटऑफ बहाल किया जाए।
- मेडिकल एजुकेशन में न्यूनतम स्टैंडर्ड्स की रक्षा के लिए दिशा-निर्देश।
- थर्ड राउंड काउंसलिंग पर स्टे।
PIL अभी शुरुआती स्टेज में है, सुनवाई की तारीख घोषित नहीं हुई।
भारत में मेडिकल एजुकेशन की क्वालिटी और ग्लोबल स्थिति
- NIRF 2025 में AIIMS दिल्ली टॉप पर (स्कोर 91.80), PGIMER और CMC वेल्लोर भी मजबूत।
- कुछ संस्थान Newsweek World’s Best Hospitals 2025 में टॉप रैंक में।
- लेकिन कुल मिलाकर रिसर्च आउटपुट कम, नए कॉलेजों में फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी।
- MBBS/PG सीटों में तेज वृद्धि हुई, लेकिन क्वालिटी कंट्रोल की कमी से ग्लोबल रेपुटेशन प्रभावित।
- यह कटऑफ कटौती समस्या को और गहरा कर सकती है, क्योंकि कम मेरिट वाले स्पेशलाइजेशन में आएंगे।
यह विवाद NEET से जुड़े पिछले घोटालों की याद दिलाता है। मेडिकल कम्युनिटी अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही है। क्या मेरिट और स्टैंडर्ड्स बचेंगे, या सीटें भरने को प्राथमिकता मिलेगी? समय बताएगा।
