Fri. May 1st, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर के अध्यक्ष **एडवोकेट धन्या कुमार जैन** के खिलाफ **आपराधिक अवमानना** का नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर के अध्यक्ष **एडवोकेट धन्या कुमार जैन** के खिलाफ **आपराधिक अवमानना** का नोटिस जारी किया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश **सूर्या कांत** और न्यायमूर्ति **जॉयमाल्या बागची** की पीठ ने यह कदम उठाया।

### क्या था पूरा मामला?
धन्या कुमार जैन ने जबलपुर के पुलिस अधीक्षक को एक शिकायत पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने **बार काउंसिल ऑफ इंडिया** के अध्यक्ष **मनन कुमार मिश्रा** और सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज **जस्टिस सुधांशु धूलिया** की अध्यक्षता वाली हाई पावर्ड इलेक्शन कमिटी (जिसे जे. धूलिया कमिटी भी कहा जाता है) के खिलाफ गंभीर और आपत्तिजनक आरोप लगाए।

यह शिकायत राज्य बार काउंसिल चुनावों में बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों की पात्रता से जुड़ी थी। जैन ने इसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत पर व्यक्तिगत दुर्भावना रखने का आरोप लगाया और जस्टिस सुधांशु धूलिया की कमिटी के गठन पर सवाल उठाए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की बेंच द्वारा बार निकायों में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले आदेश को भी **न्यायिक पद का दुरुपयोग** बताया।

इसके अलावा, शिकायत में पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट जज जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले (घर से नोटों की बरामदगी से जुड़े विवाद) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एफआईआर दर्ज न कराने को **देश की न्यायपालिका द्वारा लोकतंत्र के खिलाफ जघन्य अपराध** करार दिया गया।

### सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान BCI की ओर से सीनियर एडवोकेट **गुरु कृष्ण कुमार** ने इन घटनाओं को “बिल्कुल दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कार्रवाई की मांग की।

मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत ने कहा, “हम अभी भी उम्मीद करते हैं कि कुछ बेहतर समझदारी आएगी। आखिरकार वकील वकील ही होते हैं। लेकिन जब हम देखते हैं कि कोई समझदारी बाकी नहीं रही, तो हम भी जानते हैं कि बिना समझ वाले लोगों से कैसे निपटा जाए।”

न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की, “क्या यही एक वकीलों के नेता की संयम है?”

कोर्ट ने जैन को **शो-कॉज नोटिस** जारी करते हुए पूछा है कि:
– उनके खिलाफ **आपराधिक अवमानना** की कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जाए,
– उनकी **बार लाइसेंस** क्यों न निलंबित की जाए,
– और उन्हें बार एसोसिएशन के पदाधिकारी पद से क्यों न हटाया जाए।

कोर्ट ने BCI की प्रार्थना को खारिज कर दिया कि राज्य सरकार को जैन की शिकायत पर कोई कार्रवाई न करने का अंतरिम निर्देश दिया जाए। इसके बजाय कहा गया कि जैन को कोर्ट में पेश होकर जवाब देना चाहिए।

### पृष्ठभूमि
यह घटना मध्य प्रदेश राज्य बार काउंसिल चुनावों से जुड़े विवाद के दौरान हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही बार एसोसिएशनों और बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण सुनिश्चित करने का आदेश दिया था, जिसका कुछ वकीलों द्वारा विरोध किया जा रहा है। जस्टिस सुधांशु धूलिया की कमिटी इन चुनावों की निगरानी और पात्रता संबंधी मुद्दों पर काम कर रही है।

धन्या कुमार जैन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और इस मामले में उनके द्वारा लगाए गए आरोपों को कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट का मानना है कि बार के पदाधिकारियों को सोशल मीडिया या शिकायतों के माध्यम से न्यायपालिका की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।

अभी मामले की अगली सुनवाई का इंतजार है, जहां धन्या कुमार जैन को अपना लिखित या मौखिक जवाब पेश करना होगा। यह घटना कानूनी समुदाय में चर्चा का विषय बन गई है कि बार के नेताओं को अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल करते हुए अदालतों और न्यायिक अधिकारियों के प्रति किस सीमा तक संयम बरतना चाहिए।

By The Common Man

News and public affairs

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *