लालकुआं (नैनीताल), 19 मई 2026:** बबूर गुम्टी रेलवे क्रॉसिंग पर विद्युत लाइन मरम्मत के दौरान पूर्व लाइनमैन **प्रेम सिंह कोरंगा** (निवासी संजय नगर, गौला गेट, बिंदुखत्ता) विद्युत पोल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पहले हल्द्वानी के सुभाष तिवारी अस्पताल (एसटीएच) ले जाया गया, फिर बेहतर इलाज के लिए बरेली के राम मूर्ति चिकित्सालय रेफर किया गया। उनकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई थी, लेकिन अब मौत की खबर आ रही है।
विभागीय पक्ष और सवाल
लालकुआं विद्युत उपखंड अधिकारी संजय प्रसाद** ने बताया कि प्रेम सिंह को हाल ही में कार्य में लापरवाही के चलते नौकरी से हटा दिया गया था और उनके घर सूचना भी भेज दी गई थी। इसके बावजूद वे बिना अनुमति के कार्यस्थल पर पहुंचे और ठेकेदार कर्मियों के मना करने के बावजूद पोल पर चढ़ गए। जो अपने आप में गंभीर हास्यास्पद बयान है।
**यह बयान कई सवाल खड़ा करता है:** एक व्यक्ति को नौकरी से हटाने के बाद भी कार्यस्थल पर बिना अनुमति कैसे पहुंचने दिया गया? क्या सुरक्षा गार्ड या सुपरविजन की कोई व्यवस्था नहीं थी? ठेकेदार कर्मी मना कर रहे थे, फिर भी उन्हें रोका क्यों नहीं गया? क्या साइट पर कोई Permit-to-Work सिस्टम लागू था, जैसा UPCL के Safety Manual में अनिवार्य है?
कई लोग इसे विभाग की **जिम्मेदारी से बचने** की कोशिश मान रहे हैं। हादसे को पूरी तरह कर्मचारी की “लापरवाही” पर थोपकर UPCL अपनी सिस्टेमिक कमियों को छुपाने की कोशिश कर रहा है। राज्य में बार-बार हो रहे ऐसे हादसों में अक्सर निचले स्तर के कर्मियों या ठेकेदारों को दोषी ठहराया जाता है, जबकि ऊपरी स्तर पर supervision, safety equipment और accountability की कमी को नजरअंदाज किया जाता है। जहां लोगो की लगातार मौत हो रही है, और विभाग अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है, यह पूर्ण रूप से एकाउंटेबिलिटी की कमी है और गंभीर स्थिति है।
राज्य में निरंतर दुर्घटनाएं
यह घटना UPCL से जुड़ी बिजली दुर्घटनाओं की लंबी श्रृंखला का हिस्सा है:-
**जून 2025, रिखणीखाल (पौड़ी):** संविदा लाइनमैन अनिल नेगी (26) की मौत — CM के निर्देश पर 3 इंजीनियर सस्पेंड।
– **जुलाई 2023, चमोली:** 15-17 लोगों की मौत ट्रांसफार्मर फटने से।
– **2018:** एक ही अवधि में 57 मौतें, 42 विकलांग।
मुख्य समस्याएं:
सुरक्षा उपकरण (हार्नेस, बेल्ट, इंसुलेटेड टूल्स) की कमी, अपर्याप्त ट्रेनिंग, टेंडर अनियमितता, ए ऑफिस लागू करना, ठेकेदारी प्रणाली में सुपरविजन की कमी और Safety Manual का कमजोर क्रियान्वयन।
जवाबदेही का अभाव, असंवेदनशीलता और भ्रष्टाचार के आरोप
UPCL पर **असंवेदनशीलता** की शिकायतें आम हैं — शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी कई बार कोई कार्रवाई नहीं होती, फाइलें घूमती रहती हैं। हेल्पलाइन (1912, 1800-419-0405) और ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायतें करने के बावजूद ग्राउंड लेवल पर सुधार नहीं दिखता।भ्रष्टाचार के आरोप भी पुराने हैं। पहले के वर्षों में टेंडरों में अनियमितताएं, सामग्री खरीद में घोटाले, favoritism और procurement नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए थे। कुछ मामलों में PMO स्तर तक शिकायतें पहुंचीं। कर्मचारी और जनता का कहना है कि ठेकेदारी प्रणाली में सेफ्टी बजट का दुरुपयोग या बचत करके काम चलाने की प्रवृत्ति हादसों को बढ़ावा दे रही है।
**परिणाम:** निर्दोष या पूर्व कर्मियों की जान जा रही है, परिवार बर्बाद हो रहे हैं, लेकिन सिस्टेमिक सुधार नहीं हो पा रहा।
कार्मिकों की मांगें
– बिना अनुमति कार्यस्थल पर पहुंचने की घटनाओं की रोकथाम के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल।
– सभी फील्ड वर्कर्स को अनिवार्य PPE, ट्रेनिंग और supervision।
– हर हादसे की **स्वतंत्र जांच** (न कि केवल विभागीय) और ऊपरी अधिकारियों पर जवाबदेही।
– भ्रष्टाचार और असंवेदनशीलता के खिलाफ UERC, vigilance और CM स्तर पर सख्त निगरानी।
– पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और सहायता।
** UPCL जैसा सार्वजनिक विभाग कर्मियों और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है। बार-बार हादसों को रोकने के लिए सिस्टेमिक बदलाव जरूरी है, न कि सिर्फ बयानबाजी।
मुख्य रूप से UPCL में भ्रष्टाचार आम बात हो चुकी है, खराब स्मार्ट मीटर से लेकर नौकरियों में व्याप्त भ्रष्टाचार की बात आम जनता से सुनने को मिल जाती है, और एक ही परिवार के कई लोग UPCL विभाग में कार्यरत होने की बात मिलीभगत और भ्रष्टाचार के बिना संभव नहीं है, जिसपर कई युवा संगठनों ने CBI जांच की मांग बार बार करी है, और टेंडर में हेराफेरा की खबरें सोशल मीडिया में आती रहती हैं, पर विभाग अपनी कार्यशैली सुधारने को तैयार बिल्कुल नहीं दिखता।
लगातार कार्मिकों की विभागीय ट्रेनिंग, काम सिखाने, बेहतर कार्य करने पर बल, जिम्मेदारी तय करने और कोड ऑफ एथिक्स लागू होने से शायद विभागीय एफिशियंसी में बढ़ोतरी हो, पर यह सब करे कौन!
(संदर्भ: विभिन्न समाचार रिपोर्ट्स, UPCL Safety Manual और सार्वजनिक शिकायतें)
