औद्योगिक भूमि को आवासीय दिखाकर फर्जी रजिस्ट्रियां, सरकार को करोड़ों का राजस्व नुकसान
जिलाधिकारी सविन बंसल ऋषिकेश स्थित उप-निबंधक कार्यालय में करोड़ों रुपये के भूमि स्टांप घोटाले का खुलासा हुआ है।
जिलाधिकारी सविन बंसल की औचक छापेमारी के बाद सामने आई जांच रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं।
जांच में पाया गया कि औद्योगिक श्रेणी की भूमि को आवासीय दर्शाकर फर्जी रजिस्ट्रियां की गईं, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ।
100 रजिस्ट्रियों की जांच, 55 अवैध या संदिग्ध ( जिलाधिकारी सविन बंसल ऋषिकेश)
डीएम के निर्देश पर उप-निबंधक कार्यालय की पिछली 100 रजिस्ट्रियों की जांच कराई गई,
जिनमें से 55 रजिस्ट्रियां अवैध, अपूर्ण या संदिग्ध पाई गईं।
कई मामलों में बिना स्टांप शुल्क जमा किए, भूमि श्रेणी सत्यापन के बिना और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना सीधे रजिस्ट्रेशन कर दिए गए।
उप-निबंधक के निलंबन और रजिस्ट्रियां रद्द करने की सिफारिश
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने उप-निबंधक के निलंबन
फर्जी तरीके से की गई रजिस्ट्रियों को निरस्त करने की संस्तुति शासन को भेज दी है।
साथ ही बीते पांच वर्षों में हुई सभी रजिस्ट्रियों की व्यापक जांच कराने की मांग की गई है।
माजरी ग्रांट में सुनियोजित खेल
रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम माजरी ग्रांट के जिन खसरा नंबरों को दूनघाटी विशेष विकास क्षेत्र महायोजना-2031 के तहत औद्योगिक उपयोग के लिए चिह्नित किया गया था,
उन्हें सुनियोजित तरीके से आवासीय दर्शाकर छोटे-छोटे प्लॉट्स में बेच दिया गया।
मौके पर लिए गए गूगल भू-कोऑर्डिनेट्स और राजस्व अभिलेखों में दर्ज मूल कोऑर्डिनेट्स की तुलना में भारी अंतर पाया गया, जिससे फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई।
कार्यालय में बाहरी व्यक्ति की भूमिका, सबूत मिटाने के आरोप ( जिलाधिकारी सविन बंसल )
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि उप-निबंधक कार्यालय के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर
एक बाहरी व्यक्ति (जितिन पंवार) सरकारी कार्य करता पाया गया।
इसके अलावा, पुराने दस्तावेज कूड़े में फेंककर कार्यालय की ‘सफाई’ दिखाने का प्रयास किया गया, जिसे जांच टीम ने सबूत मिटाने की कोशिश बताया।
फाइलें महीनों से लंबित थीं, तीन दिनों से अधिक समय से लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की .
घोर लापरवाही और नियोजित भ्रष्टाचार के प्रमाण
जांच रिपोर्ट में उप-निबंधक कार्यालय में घोर लापरवाही, भ्रष्टाचार और नियोजित मिलीभगत
के ठोस प्रमाण मिलने की बात कही गई है।
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, संदिग्ध रजिस्ट्रियों के निरस्तीकरण और
आर्थिक अपराध की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने तक की सिफारिश की गई है।
