Fri. May 8th, 2026

उत्तराखंड में पुलिस अत्याचार और कानून-व्यवस्था का कोलोनियल राज: पुलिस की प्रताड़ना से यूवकों ने की आत्महत्या,खैरना चौकी कांड से उभरती सच्चाई

Signature: BNrEyIL2L3vQXUryAktMJUjmZwNVNcPvCS9leF824XIdEHYjOQOgC7Nz3/3PvzE3Fu+RFwvFQsA/lzYJXz7HQvDwe0BhV63xj0n43X1v7MLKQnpM0zPUT0BElu9YNGRz/LW4/4BZVctNCWCD57gEc34T0otQ9TdbLfAnQYECVI47Kd1EQZq4ZwKMUxM3ZD37gDOVQY5stcU/9y3dsXcXQfBXss0g51vI0WjMnVR7Agsy9emExmUrYAbcIg7ZPqD2RpT8Sxfh89jQVdPFkDGvPm0O9ybIz+hrSIUhYN3ArAivZhCEqk19EimnTBS9d0flfXaC26xl1cT/ZWKgSxmszyeoFafCfvzWb7bDTe5XklLgJltHieyYb66HyqbGcDLrC6RKgwPQxMdCf3eLV+OCA/LzxkYjjLaQYmayTZQNw5A1nuaKZMMjM983x6PGeHGjrqyRjAaJZUGEvbJ7YOo4Re3zckpXFG2IYaUVuVBf7j7FI+AJhweVt+duAerdpDJdD1whs3Xxdft4g1FttJoPmnx4FmfHGDCGSxp3XCCXLKmeTN3bAHVSClKPxCIVA67oiYbLsCXuSDfhsTV/7f0m4GdhBuSsemYg++TNm9gM79LTC2QqlOLLd6iV/rOdoKOV4nrtERsdbjYElk7wVX5ZHENz7h+FDMh21GD8raxiM0t/4/EeOG7b3uj6kdeYLnjGft6/GuQa5yLPrOkixaylnhGVNmRB7Lkr/cDaNJ+8tjJCs/WmBbjGC6UFZsB4aOWqsG0sSOGVqPLWkSs9EF4m3GknnRVpwi17KeK4p60x6htOvXReZZ0vjAJtp3wGjerFdvKTg8KCLfHPv5ZZrBG9GZVGtBb+YU9XI9D9ruZFR7B8ML6qa4QmmaMEE/BGWtecA9rzFzdAprt9+o+iVRQFgB35+riLS84OckZOhCreFiRU+tRkU2pzNnODVMavJvSzg1kV4Q/FTNqqE3rK5bInJTMblrOlZxz2O3cNKsHQ3WU=

**नैनीताल/देहरादून, 8 मई 2026:** उत्तराखंड के नैनीताल जिले की खैरना पुलिस चौकी में एक और दुखद घटना ने पूरे प्रदेश में पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेतालघाट के लोहाली गांव निवासी युवक **बालम सिंह बिष्ट** ने कथित पुलिस प्रताड़ना, गाली-गलौज, सिम कार्ड तोड़ने और 5000 रुपये छीनने के बाद आत्महत्या कर ली। मृतक के सुसाइड नोट और बहन मुन्नी जलाल की तहरीर के आधार पर एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चौकी प्रभारी रमेश पंत समेत सभी पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर लाइन हाजिर कर दिया और पूरी चौकी को बदल दिया।

यह घटना अकेली नहीं है। उत्तराखंड में पुलिस अत्याचार, भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और जवाबदेही की कमी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम खैरना कांड का पूरा विवरण, उत्तराखंड में पुलिस सुधार की कमी, अन्य समान मामले, भर्ती घोटालों, राजनीतिक हस्तक्षेप और सिस्टम की जड़ों में बनी सड़ांध को विस्तार से उजागर करेंगे।

### खैरना चौकी कांड: पूरा विवरण— 28 अप्रैल 2026 को बालम सिंह बिष्ट खैरना क्षेत्र में वीडियो बना रहे थे। पुलिस को शराब के नशे में होने की शिकायत मिली। पुलिस ने उन्हें पकड़कर चालान किया और परिवार को सौंप दिया। लेकिन परिवार का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने युवक के साथ बुरी तरह गाली-गलौज की, उसका सिम कार्ड तोड़ दिया और 5000 रुपये छीन लिए। बालम ने फोन पर अपनी बहन और जीजा को इस घटना की जानकारी दी और अपमानित महसूस करते हुए घर लौट गए। कुछ दिनों बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली। उनके पास से बरामद सुसाइड नोट में स्पष्ट रूप से पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए दुर्व्यवहार का जिक्र था। बहन मुन्नी जलाल ने थाने में तहरीर दी, जिसमें आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई। एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। उन्होंने सभी पांचों को सस्पेंड कर नई टीम तैनात कर दी। यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल सस्पेंशन ही पर्याप्त है? क्या दोषी पाए जाने पर उन्हें बर्खास्तगी और दंडित किया जाएगा, या फिर मामला रफा-दफा हो जाएगा?यह घटना उत्तराखंड की पहाड़ी पुलिस व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करती है — जहां छोटी-छोटी बातों पर आम नागरिकों के साथ बदसलूकी, वसूली और अपमान आम हो गया है।

### उत्तराखंड में पुलिस अत्याचार और आत्महत्या के अन्य मामले– खैरना कांड अकेला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में पुलिस हिरासत या प्रताड़ना से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं:-

**पौड़ी गढ़वाल मामला (मई 2026):** सतपुली के पास 20 वर्षीय पंकज कुमार ने पुलिस हरासमेंट का वीडियो सोशल मीडिया पर डालकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने मोटरसाइकिल जब्त करने और हरासमेंट का आरोप लगाया था। एसएसपी सरवेश पंवार ने जांच के आदेश दिए, लेकिन परिणाम अभी तक संतोषजनक नहीं।-

**उधम सिंह नगर (2017 और 2026 के मामले):** 2017 में 16 वर्षीय जियाउद्दीन रजा की पुलिस चौकी में फांसी पर लटका मिला। परिवार ने आरोप लगाया कि फांसी की रस्सी दूसरे केस की एविडेंस थी। कई पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए, लेकिन पूर्ण न्याय नहीं मिला। 2026 में किसान सुस्वांत सिंह की आत्महत्या मामले में एसएसपी पर सवाल उठे, कांग्रेस ने हटाने की मांग की।- अन्य घटनाएं: कई जिलों में युवकों, किसानों और आम नागरिकों पर मारपीट, गाली-गलौज और वसूली के आरोप लगे हैं। कुछ मामलों में हिरासत में मौत के आरोप भी हैं, हालांकि पुलिस उन्हें “आत्महत्या” बताती है। ये मामले दिखाते हैं कि समस्या व्यवस्थागत है, न कि इंसिडेंटल।

### उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था बिगड़ने के कारण

उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था बिगड़ने के कई कारण हैं:

1. **भर्ती में भ्रष्टाचार और राजनीतिक सिफारिशें:** पुलिस भर्ती में पेपर लीक, घूसखोरी और राजनीतिक हस्तक्षेप की घटनाएं सामने आई हैं। 2022 में यूकेएसएसएससी घोटालों में भाजपा-कांग्रेस दोनों कालों में भर्तियां रद्द हुईं। सिफारिशी भर्ती से अयोग्य, अराजनीतिक और अखंडता रहित लोग पुलिस में आ गए, जिनमें जवाबदेही की भावना कम है।

2. **राजनीतिक दबाव:** थाना स्तर पर स्थानीय नेताओं का दबदबा। कई बार राजनीतिक संरक्षण मिलने से पुलिसकर्मी मनमानी करते हैं।

3. **कम प्रशिक्षण और तनाव:** पहाड़ी क्षेत्रों में संसाधनों की कमी, लंबे ड्यूटी घंटे और आधुनिक प्रशिक्षण का अभाव।

4. **जनसंख्या और पर्यटन दबाव:** चारधाम यात्रा, पर्यटकों की भीड़ और माइग्रेशन से अपराध बढ़े, लेकिन पुलिस क्षमता नहीं बढ़ी।

5. **भ्रष्टाचार का संस्कार:** छोटी-मोटी वसूली (चालान, शराब, जुआ आदि) से लेकर बड़े घोटालों तक। आम नागरिक थाने से डरता है बजाय भरोसा करने के।

### पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार की समस्या— उत्तराखंड पुलिस में भ्रष्टाचार गहरी समस्या है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल और अन्य रिपोर्ट्स में पुलिस को सबसे भ्रष्ट विभागों में गिना जाता है। – **वसूली के तरीके:

** ट्रैफिक चालान में घूस, FIR दर्ज करने के लिए पैसे, झूठे केस में फंसाकर सेटलमेंट।-

**भर्ती घोटाले:** पेपर लीक, फिजिकल टेस्ट में अनियमितताएं, सिफारिशी नियुक्तियां।-

**उच्च पदों पर राजनीतिक प्रभाव:** थाना प्रभारी और एसएसपी स्तर पर ट्रांसफर-पोस्टिंग में सौदेबाजी के आरोप।परिणामस्वरूप अखंडता और जवाबदेही खत्म हो गई है।

### जवाबदेही की कमी: केवल सस्पेंशन, कोई बर्खास्तगी नहीं — सबसे बड़ी समस्या यही है। हर मामले में दो-चार पुलिसकर्मी सस्पेंड हो जाते हैं, लेकिन कुछ महीनों बाद बहाल हो जाते हैं। –

**कारण:** पुलिस एक्ट की कमजोरियां, यूनियन प्रोटेक्शन, राजनीतिक संरक्षण और न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति।- **प्रभाव:** पुलिसकर्मियों को कोई डर नहीं। वे जानते हैं कि “कुछ नहीं होगा”। इससे अत्याचार बढ़ता है।- **समाधान की जरूरत:** स्वतंत्र पुलिस शिकायत आयोग, समयबद्ध जांच, दोषी पाए जाने पर अनिवार्य बर्खास्तगी और संपत्ति जब्ती।

### भर्ती घोटालों का असर

उत्तराखंड में पिछले 10-15 वर्षों में शिक्षक, पुलिस, पटवारी आदि भर्तियों में बड़े घोटाले हुए। – पेपर लीक से योग्य युवा बाहर, अयोग्य अंदर।- राजनीतिक कार्यकर्ताओं और उनके रिश्तेदारों को प्राथमिकता।- इससे पुलिस फोर्स की गुणवत्ता गिर गई। अखंडता, सेवा भावना और कानून का सम्मान करने वाले लोग कम हो गए।

### समाधान के सुझाव और निष्कर्ष

उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन को तत्काल कदम उठाने चाहिए:- स्वतंत्र जांच एजेंसी बनाएं।- पुलिस भर्ती में पूर्ण पारदर्शिता, CCTV और AI मॉनिटरिंग।- नियमित ट्रेनिंग, सेंसिटाइजेशन प्रोग्राम।- थाना स्तर पर नागरिक निगरानी समिति।- दोषियों पर सख्त सजा — केवल सस्पेंशन नहीं।- राजनीतिक हस्तक्षेप मुक्त ट्रांसफर-पोस्टिंग।खैरना कांड एक चेतावनी है। अगर पुलिस आम नागरिक की रक्षा करने के बजाय उत्पीड़क बन जाए, तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता है। उत्तराखंड जैसे सुंदर पहाड़ी राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत न हुई तो विकास, पर्यटन और जनता का विश्वास सब खत्म हो जाएगा।सरकार, विपक्ष और नागरिक समाज को मिलकर इस सड़ांध को साफ करना होगा। बालम सिंह बिष्ट जैसी घटनाएं दोबारा न हों, यही न्याय होगा।

**नोट:** यह रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित है और जनहित में तैयार की गई है। न्याय की मांग जारी रहेगी। मित्र पुलिस का कई जगह रक्षक की जगह भक्षक बनकर कार्य कर रही है, जबकि उत्तराखंड की पुलिस की छवि कभी इतनी खराब नहीं रही, जैसे मामले लगातार अब निकल रहे हैं उससे भले और ईमानदार कार्मिक भी सख्ते में हैं, जिसको तत्काल रेगुलेट करने की आवश्यकता है।

By The Common Man

News and public affairs

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *