
तेहरान/यरुशलम/वाशिंगटन, 25 मार्च 2026 – अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए युद्ध (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी) अब अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई इस जंग ने मध्य पूर्व की स्थिरता को पूरी तरह हिला दिया है। अब तक हजारों लक्ष्यों पर हमले हो चुके हैं, ईरान की नौसेना लगभग नष्ट हो चुकी है, सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत दर्जनों शीर्ष अधिकारी मारे गए हैं, और ईरान ने जवाबी हमलों से इज़राइल और खाड़ी देशों को निशाना बनाया है। युद्ध का कोई स्पष्ट अंत नजर नहीं आ रहा, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बातचीत की बात कर रहे हैं, लेकिन ईरान इसे ‘मनोवैज्ञानिक युद्ध’ बता रहा है।
यह रिपोर्ट युद्ध की विस्तृत स्थिति, सैन्य घटनाक्रम, हताहत, आर्थिक प्रभाव, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं और भविष्य की संभावनाओं पर आधारित है।
युद्ध की पृष्ठभूमि और शुरुआत
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर आश्चर्यजनक हवाई हमले शुरू किए। राष्ट्रपति ट्रंप ने एयर फोर्स वन से ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की घोषणा की। हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना, मिसाइल क्षमता नष्ट करना और ‘रेजीम चेंज’ लाना बताया गया। पहले ही दिन सुप्रीम लीडर अली खामेनेई, पूर्व राष्ट्रपति और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी समेत कई उच्च अधिकारी मारे गए।
इज़राइल ने ‘डिकैपिटेशन स्ट्राइक्स’ (नेतृत्व हटाने वाले हमले) किए, जबकि अमेरिका ने B-1 बॉम्बर्स, एयरक्राफ्ट कैरियर्स और मिसाइलों से हमले तेज किए। ईरान ने इसे ‘आक्रामकता’ बताया और तुरंत जवाबी हमले शुरू कर दिए। 12 मार्च तक पर्सियन गल्फ में 16 जहाजों पर हमले की रिपोर्ट आई। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने की घोषणा की, जिससे वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू गईं।
नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोहम्मद खामेनेई (मोजतबा खामेनेई) का चुनाव हुआ, जिन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए बंद रहेगा। युद्ध अब ‘पूर्ण पैमाने’ का हो गया है – हवाई हमले, मिसाइल बैराज, ड्रोन हमले और क्षेत्रीय प्रॉक्सी (हिजबुल्लाह, हूती) शामिल।
सैन्य घटनाक्रम: अमेरिका-इज़राइल के हमले
अमेरिका-इज़राइल की संयुक्त सेना ने अब तक 7,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए हैं। IDF ने 3,000+ हमलों की पुष्टि की है, जिसमें IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स), बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स, एयर डिफेंस सिस्टम और आंतरिक सुरक्षा ठिकाने शामिल हैं।
- ऊर्जा ढांचे पर हमले: 19 मार्च को साउथ पार्स गैस फील्ड (दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस क्षेत्र) और असलुयेह प्रोसेसिंग हब पर हमले। ईरान की गैस प्रोसेसिंग क्षमता 20% घट गई, बिजली उत्पादन बुरी तरह प्रभावित। ट्रंप ने बाद में इज़राइल को ऊर्जा साइट्स पर हमले रोकने का आदेश दिया, लेकिन हमले जारी रहे।
- नौसेना पर विनाश: पेंटागन के अनुसार ईरान की नौसेना ‘खत्म’ हो चुकी है। 120+ जहाज नष्ट, कैस्पियन सागर और पर्सियन गल्फ में हमले। IRGC नेवी के 26वें सलमान मिसाइल ग्रुप समेत कई ठिकाने तबाह।
- आंतरिक सुरक्षा पर हमले: IRGC, बसिज और लॉ एनफोर्समेंट कमांड (LEC) के ठिकानों पर ‘डिकैपिटेशन स्ट्राइक्स’। खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब समेत कई कमांडर मारे गए। इससे ईरान की आंतरिक दमन व्यवस्था में भ्रम और डर फैल गया – कई अधिकारी अंडरग्राउंड या अस्थायी ठिकानों पर शिफ्ट हो गए।
- मिसाइल और एयर डिफेंस: शाहरूद मिसाइल फैसिलिटी, खोरगू मिसाइल बेस (बंदर अब्बास) और बोराजजान के पास कई साइट्स नष्ट। इससे ईरान की जवाबी हमले की क्षमता कम हुई।
- नई लहर: 23-24 मार्च को तेहरान के एंडरजगु जिले समेत कई इलाकों में ‘व्यापक हमले’। सिविल डिफेंस टीमें मलबे में लाशें निकाल रही हैं।
अमेरिका ने 40% एयरक्राफ्ट कैरियर्स, 26% अर्ले बर्क डिस्ट्रॉयर्स और आधे B-1 बॉम्बर्स को इस अभियान में तैनात किया है। इज़राइल ने साइप्रस और अन्य क्षेत्रों से समर्थन लिया।
ईरान की जवाबी कार्रवाई
ईरान ने ‘प्रतिरोध’ दिखाते हुए इज़राइल पर कई मिसाइल बैराज लॉन्च किए।
- इज़राइल पर हमले: तेल अवीव के सेंट्रल इलाके में 100 किलो ग्राम मिसाइल से इमारतें क्षतिग्रस्त, गाड़ियां तबाह। हैफा तेल रिफाइनरी (इज़राइल की आधी ईंधन आपूर्ति) प्रभावित। क्लस्टर म्यूनिशन का उपयोग रिपोर्ट।
- खाड़ी देशों पर हमले: सऊदी, UAE, कतर और अन्य पर मिसाइल हमले। होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग बाधित।
- हिजबुल्लाह और हूती: लेबनान और यमन से रॉकेट और ड्रोन हमले। हूती के हथियारों का स्टॉक कम हो रहा, लेकिन ड्रोन अभी उपलब्ध।
- अन्य: साइप्रस के अक्रोटिरी और ढेकेलिया पर ड्रोन हमले, जिससे यूरोपीय देशों ने सैन्य तैनाती बढ़ाई।
ईरान ने कहा कि अगर उसके पावर प्लांट्स पर हमला हुआ तो पूरे क्षेत्र के पानी और बिजली सिस्टम नष्ट कर देगा।
हताहत और मानवीय संकट
- ईरान: स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 1,500+ मौतें (सरकारी आंकड़े)। स्वतंत्र संगठनों (HRANA) के अनुसार 3,000+। 19,000+ घायल। तेहरान, इस्फहान, बंदर अब्बास समेत कई शहर प्रभावित।
- इज़राइल: मिसाइल हमलों से दर्जनों मौतें, सैकड़ों घायल। लाखों इज़राइली शेल्टर में।
- क्षेत्रीय: जॉर्डन (19 घायल), अजरबैजान (4 घायल)। कुल मौतें 2,500+।
- मानवीय संकट: बिजली कटौती, पानी की कमी, अस्पतालों पर दबाव। लाखों लोग विस्थापित। बच्चों की मौत ~350।
आर्थिक और वैश्विक प्रभाव
- तेल संकट: होर्मुज स्ट्रेट बंदी से तेल कीमतें 20-30% बढ़ीं। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर।
- इज़राइल की अर्थव्यवस्था: हथियार निर्माता एलबिट सिस्टम्स की शेयरों में उछाल, लेकिन युद्ध से कुल नुकसान।
- वैश्विक: स्टॉक मार्केट गिरावट, खाद्य आपूर्ति प्रभावित। अमेरिका पर सैन्य संसाधनों का दबाव (चीन के खिलाफ तैयारियों पर असर)।
अन्य राष्ट्रों की प्रतिक्रियाएं
वैश्विक रुख विभाजित है:
- संयुक्त राष्ट्र: महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ‘सैन्य वृद्धि’ की निंदा की, तत्काल युद्धविराम की अपील। सुरक्षा परिषद में आपात बैठक।
- रूस: विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हमलों को ‘अनुचित आक्रामकता’ बताया, क्षेत्र को ‘आपदा’ की ओर धकेलने का आरोप।
- चीन: ‘ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन’ बताया, युद्धविराम की मांग।
- यूरोपीय संघ: ‘अधिकतम संयम’ की अपील। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ‘चिंताजनक’ बताया।
- फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन: ईरान के हमलों की निंदा, लेकिन अमेरिका-इज़राइल पर चुप्पी।
- स्पेन: प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने ‘एकतरफा हमलों’ की निंदा।
- तुर्की: राष्ट्रपति एर्दोगन ने दोनों पक्षों की निंदा, कूटनीतिक मध्यस्थता की पेशकश।
- खाड़ी देश (सऊदी, UAE, कतर): ईरान के हमलों की कड़ी निंदा।
- कनाडा, ऑस्ट्रेलिया: अमेरिका का समर्थन।
- भारत: क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीति पर जोर (विस्तृत बयान नहीं)।
ट्रंप ने 15-पॉइंट प्लान का प्रस्ताव दिया, जिसमें अस्थायी युद्धविराम शामिल, लेकिन ईरान ने इसे ‘मनोवैज्ञानिक युद्ध’ बताया। पाकिस्तान बातचीत की मेजबानी के लिए तैयार।
राजनीतिक और भविष्य की संभावनाएं
ईरान में नया सुप्रीम लीडर मोहम्मद खामेनेई ने ‘प्रतिरोध’ का वादा किया। अमेरिका में ट्रंप ‘रेजीम चेंज’ का दावा कर रहे हैं, लेकिन हमले जारी। इज़राइल ‘ग्राउंड ऑपरेशन’ की तैयारी में।
विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध लंबा खिंच सकता है। हथियारों की कमी, आर्थिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय दबाव से युद्धविराम संभव, लेकिन ‘पूर्ण जीत’ मुश्किल। वैश्विक अर्थव्यवस्था, मानवीय संकट और परमाणु खतरा बड़े मुद्दे।
यह युद्ध मध्य पूर्व की सबसे बड़ी चुनौती है। हजारों मौतें, आर्थिक नुकसान और क्षेत्रीय अस्थिरता ने दुनिया को चिंतित कर दिया है। कूटनीति ही एकमात्र रास्ता लग रहा है, लेकिन दोनों पक्ष ‘जीत’ की बात कर रहे हैं।