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उत्तराखंड PCS चयन: खटीमा की बेटी श्रुति चंद पीसीएस परीक्षा पास कर बनीं जिला ग्रामोद्योग अधिकारी, वर्तमान में उत्तराखंड सचिवालय में हैं समीक्षा अधिकारी

देहरादून/खटीमा: उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) द्वारा PCS परीक्षा के माध्यम से जारी चयन सूची में खटीमा के बुढ़ा बाघ गांव की प्रतिभाशाली और अत्यंत मेहनती बेटी श्रुति चंद का चयन जिला ग्रामोद्योग अधिकारी (District Gramodyog Adhikari) के पद पर हुआ है। यह सफलता ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली उन countless लड़कियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बीच भी बड़े सपनों को पूरा करने के लिए रात-दिन मेहनत करती हैं।

वर्तमान में उत्तराखंड सचिवालय में समीक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत श्रुति चंद ने अपनी अथक मेहनत, अनुशासन, फोकस और कभी न हार मानने वाली भावना के बल पर इस मुकाम को हासिल किया है। PCS जैसी अत्यंत प्रतिस्पर्धी परीक्षा में सफलता पाना किसी भी उम्मीदवार के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन श्रुति ने इसे ग्रामीण पृष्ठभूमि से आकर संभव कर दिखाया है। उनकी कहानी साबित करती है कि सच्ची लगन और समर्पण किसी भी बाधा को पार कर सकता है।

श्रुति चंद उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा क्षेत्र अंतर्गत बुढ़ाबाघ गांव की वर्तमान निवासी हैं। उनके पिता जय बहादुर चंद ने बताया कि उन्होंने पूरे परिवार को पिथौरागढ़ जिले के बिसाबजेड़ गांव से खटीमा शिफ्ट किया था, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा और अवसर मिल सकें।

परिवार का संघर्ष और पिता का गर्व

जय बहादुर चंद ने भावुक होते हुए कहा, “मैं परिवार को बिसाबजेड़ (पिथौरागढ़) से खटीमा लाया था, ताकि बच्चों की शिक्षा ठीक से हो सके। आज मेहनत का फल मिल रहा है। श्रुति बहुत मेहनती लड़की है और बेहद फोकस्ड है। उसने कई परीक्षाएं पास की हैं और अब PCS में सफलता हासिल की है, और उम्मीद है वह आगे भी मेहनत जारी रखेगी।”

श्रुति की माता ने बेटी की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए आगे कहा, “मैं चाहती हूं कि श्रुति उत्तराखंड के लोगों की सेवा पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ करे। वह सभी क्षमताओं में राज्य के विकास, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के उत्थान के लिए कार्य करेगी”

मूल गांव बिसाबजेड़ में खुशी और प्रेरणा

श्रुति की सफलता की खबर उनके मूल गांव बिसाबजेड़ (पिथौरागढ़) पहुंचते ही वहां खुशी की लहर दौड़ गई। गांववासी इस खबर से बेहद उत्साहित हैं और मानते हैं कि श्रुति की यह उपलब्धि गांव के अन्य बच्चों, खासकर लड़कियों को सिविल सेवाओं और उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करेगी।

बिसाबजेड़ के एक स्थानीय निवासी ने कहा, “श्रुति हमारी गांव की बेटी है। उसकी मेहनत ने पूरे गांव का नाम रोशन कर दिया है। आजकल के समय में जब कई युवा हतोत्साहित हो जाते हैं, तब श्रुति जैसी सफलता हमें विश्वास दिलाती है कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। यह कई अन्य बच्चों को पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नई ऊर्जा देगी।”

श्रुति की मेहनत भरी यात्रा

श्रुति चंद बचपन से ही पढ़ाई में अत्यंत लगनशील रहीं। सचिवालय में समीक्षा अधिकारी के पद पर जिम्मेदारियां निभाते हुए भी उन्होंने PCS की तैयारी को कभी नहीं छोड़ा। दिन की नौकरी के बाद रात को देर तक पढ़ाई, स्व-अध्ययन, ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग और निरंतर अभ्यास — यही उनका फॉर्मूला रहा।

वे एक सच्ची मेहनती लड़की हैं, जो चुनौतियों को अवसर में बदलने में विश्वास रखती हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि, सीमित सुविधाएं और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद उनकी फोकस्ड सोच और अनुशासन ने उन्हें बार-बार सफलता दिलाई। कई अन्य परीक्षाओं में पहले ही सफलता पा चुकी श्रुति की यह PCS उपलब्धि उनके अंदर छिपी उस जज्बे को दर्शाती है, जो युवा पीढ़ी को प्रेरित करता है — “सपने देखो और उन्हें हासिल करने के लिए मेहनत करो।”

इससे पहले श्रुति कई परीक्षाएं पास कर चुकी हैं जिसमें पहले वह ग्राम विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत थी, उसके बाद पिछले एक वर्ष से सचिवालय में समीक्षा अधिकारी और अब वह पीसीएस में चयनित हो गईं।

पद की महत्वपूर्ण भूमिका

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी का पद राज्य के ग्रामीण विकास के लिए बेहद अहम है। इस पद पर रहते हुए अधिकारी कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देते हैं, स्वरोजगार योजनाओं को लागू करते हैं, गांवों में छोटे उद्योग स्थापित करने में मदद करते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का कार्य करते हैं। श्रुति चंद जैसी मेहनती और संवेदनशील अधिकारी उत्तराखंड के पहाड़ी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर सृजित कर युवाओं को आत्मनिर्भर बना सकती हैं।

स्थानीय प्रतिक्रिया

बुढ़ाबाघ गांव, खटीमा क्षेत्र और पिथौरागढ़ जिले में श्रुति की सफलता पर उत्सव सा माहौल है। माननीय मुख्यमंत्री ने भी उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की है और स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों ने उन्हें बधाई दी है। उनकी सफलता को महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण युवाओं के लिए एक आदर्श उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

श्रुति चंद ने अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों, परिवार और गुरुजनों को दिया है। वे भविष्य में उत्तराखंड के विकास, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के उत्थान और युवा सशक्तिकरण के लिए पूरे समर्पण के साथ कार्य करने के लिए तैयार हैं।


श्रुति चंद की यह सफलता उन सभी मेहनती लड़कियों और लड़कों के लिए एक संदेश है जो सपनों की राह पर चल रहे हैं — “मेहनत रंग लाती है, चाहे रास्ता कितना भी कठिन हो।”।

श्रुति ने यह भी कहा कि सरकारी नौकरी ही जनसेवा का एकमात्र साधन नहीं है, और आज का समय युवाओं के लिए अवसरों का समय है, जिसमें कार्य की अनेको संभावनाएं हैं। अगर हर इंसान अपने कार्य को पूरी श्रद्धा और सही नियत से करे तो वही उसके लिए सफलता है।


By The Common Man

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