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उत्तराखंड में सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए नया SOP: जनता के बीच सवाल – “एकतरफा कवच, आम आदमी की पहुंच पर पाबंदी?”

CM Dhami

देहरादून (25 फरवरी 2026): हाल ही में देहरादून के प्राथमिक शिक्षा निदेशालय में हुई हिंसक घटना के बाद उत्तराखंड सरकार ने सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और अन्य संस्थानों में अधिकारियों, कर्मचारियों तथा शिक्षकों की सुरक्षा के लिए नया SOP (Standard Operating Procedure) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सचिव को फोन कर यह आदेश दिया, साथ ही DGP को सरकारी भवनों में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और ऐसी घटनाओं पर त्वरित कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए।

घटना का संक्षिप्त विवरण

21 फरवरी 2026 को देहरादून में प्राथमिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर हमला हुआ। रायपुर BJP विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’ के कथित समर्थकों ने स्कूल नाम बदलने के विवाद में हंगामा किया, निदेशक घायल हुए (सिर-चेहरे पर चोटें, टांके लगे), कार्यालय में तोड़फोड़ हुई। कर्मचारी संगठनों ने विरोध जताया और विधायक की गिरफ्तारी की मांग की। 23 फरवरी को अधिकारी-कर्मचारी-शिक्षक मोर्चा के प्रतिनिधियों से मिलने के बाद CM धामी ने SOP बनाने के निर्देश जारी किए।

SOP के प्रमुख प्रावधान (सरकारी निर्देशों और रिपोर्ट्स के आधार पर)

  • सरकारी दफ्तरों में प्रवेश सख्त – बिना रजिस्ट्रेशन, आईडी या पूर्व अनुमति के कोई नहीं घुसेगा।
  • हर कार्यालय में सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा गार्ड, मेटल डिटेक्टर और एंट्री-एग्जिट कंट्रोल सिस्टम को मजबूत करना।
  • पैनिक बटन और आपात स्थिति में तुरंत पुलिस/सुरक्षा बल बुलाने की स्पष्ट प्रक्रिया।
  • कर्मचारियों को उग्र भीड़ या हिंसक व्यवहार से निपटने की ट्रेनिंग।
  • सरकारी भवनों के आसपास बेहतर लाइटिंग, फेंसिंग और खतरे की स्थिति में अलर्ट सिस्टम।
  • यह SOP सभी विभागों (शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व आदि) पर लागू होगा और जल्द अंतिम रूप लेकर जारी किया जाएगा।

जनता में बढ़ती आलोचना और प्रमुख सवाल

यह SOP अधिकारियों की सुरक्षा पर फोकस कर रहा है, लेकिन जनता के बीच इसे एकतरफा माना जा रहा है। लोग तर्क दे रहे हैं:

  • अधिकारी जनता की सेवा के लिए हैं, लेकिन SOP से जनता को संदिग्ध मानकर दफ्तरों से दूर रखा जा रहा है – रिश्वत, काम में देरी, बदतमीजी जैसी पुरानी शिकायतें पहले से हैं, अब एंट्री और भी मुश्किल हो जाएगी।
  • अधिकारी पहले से सशक्त हैं – अब राजा जैसी व्यक्तिगत सुरक्षा? लेकिन जवाबदेही (accountability) पर कोई प्रावधान नहीं – भ्रष्टाचार, लापरवाही या फाइल फंसाने पर सजा का जिक्र क्यों नहीं?
  • साधारण समाधान पर्याप्त हो सकते थे – अवैध हथियार/चीजों पर सख्त रोक, हर दफ्तर में सीसीटीवी और रिकॉर्डिंग, पारदर्शी ऑनलाइन शिकायत सिस्टम, जन सुनवाई के लिए अलग काउंटर – ये क्यों नहीं अपनाए गए?
  • जनता को अपराधी क्यों बनाया जा रहा? – एक आम नागरिक की टिप्पणी: “हम टैक्स देते हैं, काम मांगते हैं। लेकिन अब दफ्तर में घुसना भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। अधिकारी गलती करें तो सुरक्षा, जनता पर अन्याय हो तो क्या?”

विपक्षी दल और सामाजिक कार्यकर्ता इसे “सत्ता पक्ष की ढाल” बता रहे हैं, खासकर घटना BJP विधायक से जुड़ी होने के कारण। कर्मचारी संगठनों ने SOP का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही जनता की शिकायतों के लिए अलग व्यवस्था की मांग की है।

सरकार का पक्ष: CM धामी का कहना है कि यह कदम कर्मचारियों को बिना डर के काम करने का माहौल देगा। लेकिन अगर SOP में जनता की पहुंच और अधिकारियों की पारदर्शिता/जवाबदेही को शामिल नहीं किया गया, तो विवाद और बढ़ सकता है।

By The Common Man

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