देहरादून, 6 अप्रैल 2026, B P Singh – उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शहर की सीमा में प्रवेश करते ही हाईवे की तेज रफ्तार बरकरार रहने से सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। खासकर मोहब्बेवाला रोड पर लगभग रोजाना होने वाले हादसे अब स्थानीय लोगों के लिए रोजमर्रा की चिंता बन चुके हैं। विशेषज्ञों और सड़क सुरक्षा संगठनों का कहना है कि शहर के अंदर स्पीड लिमिट 50 किमी/घंटा तय करने, स्पीड ब्रेकर लगाने, साइनबोर्ड और कैमरों की तत्काल जरूरत है। बिना स्पीड कंट्रोल के हाईवे शहर के बीच से गुजरने से पैदल यात्री, दोपहिया वाहन चालक और स्थानीय लोगों की जान पर बन रही है।
मोहब्बेवाला रोड पर लगभग रोज हादसे: CCTV में कैद भयानक दृश्य
मोहब्बेवाला इलाका देहरादून-सहारनपुर हाईवे का प्रवेश द्वार है, जहां शहर शुरू होते ही वाहनों की रफ्तार कम नहीं होती। मार्च 2026 में ही यहां कई भीषण हादसे हो चुके हैं। 9 मार्च को एक तेज रफ्तार मार्बल लदा ट्रक टायर फटने के बाद अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गया। CCTV फुटेज वायरल हो गया, जिसमें ट्रक हवा में उड़ता नजर आया। इसी तरह दिसंबर 2025 में एक ट्रक ने 6 गाड़ियों को रौंद डाला और दुकानों में घुस गया। कई मामलों में चालक नींद या तेज रफ्तार के कारण काबू खो बैठे।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि मोहब्बेवाला चौक पर रोजाना छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं। ट्रक, बस और निजी वाहन शहर में दाखिल होते ही 80-100 किमी/घंटा की रफ्तार पर दौड़ते हैं। नतीजा – पैदल यात्री क्रॉसिंग पर, स्कूटी सवार युवा और स्थानीय वाहन चालक बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
देहरादून में सड़क हादसों की स्थिति: आंकड़े चिंताजनक
उत्तराखंड में 2025 में कुल 1,846 सड़क हादसे हुए, जिनमें 1,242 लोगों की मौत हो गई और 2,056 घायल हुए (iRAD डेटा के अनुसार)। देहरादून जिले में हादसों की संख्या 2024 के 511 से घटकर 450 रह गई, लेकिन मौतें 209 से बढ़कर 229 हो गईं – यानी 9.57% की बढ़ोतरी। तेज रफ्तार इन हादसों की सबसे बड़ी वजह है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति गंभीर है। MoRTH के आंकड़ों के मुताबिक 2023-24 में ओवर-स्पीडिंग 68-70% घातक हादसों और मौतों की वजह बनी। WHO के अनुसार, औसत स्पीड में 1% बढ़ोतरी से घातक हादसों का खतरा 4% और गंभीर चोटों का 3% बढ़ जाता है।
स्पीड और मौत का गहरा संबंध: डेटा बताता है सच्चाई
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट साफ कहती है:
- 30 किमी/घंटा पर पैदल यात्री की मौत का खतरा सिर्फ 10% होता है।
- 50 किमी/घंटा पर यह खतरा बढ़कर 40-50% हो जाता है।
- 70 किमी/घंटा पर खतरा 90% से ज्यादा हो जाता है।
- हर 1 किमी/घंटा स्पीड कम करने से घातक हादसों का खतरा 3-4% घटता है।
भारत में हाईवे शहर के बीच से गुजरने (जैसे देहरादून के मोहब्बेवाला) से क्रॉसिंग पर पैदल यात्री और दोपहिया वाहन सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं। तेज रफ्तार में ब्रेक लगाने का समय कम हो जाता है, टायर फटने या कंट्रोल खोने पर हादसा भयानक रूप ले लेता है। मोहब्बेवाला जैसे इलाकों में हाईवे सीधे बाजार, स्कूल और आवासीय इलाकों से होकर गुजरता है, जहां स्पीड कंट्रोल न होने से खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
कम स्पीड से कैसे बचेंगी जानें? खतरा कम, सुरक्षा बढ़ेगी
वैज्ञानिक अध्ययनों से साबित है कि शहर के अंदर 40-50 किमी/घंटा स्पीड लिमिट से:
- हादसों की संख्या 20-30% कम हो सकती है।
- घातक चोटों और मौतों में 40-50% की कमी आ सकती है।
- पैदल यात्री और साइकिल चालकों की सुरक्षा बढ़ेगी।
- चालक को ब्रेक लगाने और रिएक्ट करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
देहरादून जैसे पहाड़ी शहर में जहां सड़कें संकरी और घुमावदार हैं, तेज रफ्तार और भी खतरनाक साबित होती है। हाईवे शहर के बीच से गुजरने का मतलब है कि हर क्रॉसिंग पर स्थानीय लोग जोखिम में हैं।
स्पीड ब्रेकर, साइनबोर्ड और कैमरा अब अनिवार्य: सुरक्षा के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत
प्रवेश प्वाइंट्स पर:
- स्पीड ब्रेकर (Rumble Strips): शहर में दाखिल होते ही रफ्तार कम करने के लिए प्रभावी।
- साइनबोर्ड: “City Limit – 50 kmph” और “Speeding is Deadly” जैसे बड़े-बड़े बोर्ड।
- कैमरा मॉनिटरिंग: ऑटोमैटिक स्पीड कैमरे और CCTV से चालान और निगरानी।
- पुलिस चेकिंग: नियमित स्पीड रडार चेकिंग।
ये उपाय तुरंत लागू किए जाएं तो हादसों में भारी कमी आ सकती है। देहरादून नगर निगम, ट्रांसपोर्ट विभाग और पुलिस को मिलकर गाइडलाइंस बनानी चाहिए।
तत्काल जरूरत: शहर के अंदर 40-50 किमी/घंटा स्पीड लिमिट की गाइडलाइंस
विशेषज्ञों का सुझाव है कि देहरादून समेत सभी उत्तराखंड शहरों में हाईवे प्रवेश प्वाइंट पर 50 किमी/घंटा की सख्त लिमिट लागू की जाए। केंद्र सरकार की सड़क सुरक्षा नीति भी शहरों में कम स्पीड पर जोर देती है। मोहब्बेवाला जैसे इलाकों में हाईवे को “Urban Arterial Road” मानकर स्पीड कंट्रोल जरूरी है।
देहरादून में तेज रफ्तार अब “रोजमर्रा की बात” नहीं रह गई है – यह जानलेवा बन चुकी है। मोहब्बेवाला रोड पर लगभग रोज होने वाले हादसे चेतावनी हैं। अगर अब स्पीड ब्रेकर, साइनबोर्ड, कैमरा और 40-50 किमी/घंटा लिमिट नहीं लगाई गई तो मौतों का आंकड़ा और बढ़ेगा। प्रशासन, जनप्रतिनिधि और नागरिकों को मिलकर इस मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी। सड़क सुरक्षा सिर्फ नियम नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी बचाने का सवाल है। देहरादून को सुरक्षित शहर बनाने का समय आ गया है।
(आंकड़े: MoRTH, WHO, iRAD 2025 और स्थानीय रिपोर्ट्स पर आधारित)
