उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में रानीबाग में बंद पड़ी एचएमटी फैक्ट्री की 45 एकड़ जमीन को आईटी हब में बदलने की घोषणा की है।
यह कदम कुमाऊं क्षेत्र समेत पूरे राज्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है,
जहां आईटी सेक्टर की कंपनियां स्थापित होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
हालांकि, इस परियोजना की पृष्ठभूमि में भूमि के इतिहास, पहले की प्रस्तावित योजनाओं और राज्य में आईटी हबों की मौजूदा स्थिति के साथ-साथ भ्रष्टाचार के मुद्दों पर भी ध्यान देना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकती है, लेकिन पारदर्शिता और क्रियान्वयन में चुनौतियां बरकरार हैं।
रानीबाग एचएमटी भूमि का इतिहास और वर्तमान स्थिति
रानीबाग एचएमटी (नैनीताल जिला) में एचएमटी (हिंदुस्तान मशीन टूल्स) फैक्ट्री की स्थापना 1985 में हुई थी।
यह फैक्ट्री घड़ियां बनाने के लिए जानी जाती थी और इसका कुल क्षेत्रफल 91 एकड़ था। 1990 के दशक में यह फैक्ट्री क्वार्ट्ज एनालॉग और हैंड-वाउंड घड़ियां बनाती थी, लेकिन धीरे-धीरे घाटे में चलने लगी। 2016 में फैक्ट्री का संचालन पूरी तरह बंद हो गया, जिसके बाद पूरा इलाका खंडहर में तब्दील हो गया। कर्मचारियों की संख्या घटती गई और अब फैक्ट्री कॉलोनी में केवल एक परिवार ही रहता है।
2011 में उत्तराखंड सरकार ने फैक्ट्री को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई थी, लेकिन यह सफल नहीं हुई।
2020 में राज्य कैबिनेट ने शेष भूमि खरीदने का फैसला किया।
अंततः 2022 में केंद्र सरकार ने 45.33 एकड़ भूमि को 72 करोड़ रुपये की रिजर्व कीमत पर उत्तराखंड सरकार को सौंप दिया।
मुख्यमंत्री धामी ने 2022 में ही इस भूमि पर सिडकुल (स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड) स्थापित करने की बात कही थी।
अब 2026 में आईटी हब की घोषणा के साथ यह भूमि फिर से चर्चा में है।
वर्तमान में राज्य सरकार ने विकास की तैयारी शुरू कर दी है,
लेकिन अभी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। सीएम धामी ने कहा है.
कि आईटी हब बनने से क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
रानीबाग एचएमटी पहले की प्रस्तावित परियोजनाएं और संभावनाएं
एचएमटी भूमि के बंद होने के बाद कई परियोजनाओं की चर्चा हुई, लेकिन कोई भी धरातल पर नहीं उतर सकी। इनमें शामिल हैं:
- मिनी सिडकुल: 2016 के बाद भूमि को छोटे स्तर के औद्योगिक पार्क में बदलने की योजना थी,
- जो स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देता।
- एम्स (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज): स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अस्पताल बनाने का प्रस्ताव था, जो कुमाऊं क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होता।
- हथियार फैक्ट्री: रक्षा क्षेत्र में विकास के लिए आर्म्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की संभावना जताई गई थी।
- पीएम आवास योजना के तहत ग्रुप हाउसिंग: गरीबों के लिए आवासीय परिसर बनाने की बात चली, जो आवास समस्या को हल कर सकती थी।
- पुनरुद्धार प्रयास: 2011 में राज्य सरकार ने फैक्ट्री को दोबारा चालू करने की कोशिश की, लेकिन केंद्र स्तर पर मंजूरी नहीं मिली।
इन प्रस्तावों की असफलता के पीछे कारणों में प्रशासनिक देरी, फंड की कमी और केंद्र-राज्य समन्वय की कमी बताई जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी हब की संभावना मजबूत है क्योंकि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और ठंडा मौसम आईटी कंपनियों को आकर्षित कर सकता है। हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सड़क, बिजली और इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार की जरूरत है। यदि सफल हुआ, तो यह परियोजना 75,000 से अधिक नौकरियां पैदा कर सकती है, जैसा कि राज्य की अन्य औद्योगिक योजनाओं में देखा गया है।
राज्य में अन्य आईटी हबों की स्थिति
उत्तराखंड को ‘डिजिटल देवभूमि’ बनाने की दिशा में कई आईटी हब विकसित हो रहे हैं। 2016-2025 की सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी नीति के तहत राज्य सरकार ने आईटी पार्कों को बढ़ावा दिया है। प्रमुख आईटी हबों की मौजूदा स्थिति इस प्रकार है:
- देहरादून आईटी पार्क: राज्य की राजधानी में स्थित यह सबसे बड़ा आईटी हब है, जहां सॉफ्टवेयर कंपनियां, स्टार्टअप और बीपीओ ऑपरेट कर रही हैं। हाल ही में यहां स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड हुआ है, लेकिन स्पेस की कमी एक चुनौती है। 2025 में यहां एआई-आधारित इनोवेशन हब बनाने की योजना है।
- हरिद्वार और पंतनगर ग्रोथ सेंटर: सिडकुल द्वारा संचालित ये क्षेत्र आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस कर रहे हैं। रुद्रपुर को राज्य का सबसे तेजी से बढ़ता शहर माना जा रहा है, जहां ऑटोमोबाइल और आईटी सेक्टर मिलकर काम कर रहे हैं। 2025 में यहां नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित हुए हैं, जो युवाओं को स्किल ट्रेनिंग दे रहे हैं।
- काशीपुर और सहसपुर आईटीआई हब: विश्व बैंक की मदद से यहां पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में सेंटर बनाए गए हैं। ये हब आईटी स्किल्स पर फोकस कर रहा है और 2026 तक विस्तार की योजना है।
- सामान्य विकास: राज्य में एमएसएमई की संख्या 80,000 से अधिक हो गई है, जिसमें आईटी सेक्टर का योगदान बढ़ रहा है। विजन 2030 के तहत हॉर्टिकल्चर प्रोसेसिंग को 15% तक बढ़ाने की योजना है, जिसमें आईटी टूल्स का इस्तेमाल होगा। हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की कमी से विकास धीमा है। सरकार ने 30 नई नीतियां लाई हैं, जिनसे निवेश बढ़ा है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में तकनीकी पहुंच अभी सीमित है।
आईटी हबों में भ्रष्टाचार के मुद्दे
उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं पर भ्रष्टाचार की छाया हमेशा रही है। 2024 में राज्य की आईटी सिस्टम पर साइबर अटैक हुआ, जिसमें 186 से अधिक सरकारी वेबसाइटें 72 घंटे तक डाउन रहीं, जिससे डेटा सुरक्षा पर सवाल उठे।
कैग (कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) की 2021-22 की रिपोर्ट में वन और स्वास्थ्य विभागों में अनियमितताएं पाई गईं,
जहां कैम्पा फंड्स (कंपेंसेटरी एफोरेस्टेशन फंड) का दुरुपयोग हुआ। 13.86 करोड़ रुपये आईफोन, लैपटॉप और ऑफिस सामान खरीदने में खर्च किए गए, जो वन संरक्षण से असंबंधित थे। विपक्षी कांग्रेस ने बागवानी और सिंचाई विभागों में घोटालों का आरोप लगाया है, जहां 70 करोड़ रुपये के फर्जी पौधारोपण का मामला सामने आया।
2017 में ऊधम सिंह नगर जिले में भूमि घोटाले उजागर हुए, जहां आईटी से जुड़े इलाकों में गांवों में अनियमितताएं पाई गईं।
हाल ही में आईटी पार्क देहरादून की भूमि आवंटन में जीटीएम को फायदा पहुंचाने के आरोप लगे।
मुख्यमंत्री धामी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाया है, जिसमें 150 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया,
लेकिन विपक्ष का कहना है कि ‘जंगल राज’ चल रहा है और बिना ‘सुविधा शुल्क’ के काम नहीं होते।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी हबों में पारदर्शी आवंटन और मॉनिटरिंग जरूरी है, अन्यथा ये परियोजनाएं भी विवादों में फंस सकती हैं।
हालांकि लोग हल्द्वानी में नया बस अड्डा, कैंसर अस्पताल, सुशीला तिवारी अस्पताल की खराब स्थिति अन्य निर्माण कार्य और हल्द्वानी के अंदर विश्व खेल विश्वविद्यालय का भी कार्य अबतक पूर्ण नहीं होने पर ही सवाल उठा रहे हैं।
