भारत आज दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां कैंसर एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। ICMR-NCRP (National Cancer Registry Programme), Globocan 2022 और हालिया प्रोजेक्शन के अनुसार, 2022 में नए कैंसर मामले 14,61,427 थे (क्रूड रेट: 100.4 प्रति 1 लाख), मौतें 9,16,827। 2024 में नए मामले 15,62,099 तक पहुंच गए, मौतें 8,74,404। 2025 में नए मामले 15.7 लाख से अधिक अनुमानित हैं, जो 2020 से 12.8% वृद्धि दर्शाता है। जीवनकाल जोखिम 1 में 9 (11%) है, मिजोरम में 21.1% (पुरुष) और 18.9% (महिला) तक।
वैश्विक स्तर पर भी स्थिति गंभीर है। WHO और IARC की फरवरी 2026 की नई रिपोर्ट (Nature Medicine में प्रकाशित) के अनुसार, 2022 में दुनिया भर में 18.7 मिलियन नए कैंसर मामलों में से 37-40% (लगभग 7.1 मिलियन) 30 संशोधनीय (modifiable) जोखिम कारकों से जुड़े थे, जिन्हें रोका जा सकता है। तंबाकू सबसे बड़ा कारण (15.1%), उसके बाद संक्रमण (10.2%) और शराब (3.2%)। लंग, स्टमक और सर्वाइकल कैंसर में लगभग आधे रोके जा सकने वाले मामले हैं। यह रिपोर्ट World Cancer Day 2026 (4 फरवरी) से पहले जारी हुई, जो रोकथाम की अपार संभावना पर जोर देती है। UICC की World Cancer Declaration 2025-2035 में 5 वैश्विक लक्ष्य, 5 एक्शन एरिया और 5 सिद्धांतों के माध्यम से समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया गया है।
यह रिपोर्ट तमिलनाडु में 2025 के 1,00,097 नए मामलों, राज्यवार बोझ, दिल्ली में युवाओं (44 वर्ष से कम) में 33% मौतों, उत्तराखंड/मेरठ ट्रेंड, प्रदूषण कारणों, जेनेटिक फैक्टर, रोकथाम तकनीकों, उपचार सुविधाओं के साथ-साथ आम जनता के लिए अतिरिक्त सावधानियां और अनिवार्य/अनुशंसित जांचें (NPCDCS/NFHS आधारित) को विस्तार से कवर करती है। वैश्विक रणनीतियां भारत के लिए भी प्रासंगिक हैं, जहां रोकथाम दर अभी कम है लेकिन संभावनाएं अधिक।
राष्ट्रीय स्तर पर कैंसर का बोझ: आंकड़े और ट्रेंड
Globocan 2022 से: नए मामले 14,13,316 (पुरुष 6,91,178; महिला 7,22,138)। प्रमुख: ब्रेस्ट (26.6% महिलाओं में), सर्वाइकल (17.7%), ओरल/लिप (15.6% पुरुषों में), लंग, एसोफेगस।
NFHS-5 (2019-21): स्क्रीनिंग दर कम – सर्वाइकल 1.9%, ब्रेस्ट 0.9%, ओरल 0.9%। इससे देर से पता चलता है, सर्वाइवल रेट कम। 2015-2024 में मामले 10.4% बढ़े, मौतें 28.6%।
प्रोजेक्शन: 2025 में 15.7 लाख+, 2045 तक 24-25 लाख। महिलाओं में मृत्यु दर तेज।
NFHS-5 (2019-21) डेटा से स्क्रीनिंग दर बेहद कम है: सर्वाइकल कैंसर जांच केवल 1.9% महिलाओं में (शहरी 2.2%, ग्रामीण 1.7%), ब्रेस्ट 0.9%, ओरल 0.9%। इससे स्टेज III-IV में डायग्नोसिस आम है, जिससे 5-वर्षीय सर्वाइवल रेट कम (ब्रेस्ट में 60-70%, सर्वाइकल में 40-50%)। 2015-2024 में नए मामले 10.4% बढ़े (13.9 लाख से 15.3 लाख), लेकिन मौतें 28.6% बढ़ीं (6.8 लाख से 8.7 लाख), जो देर से पता लगाने और उपचार पहुंच की कमी को दर्शाता है।
प्रोजेक्शन: 2025 में 15.7 लाख+ नए मामले, 2045-2050 तक 24-25 लाख या इससे अधिक। महिलाओं में मृत्यु दर तेज (APC 1.5-4.8%), पुरुषों में 1.3-2.6%। मध्य आयु (35-64) और वृद्धावस्था में 70% बोझ। उत्तर-पूर्व, दिल्ली, पंजाब, केरल में उच्च AAIR (आयु-समायोजित दर)।
राज्यवार कैंसर बोझ: विस्तृत विश्लेषण (2024-2025 आधारित)
कैंसर बोझ जनसंख्या, AAIR, जीवनशैली और पर्यावरण पर निर्भर करता है।
प्रमुख राज्य:
उत्तर प्रदेश: सबसे अधिक (~2.1-2.21 लाख मामले 2024 में), जनसंख्या अधिक होने से। ब्रेस्ट, ओरल प्रमुख।
महाराष्ट्र: ~1.28 लाख (8.15% राष्ट्रीय बोझ)।
पश्चिम बंगाल: ~1.19 लाख।
तमिलनाडु: 2025 में पहली बार 1,00,097 नए मामले (2020 के 68,750 से वृद्धि)।
चेन्नई 8,505, कांचीपुरम 7,295, वेल्लोर 6,525। महिलाओं में 53,542, पुरुषों में 46,555। शहरीकरण, तनाव, देर से स्क्रीनिंग मुख्य।
बिहार: ~1.09 लाख।
उत्तर-पूर्वी राज्य: उच्च AAIR। मिजोरम में जीवनकाल जोखिम 21.1% (पुरुष), 18.9% (महिला)। Aizawl में पुरुष AAIR 256.1, महिला 217.2। ओरल, हाइपोफैरिंक्स, लंग प्रमुख।
असम, मेघालय में tobacco-related कैंसर।
केरल: AAIR ~135-169 प्रति लाख, ब्रेस्ट उच्च।
पंजाब: ~107-137 प्रति लाख (मालवा क्षेत्र में कीटनाशक/प्रदूषण से)।
हरियाणा: ~103 प्रति लाख।
दिल्ली (NCT): उच्च AAIR (पुरुष 146.7)। 2024 में ~28,387 मामले। 2005-2024 में ~92,000 मौतें, 33% 44 वर्ष से कम उम्र में। मौतें ~7% सालाना बढ़ रही (जनसंख्या वृद्धि से 3 गुना तेज)। ओरल (~2,717 पुरुष), लंग, ब्रेस्ट प्रमुख।
कर्नाटक: ~6.15% बोझ।
गुजरात: ~4.97%।
उत्तराखंड: NFHS-5 में कम रिपोर्टेड (~69 प्रति लाख महिलाओं में), लेकिन स्क्रीनिंग कमी से वास्तविक बोझ अधिक। ब्रेस्ट ~1,859 (2024 अनुमान), लंग और GI कैंसर बढ़ रहे।
पहाड़ी क्षेत्रों में प्लास्टिक बर्निंग, औद्योगिक प्रदूषण से जोखिम।
अन्य: हिमाचल, गोवा उच्च; कम: लक्षद्वीप, अंडमान।
मेट्रो शहरों में दिल्ली सबसे उच्च AAIR (पुरुष 146.7)।
दिल्ली में विशेष स्थिति: युवा मौतों का खतरा
दिल्ली में कैंसर मौतें तेजी से बढ़ रही हैं। 2024 में ~7,400 मौतें। 20 वर्षों में 1.1 लाख मौतें, जिनमें 93,000 अस्पतालों में। युवाओं (44 वर्ष से कम) में 33% मौतें। ओरल और लंग कैंसर में 5%+ वार्षिक वृद्धि। कारण: PM2.5 से लंग कैंसर, तनाव, शहरी जीवनशैली। दिल्ली-NCR में उच्च AAIR मेट्रो में शीर्ष पर।
उत्तराखंड और मेरठ में स्थिति
उत्तराखंड में रिपोर्टेड दर कम लेकिन वास्तविक बोझ बढ़ता है। मेरठ में ब्रेस्ट, ओरल, लंग कैंसर आम। स्थानीय अस्पताल जैसे Valentis (CyberKnife), Subharti Cancer Hospital, KMC Cancer Sansthan में उपचार उपलब्ध। जटिल मामलों के लिए दिल्ली या लखनऊ रेफरल।
दिल्ली में युवाओं पर प्रभाव
20 वर्षों में 1.1 लाख+ मौतें। 2024 में ~7,400 मौतें। कारण: PM2.5, तंबाकू, जीवनशैली।
पर्यावरणीय और अन्य कारण
40-70% रोकथाम योग्य। मुख्य: तंबाकू (27-33%), वायु प्रदूषण (PM2.5 से लंग कैंसर), दूषित पानी (आर्सेनिक से पेट/लिवर), प्लास्टिक जलाना, संक्रमण (HPV), शराब, मोटापा। वैश्विक रिपोर्ट में भी तंबाकू 15%, संक्रमण 10%, शराब 3% प्रमुख।
कैंसर जेनेटिक्स
5-10% हैरेडिटरी। भारत में BRCA1/2 म्यूटेशन 20-30%। NGS टेस्टिंग से रोकथाम संभव।
सिद्ध रोकथाम तकनीकें और आम जनता के लिए अतिरिक्त सावधानियां
ICMR, WHO, NPCDCS गाइडलाइंस से 30-50% कैंसर रोके जा सकते हैं (वैश्विक अनुमान 37-40%)। आम जनता के लिए प्रमुख सावधानियां:
- तंबाकू/धूम्रपान से पूर्ण परहेज: भारत में 33% कैंसर तंबाकू से। सिगरेट, गुटखा, पान, सुपारी छोड़ें। निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी/काउंसलिंग लें। वैश्विक रूप से तंबाकू सबसे बड़ा कारण।
- शराब सीमित या छोड़ें: कोई सुरक्षित स्तर नहीं; ब्रेस्ट, लिवर, ओरल कैंसर बढ़ाता है।
- स्वस्थ वजन बनाए रखें: मोटापा 13+ कैंसर से जुड़ा। BMI 18.5-24.9 रखें।
- नियमित व्यायाम: 150 मिनट मध्यम या 75 मिनट तीव्र प्रति सप्ताह (वॉकिंग, योग)। कोलोरेक्टल, ब्रेस्ट जोखिम कम।
- स्वस्थ आहार: फल-सब्जियां, साबुत अनाज, दालें अधिक; रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड, तला-भुना कम। हल्दी, लहसुन, अदरक, ग्रीन टी लाभदायक।
- संक्रमण से बचाव: HPV वैक्सीन (सर्वाइकल रोकथाम 95-100%), Hep B वैक्सीन (लिवर कैंसर)। H. pylori उपचार। वैश्विक में संक्रमण 10% मामलों का कारण।
- सूर्य की UV से सुरक्षा: सनस्क्रीन (SPF 30+), कपड़े, छाया; त्वचा कैंसर रोकथाम।
- पर्यावरणीय जोखिम कम करें: प्रदूषित हवा/पानी से बचें; मास्क पहनें, स्वच्छ पानी पिएं, प्लास्टिक जलाना बंद करें। WHO ने वायु प्रदूषण को Group 1 कार्सिनोजेन माना।
- तनाव प्रबंधन और नींद: अच्छी नींद (7-8 घंटे), ध्यान/योग से जीवनशैली सुधारें।
- परिवार इतिहास जानें: यदि परिवार में कैंसर, डॉक्टर से जेनेटिक काउंसलिंग लें।
अनिवार्य/अनुशंसित जांचें (NPCDCS/NFHS आधारित)
NPCDCS के तहत 30 वर्ष से ऊपर सभी के लिए पॉपुलेशन-बेस्ड स्क्रीनिंग:
- ओरल कैंसर: सभी (30-65 वर्ष) – ओरल विजुअल एक्जामिनेशन (OVE) हर 5 वर्ष में। यदि संदिग्ध, बायोप्सी।
- ब्रेस्ट कैंसर: महिलाएं (30-65 वर्ष) – क्लिनिकल ब्रेस्ट एक्जामिनेशन (CBE) हर 5 वर्ष में। 40+ में मैमोग्राफी अनुशंसित (उच्च जोखिम में पहले)।
- सर्वाइकल कैंसर: महिलाएं (30-65 वर्ष) – VIA हर 5 वर्ष में। HPV टेस्ट/पैप स्मीयर बेहतर।
- अन्य: उच्च जोखिम में लंग (low-dose CT), कोलोरेक्टल (FIT/colonoscopy)।
NFHS-5 से स्क्रीनिंग बहुत कम (1-2%), इसलिए HWCs में CBAC फॉर्म भरकर जांच करवाएं। आयुष्मान भारत से मुफ्त/सस्ती। उच्च जोखिम वाले हर 1-2 वर्ष जांच करवाएं। वैश्विक में स्क्रीनिंग (HPV टेस्ट, मैमोग्राफी) से मामलों को जल्दी पकड़ा जा सकता है।
उपचार सुविधाएं
- NCG: 287+ सदस्य।
- डे-केयर सेंटर: 439 कार्यरत, 200+ नए 2025-26 में।
- प्रमुख: टाटा मेमोरियल, AIIMS, Apollo Proton
कैंसर रोकथाम में जीवनशैली बदलाव, स्क्रीनिंग और जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है। वैश्विक रिपोर्ट से साबित है कि 37-40% मामले रोके जा सकते हैं। आम जनता इन सावधानियों और जांचों को अपनाकर जोखिम काफी कम कर सकती है। समय पर कार्रवाई से लाखों जीवन बच सकते हैं।
(स्रोत: ICMR-NCRP, Globocan, NFHS-5, NPCDCS गाइडलाइंस, WHO/IARC 2026 रिपोर्ट (Nature Medicine), UICC World Cancer Declaration 2025-2035, PIB, 2025-2026 रिपोर्ट्स)
