Thu. Jan 22nd, 2026

ग्रीनलैंड पर ट्रंप का दावा, यूरोप को टैरिफ की चेतावनी

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड (जो डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है) को हासिल करने की मांग दोहराकर यूरोप में बड़ा राजनीतिक तनाव पैदा कर दिया है।

इसके साथ ही ट्रंप ने विरोध करने वाले 8 यूरोपीय देशों—जो NATO के सहयोगी भी हैं—पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है।


मैक्रों और यूरोपीय नेताओं के प्राइवेट मैसेज लीक

इस विवाद को और हवा तब मिली जब ट्रंप ने दावा किया कि
इमैनुएल मैक्रों समेत कई यूरोपीय नेताओं के प्राइवेट मैसेज सार्वजनिक हो गए हैं।

ट्रंप के मुताबिक, इन संदेशों में ग्रीनलैंड मुद्दे पर उनके खिलाफ यूरोपीय समन्वय दिखाई देता है।


फ्रांस की तीखी प्रतिक्रिया: “यह बुलीइंग है”

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप के रुख को
“राजनीतिक बुलीइंग” करार देते हुए कहा—

“दुनिया अब नियमों के बिना चलने की ओर बढ़ रही है, और यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।”


डेनमार्क की जवाबी तैयारी: ग्रीनलैंड में सैन्य बढ़ोतरी

बढ़ते तनाव के बीच डेनमार्क ने
ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का फैसला किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है।


डावोस से पहले क्यों अहम है यह विवाद?

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब
World Economic Forum (डावोस) की वार्षिक बैठक से पहले ही—

  • अमेरिका-यूरोप संबंधों में तनाव
  • वैश्विक व्यापार पर अनिश्चितता
  • NATO सहयोगियों के बीच भरोसे की परीक्षा

जैसे मुद्दे गहराते जा रहे हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्रीनलैंड, टैरिफ और मैसेज लीक विवाद डावोस में वैश्विक नेताओं की चर्चा का बड़ा विषय बनने वाला है।


क्यों रणनीतिक रूप से अहम है ग्रीनलैंड?

  • आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य और भू-राजनीतिक महत्व
  • दुर्लभ खनिज और संसाधन
  • अमेरिका-चीन-रूस की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा

यही कारण है कि ट्रंप का ग्रीनलैंड पर जोर केवल जमीन का नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का मामला बन गया है।

By PAL

News and public affairs

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *