
देहरादून (17 मार्च 2026): उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) नीति एक बार फिर कामयाब साबित हुई। बिजली विभाग (पावर डिपार्टमेंट) के जूनियर इंजीनियर अतुल कुमार को पठरी बाग स्थित 33/11 केवी पावर हाउस इलाके में 80 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए देहरादून विजिलेंस टीम ने रंगे हाथ पकड़ लिया। यह रिश्वत एक उपभोक्ता के अपार्टमेंट में बिजली कनेक्शन जारी करने और लोड बढ़ाने के बदले मांगी गई थी (अपार्टमेंट पत्नी के नाम पर था)। शिकायत मिलने पर विजिलेंस ने प्रारंभिक जांच की, ट्रैप लगाया और आरोपी को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद बिजली विभाग में हड़कंप मच गया है। जांच में अन्य कर्मचारियों या अधिकारियों की संलिप्तता भी देखी जा रही है।
उत्तराखंड सरकार की एंटी-करप्शन ड्राइव: ट्रैप केस और रिकॉर्ड
मुख्यमंत्री धामी की सरकार ने 2025 में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को तेज किया। उत्तराखंड विजिलेंस एस्टेब्लिशमेंट ने पूरे वर्ष 21 ट्रैप ऑपरेशन चलाए, जिनमें 26 सरकारी अधिकारी (6 गजेटेड और 20 नॉन-गजेटेड) रंगे हाथ पकड़े गए। कुल रिश्वत की राशि 5.94 लाख रुपये थी। टोल-फ्री नंबर 1064 पर मिली शिकायतों पर 14 मामले दर्ज किए गए और 17 आरोपी गिरफ्तार हुए। कुल 28 मामले (5 ओपन इंक्वायरी, 2 इन्वेस्टिगेशन और 21 ट्रैप केस) निपटाए गए।
ट्रैप और रिकॉर्ड प्रक्रिया इस प्रकार है:-
*नागरिक शिकायत दर्ज करता है (ऑनलाइन या टोल-फ्री पर)।
*विजिलेंस प्रारंभिक जांच (डिस्क्रीट/प्रिलिमिनरी इंक्वायरी) करता है।
*मांग साबित होने पर मार्क्ड करेंसी नोट्स (रंगीन पाउडर या UV लाइट से चिह्नित), ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ ट्रैप लगाया जाता है।
*रिश्वत लेते ही आरोपी को मौके पर गिरफ्तार किया जाता है।
*सबूत के रूप में नोट्स, रिकॉर्डिंग और गवाहों के बयान दर्ज किए जाते हैं।
यह प्रक्रिया भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (2018 संशोधन) के तहत पूरी होती है।
भ्रष्टाचारी अधिकारियों पर मुकदमा और सजा प्रॉसिक्यूशन प्रक्रिया:-
*ट्रैप केस में तत्काल गिरफ्तारी और FIR दर्ज।
*जांच पूरी होने पर सैंक्शन फॉर प्रॉसिक्यूशन (धारा 19) लेने के बाद स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल।
*धारा 7: लोक सेवक द्वारा रिश्वत लेना – न्यूनतम 3 साल से 7 साल तक कैद + जुर्माना।
*धारा 13(1)(डी): आपराधिक कदाचार (पद का दुरुपयोग)।
*धारा 8: रिश्वत देने वाला भी दंडनीय (अधिकतम 7 साल), लेकिन मजबूरी में देने वाले को 7 दिन के अंदर रिपोर्ट करने पर छूट।
उत्तराखंड में पिछले तीन वर्षों में 150 से अधिक भ्रष्टाचारी जेल जा चुके हैं और 71 प्रतिशत दोषसिद्धि दर हासिल की गई है।
लोक सेवकों के लिए भ्रष्टाचार संबंधी नियम (Prevention of Corruption Act, 1988)
*कोई भी पब्लिक सर्वेंट (सरकारी कर्मचारी, अधिकारी) अपनी आधिकारिक ड्यूटी के बदले अनुचित लाभ (रिश्वत) नहीं ले सकता।
*मांग करना या स्वीकार करना ही अपराध है (धारा 7)।
*तीसरे पक्ष के माध्यम से या प्रभाव का दुरुपयोग भी दंडनीय (धारा 7ए)।
*प्रिजम्प्शन ऑफ करप्शन: अगर रिश्वत स्वीकार साबित हो तो अदालत मानेगी कि यह अनुचित लाभ के लिए था (धारा 20)।
*संपत्ति असमानुपातिक पाई गई तो अलग से मुकदमा।
*सरकारी नियमों के तहत सैंक्शन के बिना लोक सेवक पर मुकदमा नहीं चल सकता, लेकिन ट्रैप केस में तुरंत कार्रवाई होती है।
शिकायत कैसे दर्ज करें? (विस्तृत प्रक्रिया)उत्तराखंड विजिलेंस विभाग ने आम नागरिकों के लिए आसान व्यवस्था की है:-
1. टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1064 पर कॉल करें – तुरंत शिकायत दर्ज।
2. ऑनलाइन पोर्टल: vigilance.uk.gov.in पर जाकर नाम, पता, मोबाइल, ईमेल और घटना का विवरण भरें। शिकायत नंबर मिलेगा, ईमेल पर स्टेटस अपडेट आएगा।
3. लोकायुक्त (उच्च अधिकारियों के लिए): अलग से शिकायत की जा सकती है।
4. गुमनाम शिकायत भी स्वीकार की जाती है, लेकिन सबूत के साथ बेहतर परिणाम।
5. शिकायत के बाद विजिलेंस प्रिलिमिनरी इंक्वायरी कर ट्रैप तैयार करता है।
सुझाव: शिकायत दर्ज करने से पहले ऑडियो रिकॉर्डिंग या दस्तावेज रखें, लेकिन ट्रैप में शामिल न हों – विजिलेंस खुद संभालता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है – “भ्रष्टाचार करने वाले किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। जनता की सेवा और न्याय हमारी प्राथमिकता है।”
यह घटना उत्तराखंड में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में एक मजबूत कदम है। यदि आपको भी रिश्वत मांगी जा रही है तो तुरंत 1064 डायल करें या ऑनलाइन शिकायत करें – आपकी एक शिकायत पूरे विभाग को सुधार सकती है!
जागरूक रहें, भ्रष्टाचार रोकें!