
देहरादून, 6 मार्च 2026 – देहरादून के जिलाधिकारी (डीएम) श्री सविन बंसल एक ऐसे प्रशासक के रूप में उभर रहे हैं, जिनकी संवेदनशीलता और दृढ़ इच्छाशक्ति ने हजारों दिलों को छू लिया है। उनके नेतृत्व में शुरू की गई एक अनूठी पहल के तहत अब तक 174 से अधिक बच्चों को सड़कों की भिक्षावृत्ति और बालश्रम से मुक्त कराया गया है। ये बच्चे आज आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर में सुरक्षित हैं, जहां उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, काउंसलिंग और खेल-कूद जैसी गतिविधियों के माध्यम से नया जीवन मिल रहा है। यह पहल न केवल बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लौटा रही है, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।### बच्चों के सपनों को पंख लगाने वाली पहलडीएम सविन बंसल ने इस केंद्र की स्थापना और संचालन में व्यक्तिगत रुचि ली है। यहां रेस्क्यू अभियानों के जरिए सड़कों पर भटकते बच्चों को लाया जाता है, फिर उन्हें ब्रिज कोर्स, नियमित स्कूली शिक्षा और व्यक्तिगत विकास के लिए योग, संगीत, खेल और रचनात्मक कार्यक्रमों से जोड़ा जाता है। परिणामस्वरूप, ये बच्चे मुख्यधारा की शिक्षा में शामिल हो रहे हैं। एक दिल छू लेने वाली मिसाल है हारिश की – मई 2025 में बिना किसी पूर्व शिक्षा के सेंटर से जुड़े हारिश अगस्त 2025 तक साधुराम इंटर कॉलेज में कक्षा 6 में दाखिल हो चुके थे। आज वे स्कूल की खेल गतिविधियों में सक्रिय हैं और मैराथन, स्पोर्ट्स कॉम्पिटिशन में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं।हाल ही में होली के अवसर पर इन बच्चों ने रंगों से होली खेली, हंसी-खुशी से त्योहार मनाया – जो कभी सड़कों पर भटकते थे, आज उनके चेहरों पर आत्मविश्वास और खुशी साफ झलक रही है। डीएम सविन बंसल ने खुद कहा है, “हर बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और शिक्षित जीवन का अधिकार है। प्रशासन का उद्देश्य केवल बच्चों को बचाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी नागरिक बनाना है।” उनकी यह सोच और कार्यशैली वाकई प्रशंसनीय है।### डीएम सविन बंसल: एक प्रेरणादायक प्रशासकश्री सविन बंसल न केवल बच्चों के कल्याण पर फोकस कर रहे हैं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सक्रियता से देहरादून को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने मेधावी लेकिन विपरीत परिस्थितियों में फंसी लड़कियों की शिक्षा को पुनर्जीवित करने के लिए ‘नंदा-सुनंदा’ प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसके तहत कई गरीब और अनाथ लड़कियों को आर्थिक सहायता और शिक्षा का अवसर मिला। आपदा प्रभावित गांवों में 12 किमी पैदल चलकर राहत पहुंचाने, अस्पतालों में सुधार लाने, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाने, जल स्रोतों के संरक्षण और यूसीसी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में प्रभावी क्रियान्वयन जैसे कई कदमों से उन्होंने साबित किया है कि एक अच्छा प्रशासक कैसे जनता के साथ सीधा जुड़ सकता है।उनकी ईमानदारी, संवेदनशीलता और जन-केंद्रित दृष्टिकोण ने उन्हें एक आदर्श आईएएस अधिकारी बनाया है। देहरादून के लोगों के लिए वे सिर्फ अधिकारी नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद साथी और प्रेरणा स्रोत हैं। कई लोग उन्हें “आखिरी व्यक्ति की आवाज सुनने वाला” कहते हैं, क्योंकि उनका दिल हमेशा कमजोर और वंचित वर्गों के लिए धड़कता है।### समाज के लिए संदेशडीएम सविन बंसल के प्रयासों से साफ दिखता है कि अगर इच्छाशक्ति और सही दिशा हो, तो बड़े बदलाव संभव हैं। उनकी यह पहल अन्य जिलों और अधिकारियों के लिए मिसाल है – कि प्रशासन सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि लोगों की जिंदगी बदलने का माध्यम बनना चाहिए। देहरादून में ऐसे डीएम का होना गर्व की बात है, जो न केवल काम करते हैं, बल्कि दिल से काम करते हैं।उनके जैसे समर्पित अधिकारी ही समाज को बेहतर भविष्य की ओर ले जा सकते हैं। श्री सविन बंसल को सलाम – आपकी मेहनत और संवेदना लाखों बच्चों और परिवारों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर रही है!