देहरादून, नैनीताल /14-05-2026– उत्तराखंड की पहाड़ी सड़कें पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं, लेकिन इन पर होने वाली दुर्घटनाएँ राज्य के लिए एक लगातार संकट बनी हुई हैं। चार धाम यात्रा के मौसम में यातायात बढ़ने के साथ पिछले एक सप्ताह (8 से 14 मई 2026) में राज्य की सड़कों पर हुई कई दुर्घटनाएँ एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था की खोखली स्थिति को उजागर कर रही हैं। ओवरस्पीडिंग, खराब सड़कें, अपर्याप्त सुरक्षा उपाय, खराब मौसम और अधिकारियों की लापरवाही मौतों का सिलसिला बढ़ा रही है।
पिछले एक सप्ताह की प्रमुख दुर्घटनाएँ
13 मई 2026: नानकमत्ता हाईवे पर चंपावत शिक्षक की दर्दनाक मौत
उधम सिंह नगर जिले के नानकमत्ता क्षेत्र (दहला रोड) में मंगलवार देर रात एक भीषण सड़क हादसा हुआ। चंपावत जिले के माडली क्षेत्र निवासी 41 वर्षीय सरकारी शिक्षक संजय पांडे नई कार खरीदकर हल्द्वानी से अपने घर लौट रहे थे। उनकी कार और एक तेज रफ्तार फॉर्च्यूनर के बीच आमने-सामने टक्कर हो गई। इस हादसे में शिक्षक संजय पांडे और फॉर्च्यूनर सवार एक अन्य व्यक्ति (किच्छा के एक युवा व्यापारी) की मौके पर ही मौत हो गई। कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
शिक्षक संजय पांडे राजकीय इंटर कॉलेज बालातड़ी में कार्यरत थे। परिवार में उनकी पत्नी और बच्चे इंतजार कर रहे थे कि नई कार घर आएगी, लेकिन दुर्भाग्य से शव घर पहुंचा। पुलिस के अनुसार, ओवरस्पीडिंग और गलत ओवरटेकिंग मुख्य कारण रहे। इस हाईवे पर क्रैश बैरियर और पर्याप्त साइन बोर्डों की कमी बताई जा रही है। निर्दोष जान गंवा बैठे, पर NH और PWD के जिम्मेदारों को कोई फर्क नहीं पड़ा, न ही जवाबदेही तय की गई। लालकुआं और रुद्रपुर हाईवे पर मौतों का सिलसिला जारी है, सड़के सुलभ होने से ज़्यादा गम्भीर नुकसानदायक साबित हो रही है, पर सरकारी सिस्टम में एफिफिशिएंट कार्मिक की साफ तौर पर कमी दिखती है जो सुधार करने में भी असमर्थ साबित हो चुके हैं, परन्तु भ्रष्टाचार में सबसे आगे जरूर होंगे।
12 मई 2026: ऋषिकेश-देहरादून मार्ग पर बस टक्कर
सुबह करीब 8:30 बजे ऋषिकेश-देहरादून रोड पर काली मंदिर के निकट एक बस और चार धाम यात्रा वाली दूसरी बस टकराई। बीच में फंसी कार भी क्षतिग्रस्त हुई। पांच लोग घायल हुए। ओवरस्पीडिंग और गलत ओवरटेकिंग मुख्य वजह बनी।
10 मई 2026: टिहरी और चमोली में खाई में गिरने की घटनाएँ
टिहरी गढ़वाल में एक SUV घुमावदार सड़क पर अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और तीन घायल हुए। चमोली में चार धाम यात्रा बस के ब्रेक फेल होने से हादसा हुआ। क्रैश बैरियर होती तो ये घटना रुक सकती थी।
11 मई 2026: रुद्रप्रयाग क्षेत्र में तीर्थयात्री बस दुर्घटना
रुद्रप्रयाग के निकट एक तीर्थयात्री बस सड़क से फिसलकर किनारे जा गिरी। 18 यात्री सवार थे। तेज रफ्तार और फिसलन भरी सड़क कारण बनी।
8-9 मई: उधम सिंह नगर और नैनीताल क्षेत्र में दुर्घटनाएँ
8 मई को उधम सिंह नगर में तेज कार ने खड़े वाहन को टक्कर मारी। 9 मई को पिथौरागढ़-काठगोदाम मार्ग पर ट्रक-पिकअप टक्कर में तीन घायल।
13-14 मई: पहाड़ी जिलों में मौसम प्रभावित दुर्घटनाएँ
बारिश और ओले के कारण चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग आदि में कई छोटी दुर्घटनाएँ हुईं, जिसमें स्पीड और रोड डिजाइन भी मुख्य कारण है जिसमें गैर पेशेवर ठेकदारों द्वारा सड़के बना दी जाती हैं और मिलीभगत से विभाग द्वारा पास भी कर दी जाती है। डिजिटल इंडिया के दौर में भी यह होना दूर्भाग्यपूर्ण है।
पहाड़ी सड़कों पर सुरक्षा प्रावधानों की दयनीय स्थिति
उत्तराखंड की 80% से अधिक सड़कें पहाड़ी हैं, जहां घुमावदार रास्ते, संकरी चौड़ाई, खड़ी ढलान और भूस्खलन का खतरा रहता है। क्रैश बैरियर गायब या क्षतिग्रस्त हैं। चार धाम मार्गों पर 544 ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित हैं, लेकिन सुधार कार्य अत्यंत धीमे हैं। बाहरी पर्यटक भी पेशेवर न होने के कारण दुर्घटना के शिकार बन जाते हैं।
ओवरस्पीडिंग: मौत का सबसे बड़ा कारण
पहाड़ी सड़कों पर निर्धारित गति 30-40 किमी/घंटा है, लेकिन चालक 80-100 किमी/घंटा तक रफ्तार चलाते हैं। अधिकतर केसों में यही कारण होता है।
आंकड़े बोलते हैं
- 2025: 1846 दुर्घटनाएँ, 1242 मौतें।
- 2024: 1747 दुर्घटनाएँ, 1090 मौतें।
- पहाड़ी क्षेत्रों में फेटेलिटी रेट राष्ट्रीय औसत से बहुत अधिक।
अधिकारियों की जवाबदेही
परिवहन विभाग, NH, PWD, पुलिस और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी है। ब्लैक स्पॉट्स पर सुधार की गति धीमी है। दुर्ट्रॉघटना में इलाज भी समय से नहीं मिल पाता है।
क्या किया जाना चाहिए?
तत्काल उपाय:
- चार धाम और प्रमुख हाईवे पर रात में भारी वाहन प्रतिबंध, या स्पीड नियंत्रण सख्त हो, पर जांच कौन करे, परिवहन कार्मिक रात में नींद में रहते हैं, पुलिस अकेले क्या-क्या करे।
- GPS और स्पीड लिमिटर अनिवार्य।
- ब्लैक स्पॉट्स पर तुरंत क्रैश बैरियर, साइन बोर्ड और स्पीड ब्रेकर।
- ओवरस्पीडिंग पर सख्त चालान और सजा।
- हर जगह NPR/PTZ कैमरे से लगातार मॉनिटरिंग और नियम तोड़ने वाले को सख्त सजा का प्रावधान हो।
दीर्घकालिक समाधान:
- उच्च गुणवत्ता निर्माण और थर्ड-पार्टी ऑडिट।
- सोलर लाइट्स, फॉग लाइट्स और ITMS सिस्टम।
- ड्राइवर ट्रेनिंग और जन जागरूकता अभियान।
- हर जिले में मजबूत ट्रॉमा सेंटर।
नानकमत्ता में चंपावत शिक्षक की मौत समेत पिछले सप्ताह की घटनाएँ साबित करती हैं कि उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा एक गंभीर चुनौती है। लापरवाही हर परिवार को प्रभावित कर रही है। समय रहते ठोस कदम उठाए जाएँ, अन्यथा मौत का यह सिलसिला जारी रहेगा।
“सड़क दुर्घटनाएँ कोई दुर्भाग्य नहीं, बल्कि लापरवाही का परिणाम हैं।”
