डॉ. महेंद्र सिंह पाल की कत्युरी पाल वंश का इतिहास पुस्तक से कुमाऊं के इतिहास प्रेमियों में उत्साह
उत्तराखंड के वरिष्ठ राजनेता, सुप्रसिद्ध अधिवक्ता, पूर्व सांसद और प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. महेंद्र सिंह पाल (Dr. M.S. Pal) द्वारा लिखित पुस्तक कत्युरी पाल वंश का इतिहास ने कुमाऊं क्षेत्र के इतिहास प्रेमियों, पाल/कत्युरी वंशजों और स्थानीय समुदायों के बीच खासा उत्साह पैदा किया है।
कत्युरी राजवंश और उससे जुड़े पाल वंश की वंशावली, ऐतिहासिक घटनाओं और सांस्कृतिक योगदान पर गहन शोध आधारित प्रकाश डालती है।
कुमाऊं के कत्युरी पाल वंश का विरासत पर गहन शोध का दस्तावेज
डॉ. महेंद्र सिंह पाल मूल रूप से पिथौरागढ़ जिले के असकोट से ताल्लुक रखते हैं और वे अस्कोट के पूर्व राजघराने के वंशज हैं।
आज भी असकोट में उनका पैतृक आवास और संपत्ति मौजूद है,
जहां वे नियमित रूप से जाते हैं और स्थानीय परंपराओं, संस्कृति तथा समुदाय से जुड़े रहते हैं।
उनकी यही गहरी जड़ें पुस्तक में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं
, जहां पाल वंश की वंशावली और कत्युरी राजवंश से संबंध को विस्तार से समझाया गया है।
डॉ. पाल नैनीताल हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं
वे नैनीताल लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुके हैं। इसके अलावा वे बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के कई बार अध्यक्ष,
हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व प्रमुख, उत्तराखंड हाई कोर्ट के पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल और हल्द्वानी सोल्जर बोर्ड के लीगल एडवाइजर भी रहे हैं।
एक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में डॉ. पाल अपनी सादगीपूर्ण जीवनशैली, जमीनी स्तर की मेहनत.
सांसद रहते हुए भी टाटा नैनो जैसी साधारण कार का उपयोग करना उनकी सादगी का उदाहरण माना जाता है। वे गरीबों, सैनिकों और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए लगातार कार्यरत हैं
आम लोगों से गहरे जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं। (कत्युरी पाल वंश का इतिहास)
और देव शमशेर सिंह वेलफेयर कमिटी के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के कई कार्य कर रहे हैं।
उनकी पत्नी लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) मीना सिंह पाल भी एक जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद वे जरूरतमंद बच्चों के लिए एक शैक्षणिक स्कूल चला रही हैं,
जहां गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को मुफ्त या कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाती है।
डॉ. महेंद्र सिंह पाल की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:
- कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका
- उत्तराखंड हाई कोर्ट को नैनीताल में ही बनाए रखने के लिए निर्णायक योगदान
- आईआईएम काशीपुर की स्थापना के प्रयासों में सहयोग
- हल्द्वानी, उधम सिंह नगर और कुमाऊं के अन्य क्षेत्रों में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन
- उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में सक्रिय भागीदारी
पुस्तक में कत्युरी राजवंश की स्थापना वासुदेव कत्युरी से लेकर उसके पतन तक का विस्तृत विवरण दिया गया है।
कत्युरी साम्राज्य की राजधानी कार्तिकेयपुर (वर्तमान बैजनाथ) रही, जहां बैजनाथ मंदिर और जागेश्वर धाम जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल स्थापित हुए।
पुस्तक का मुख्य फोकस पाल वंश और कत्युरी राजवंश के आपसी संबंधों पर है।
डॉ. पाल ने शिलालेखों, ऐतिहासिक अभिलेखों, लोककथाओं और वंशावलियों के आधार पर इन संबंधों को स्पष्ट किया है।
डॉ. पाल का कहना है,
“कत्युरी-पाल वंश उत्तराखंड की गौरवशाली विरासत है। इसे संरक्षित करना हमारी जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रह सकें।”
यह पुस्तक लोकल/सेल्फ-पब्लिश्ड है और इसे नैनीताल-हल्द्वानी के बार एसोसिएशन, स्थानीय बुक स्टोर्स या सीधे डॉ. पाल से संपर्क करके प्राप्त किया जा सकता है।
संपर्क: 9412086844
पता: M.P. Niwas, Upper Mall Road, Tallital, Nainital
इतिहासकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुमाऊं समुदाय द्वारा इस पुस्तक को उत्तराखंड के इतिहास पर एक महत्वपूर्ण और मूल्यवान योगदान माना जा रहा है।
