देवभूमि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शुद्ध हवा और ऊंचे पहाड़ों
उत्तराखंड में स्वास्थ्य चुनौतियां संबंधी कई गंभीर समस्याएं भी आम हैं। विशेष रूप से पहाड़ी इलाकों में विटामिन-डी की कमी एक प्रमुख समस्या बन चुकी है, जो हड्डियों को कमजोर करती है और अन्य स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाती है।
हाल ही में पिथौरागढ़ जिले में स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया कि जांच कराए गए लगभग 51 प्रतिशत लोगों में विटामिन-डी की कमी पाई गई, जिसमें महिलाओं की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत और युवाओं (18-30 वर्ष) की 30 प्रतिशत रही।
उत्तराखंड में स्वास्थ्य चुनौतियां यह समस्या केवल पिथौरागढ़ तक सीमित नहीं है
यह पूरे उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में आम है। उच्च ऊंचाई, लंबे समय तक बादल छाए रहना, ठंड के कारण शरीर को ढककर रखना, घरेलू कामों में महिलाओं का अधिकांश समय घर के अंदर बीतना, मोबाईल में व्यस्त रहना और खराब शहरी नियोजन (poor urban planning), खेल कूद के मैदान- पार्क की कमी जैसे कारक विटामिन-डी की कमी को बढ़ावा देते हैं। राज्य के अधिकांश लोगों में यह कमी देखी जाती है, क्योंकि शहरों में ऊंची इमारतें, प्रदूषण और इनडोर जीवनशैली से सूर्य की किरणें (UVB rays) कम पहुंच पाती हैं। पहाड़ों में प्राकृतिक रूप से धूप कम मिलने से शरीर में विटामिन-डी का निर्माण प्रभावित होता है, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, ऑस्टियोमलेशिया (हड्डियों का नरम होना) और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
उत्तराखंड में स्वास्थ्य चुनौतियां एनएफएचएस-5 (2019-21) के आंकड़ों के अनुसार
बच्चों में स्टंटिंग (कम लंबाई) 27 प्रतिशत, वेस्टिंग (कम वजन के अनुसार लंबाई) 13 प्रतिशत और अंडरवेट 21 प्रतिशत है।
एनीमिया (खून की कमी) बच्चों में 59 प्रतिशत, गैर-गर्भवती महिलाओं में 42.6 प्रतिशत और किशोरियों में भी उच्च स्तर पर है।
थायरॉइड विकार (विशेषकर हाइपोथायरॉइडिज्म) भी आम हैं, जो आयोडीन की कमी, पर्यावरणीय कारकों और पोषण असंतुलन से जुड़े हैं। उत्तराखंड में स्वास्थ्य चुनौतियां अन्य समस्याएं शामिल हैं:
- एनीमिया और कुपोषण: ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों (जैसे थारू समुदाय) में महिलाओं में एनीमिया 90 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। बच्चों में कुपोषण से शारीरिक-मानसिक विकास प्रभावित होता है।
- थायरॉइड संबंधी विकार: हाइपोथायरॉइडिज्म में थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना और मूड स्विंग्स आम हैं।
- आयोडीन की कमी से गोइटर (गले की सूजन) भी देखा जाता है।
- संक्रामक रोग: वायरल फीवर, टाइफाइड, डेंगू और सांस संबंधी संक्रमण।
- दूषित पानी और खराब पहुंच से स्थिति बिगड़ती है।
- जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां: मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और मोटापा। पलायन, शहरीकरण और तनाव से ये बढ़ रहे हैं।
ये समस्याएं पहाड़ी भूगोल से जुड़ी हैं—दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी,
डॉक्टरों की 70 प्रतिशत तक कमी (विशेषकर पहाड़ी जिलों में), सड़कें अवरुद्ध होना .
प्राकृतिक आपदाएं (2025 में आपदाओं से स्वास्थ्य क्षेत्र को ₹2,579 करोड़ का नुकसान).
खराब शहरी नियोजन से शहरों में भी इनडोर जीवन बढ़ा है, जिससे विटामिन-डी की कमी अधिकांश लोगों में हो गई है।
उत्तराखंड में स्वास्थ्य चुनौतियां प्राकृतिक उपाय और बचाव
इन समस्याओं के लिए प्राकृतिक और घरेलू उपाय प्रभावी हैं, जो पहाड़ी जीवनशैली के अनुकूल हैं:
विटामिन-डी की कमी के लिए
- रोजाना सुबह 15-20 मिनट धूप में बैठें (हाथ, पैर और पीठ खुले रखें)। सुबह 7:30-9:30 बजे की धूप सबसे अच्छी होती है।
- तिल के तेल से मालिश कर धूप लें—यह अवशोषण बढ़ाता है।
- आहार में सूर्य-सुखाए मशरूम, काले तिल (मैग्नीशियम से भरपूर), घी, दूध, दही, अंडे की जर्दी और मछली शामिल करें।
- यदि कमी गंभीर हो तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें।
एनीमिया और कुपोषण के लिए
- आयरन-युक्त आहार: पालक, अनार, चुकंदर, गुड़, दालें, हरी सब्जियां और सेब।
- विटामिन-C से भरपूर फल (आंवला, नींबू, संतरा) आयरन अवशोषण बढ़ाते हैं।
- पारंपरिक उत्तराखंडी भोजन जैसे कालू, झंगोरा, मंडवा और जंगली सब्जियां पोषण से भरपूर हैं।
- बच्चों और महिलाओं के लिए नियमित जांच और आंगनवाड़ी कार्यक्रमों का लाभ लें।
थायरॉइड विकार के लिए
- आयोडीन-युक्त नमक और समुद्री भोजन (सीवीड यदि उपलब्ध)।
- अदरक की चाय या अदरक का सेवन—यह सूजन कम करता है।
- नारियल तेल: मध्यम-श्रृंखला फैटी एसिड थायरॉइड फंक्शन सुधारते हैं।
- विटामिन-डी और बी-विटामिन (अंडे, दूध, बादाम)।
- तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान और प्राणायाम (जैसे अनुलोम-विलोम)।
- अश्वगंधा, शतावरी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां (डॉक्टर की सलाह से) थायरॉइड संतुलन में मदद करती हैं।
सामान्य जीवनशैली उपाय
- संतुलित आहार: स्थानीय उत्पाद जैसे माल्टा, काफल, जंगली फल और अनाज।
- नियमित व्यायाम: पहाड़ी रास्तों पर टहलना या योग।
- स्वच्छ पानी और स्वच्छता: संक्रामक रोग रोकने के लिए।
- तनाव प्रबंधन: प्रकृति के बीच समय बिताना, परिवार के साथ समय।
राज्य सरकार ने 2025 को ‘हेल्थ हीरो ईयर’ घोषित किया, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, टेलीमेडिसिन और स्वास्थ्य शिविर चलाए जा रहे हैं।
नए मेडिकल कॉलेज और मोबाइल क्लिनिक से सुधार हो रहा है, लेकिन जागरूकता और पहुंच बढ़ाने की जरूरत है।
उत्तराखंडवासियों से अपील है कि छोटी लापरवाहियों से बचें—समय पर जांच करवाएं, प्राकृतिक उपाय अपनाएं,
नियमित रूप से व्यायाम योग, खेल और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। मानसिक स्वास्थ्य और बेहतर विचारों के लिए जीवन में ध्यान अपनाये I
