15 जनवरी 2026 को बेरीनाग क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया। भतीजे के जनेऊ (उपनयन संस्कार) कार्यक्रम से लौट रहीं दो विधवा महिलाएं — हीरा देवी (44 वर्ष, पत्नी स्व. नरेंद्र सिंह) और उमा देवी (45 वर्ष, पत्नी स्व. पूरन सिंह) — जो आपस में देवरानी-जेठानी थीं, इस हादसे में अपनी जान गंवा बैठीं।
दोनों महिलाएं कोटेश्वर मंदिर के पास स्थित राईआगर गई थीं और कार्यक्रम के बाद अपने गांव लौट रही थीं। गांव के लिए वाहन न मिलने पर उन्होंने एक टैक्सी कार (UK 05 TA 5128) बुक की।
करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद चाख स्थान के पास वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में दोनों महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वाहन चालक गोकुल कुमार आगरी (28 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है
⚠️ उत्तराखंड की पहाड़ी सड़कों की खतरनाक हकीकत
यह हादसा कोई पहली घटना नहीं है। उत्तराखंड की पहाड़ी सड़कों की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। संकरी और घुमावदार सड़कें, जगह-जगह गड्ढे, भूस्खलन की आशंका और बिना क्रैश बैरियर के तीखे मोड़ हादसों को न्योता दे रहे हैं।
बारिश के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब कई सड़कें पूरी तरह बंद हो जाती हैं या जानलेवा बन जाती हैं।
🚨 हादसे नहीं रुक रहे, प्रशासन पर उठे सवाल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में हर साल 1,600 से अधिक सड़क हादसे होते हैं, जिनमें लगभग 1,000 लोगों की मौत होती है। पहाड़ी जिलों में मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।
हादसों के प्रमुख कारण:
🏛️ घोषणाएं बहुत, जमीनी कार्रवाई नदारद
राज्य सरकार द्वारा स्टेट रोड सेफ्टी पॉलिसी 2025 लागू किए जाने और 2026 तक सुरक्षित सड़क नेटवर्क के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा है। नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, लेकिन कार्रवाई अधिकतर जांच और सांत्वना तक सीमित रहती है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय-समय पर मांगी गई रिपोर्टों के बावजूद, पहाड़ी सड़कों पर सुरक्षा उपायों की रफ्तार बेहद धीमी है।
✍️ निष्कर्ष
बेरीनाग की यह दुखद घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक उत्तराखंड के लोग बदहाल सड़कों और प्रशासनिक लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे।
सरकार को अब केवल वादों नहीं, बल्कि क्रैश बैरियर, ब्लैक स्पॉट सुधार, सख्त नियम पालन और जवाबदेही तय करने जैसे ठोस कदम उठाने होंगे। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसी त्रासदियां यूं ही दोहराती रहेंगी।
