(विशेष न्यूज़ रिपोर्ट – 8 अप्रैल 2026)देहरादून: B P SINGH- उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में दो साल पहले हुए एक दर्दनाक हिट एंड रन मामले ने एक बार फिर राज्य पुलिस व्यवस्था की लापरवाही और जवाबदेही की कमी को उजागर कर दिया है। 18 वर्षीय युवक क्षितिज चौधरी की तेज रफ्तार डंपर की चपेट में आने से मौत हो गई थी। घटना के बाद चालक फरार हो गया और पुलिस ने कुछ समय बाद फाइनल रिपोर्ट (एफआर) दाखिल कर केस बंद कर दिया। लेकिन पीड़ित की मां ललिता चौधरी ने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद सीसीटीवी फुटेज खंगाले, सड़क के कोण नापे, आरटीओ रिकॉर्ड चेक किए और अंततः आरोपी ट्रक का नंबर UK07CB6929 (अंकित चौहान के नाम पर रजिस्टर्ड) ढूंढ निकाला। अब नए सबूतों के आधार पर पुलिस को केस में अग्रिम विवेचना शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।यह मामला न सिर्फ एक मां की जुझारू भावना का प्रतीक है, बल्कि उत्तराखंड पुलिस में व्याप्त लापरवाही, सबूतों की अनदेखी और भ्रष्टाचार की गहरी समस्या को भी सामने लाता है।
घटना का पूरा विवरण: 16 फरवरी 2024 की वो रात16 फरवरी 2024 की रात करीब 2:45 बजे प्रेमनगर क्षेत्र में क्षितिज चौधरी अपने दोस्त के साथ पैदल जा रहे थे। पीछे से तेज रफ्तार डंपर ने उन्हें टक्कर मार दी। युवक सड़क पर करीब 45 मिनट तक तड़पता रहा, लेकिन कोई मदद नहीं पहुंची। बाद में एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया, जहां एक पैर काटना पड़ा और अगले दिन क्षितिज की मौत हो गई। परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में देरी की। मां ललिता चौधरी ने 19 फरवरी 2024 को प्रेमनगर थाने में अज्ञात डंपर चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।पुलिस ने जांच की, लेकिन सीसीटीवी फुटेज, गवाहों या आरटीओ रिकॉर्ड्स की ठोस पड़ताल नहीं की। कुछ महीनों बाद फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर केस बंद कर दिया गया। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और सबूत गायब होने का हवाला दिया।
ललिता चौधरी ने बताया, “मेरा बेटा सड़क पर तड़पता रहा। अगर पुलिस ने तुरंत काम किया होता तो आज आरोपी जेल में होता। मैं हर दिन उसी सड़क पर जाती थी और सोचती थी कि मेरा बेटा यहीं मरा।” उन्होंने खुद मोर्चा संभाला – आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरे चेक किए, सड़क की ज्यामिति नापी, दर्जनों ट्रकों के रजिस्ट्रेशन आरटीओ से निकलवाए और अंत में ट्रक UK07CB6929 तक पहुंची, जो अंकित चौहान के नाम पर रजिस्टर्ड है।4 अप्रैल 2026 को ललिता चौधरी ने देहरादून एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोभाल से मुलाकात की और सबूत सौंपे।
प्रेमनगर थाना प्रभारी नरेश राठौर ने बताया कि एफआर लग चुकी थी, लेकिन नए सबूत मिलने पर अग्रिम विवेचना शुरू की जाएगी। अदालत से अनुमति लेकर जांच आगे बढ़ाई जाएगी।मां की मेहनत: वह जो पुलिस नहीं कर सकीललिता चौधरी ने दो साल तक लगातार दफ्तरों के चक्कर काटे।
उन्होंने कहा, “पुलिस अगर अपना काम करती तो मुझे यह सब नहीं करना पड़ता।” उनकी इस जुझारू लड़ाई ने न सिर्फ परिवार को न्याय की उम्मीद जगाई, बल्कि पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गई। कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस मामले को “मां की जीत” और “पुलिस की नाकामी” के रूप में उजागर किया गया है।यह घटना उत्तराखंड में हिट एंड रन मामलों की आम समस्या को भी दर्शाती है, जहां ड्राइवर फरार हो जाते हैं और पुलिस सबूतों की कमी का हवाला देकर केस बंद कर देती है।
उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा: 2025 में 1846 एक्सीडेंट, 1242 मौतेंउत्तराखंड परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में राज्य में कुल 1846 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1242 मौतें और 2056 लोग घायल हुए। यह आंकड़ा 2024 (1747 एक्सीडेंट, 1090 मौतें) की तुलना में बढ़ा है। हिट एंड रन मामलों में अक्सर चालक फरार हो जाते हैं और जांच अधर में लटक जाती है। पहाड़ी इलाकों में सड़क की जटिलता, तेज रफ्तार और लापरवाही इन दुर्घटनाओं को बढ़ाती है।प्रेमनगर कांड इसी पैटर्न का हिस्सा है, जहां पुलिस की शुरुआती लापरवाही ने न्याय में देरी की।
उत्तराखंड पुलिस पर लगातार आरोप: भ्रष्टाचार और लापरवाही के उदाहरणप्रेमनगर मामला अकेला नहीं है। हाल के वर्षों में उत्तराखंड पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगे हैं:
- रिश्वतखोरी: मई 2025 में देहरादून के पटेलनगर थाना क्षेत्र की आईएसबीटी चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक देवेश खुगशाल को सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप था कि उन्होंने एक भूमि विवाद की जांच में गैंगस्टर एक्ट की धमकी देकर रिश्वत मांगी। बाद में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ और सस्पेंड किया गया।
- क्लेमेंटटाउन लूट और तोड़फोड़ कांड: एक पूर्व नौसेना अधिकारी की विधवा कुसुम कपूर की कोठी तोड़ने और लूटपाट के मामले में पुलिस पर आरोपी पक्ष को संरक्षण देने का आरोप लगा। राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने तत्कालीन एसएसपी जन्मेजय खंडूरी और क्लेमेंटटाउन एसएचओ नरेंद्र गहलावत पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की।
- अन्य मामले: फरवरी 2026 में डीजीपी ने दो सब-इंस्पेक्टरों को सस्पेंड किया – एक ऋषिकेश में महिला हत्या मामले में लापरवाही के लिए और दूसरे हरिद्वार में रविदास जयंती के दौरान झड़प व फायरिंग मामले में। कई मामलों में सीसीटीवी फुटेज, गवाहों और सबूतों की अनदेखी कर केस जल्दी बंद करने के आरोप लगते रहे हैं।
विजिलेंस विभाग ने 2025 में 26 सरकारी अधिकारियों (जिनमें 6 गजेटेड) को रिश्वत लेते पकड़ा, जिसमें पुलिस विभाग से जुड़े कई मामले शामिल थे। हालांकि, कार्रवाई अक्सर सस्पेंशन या सिफारिश तक सीमित रह जाती है। ये उदाहरण दिखाते हैं कि पुलिस में जवाबदेही का अभाव गहरा है। लापरवाही या भ्रष्टाचार पर तुरंत सख्त कार्रवाई की बजाय मामूली कदम उठाए जाते हैं।अब क्या?
जरूरी सुधार और सख्त कार्रवाई- प्रेमनगर कांड ने पुलिस सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता की सुरक्षा और न्याय की उम्मीद पुलिस से होती है, लेकिन जब पुलिस ही लापरवाह हो जाए तो आम नागरिक कहां जाए? आवश्यक कदम:
- प्रेमनगर थाने समेत दोषी अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई।
- सभी पुराने हिट एंड रन मामलों की समीक्षा और स्वतंत्र जांच।
- सबूत संरक्षण, सीसीटीवी मॉनिटरिंग और त्वरित जांच के लिए नए प्रोटोकॉल।
- पुलिस सुधार के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को मजबूत करना।
- हिट एंड रन मामलों में तेज ट्रायल और पीड़ित परिवारों को सहायता।
उत्तराखंड जैसे पर्यटन और संवेदनशील राज्य में पुलिस की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। एक मां ने दिखा दिया कि अगर सिस्टम फेल हो जाए तो आम आदमी खुद लड़ सकता है, लेकिन यह सिस्टम की नाकामी को छिपा नहीं सकता।पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है – “पुलिस अगर आरोपी को बचाने में लगी रहेगी तो आम आदमी कहां जाएगा?”
ललिता चौधरी की लड़ाई सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि सरकार और पुलिस विभाग अब क्या कदम उठाएंगे? क्या दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी या मामला फिर ठंडा पड़ जाएगा? समय आ गया है कि सिस्टम खुद को सुधारे, वरना ऐसी घटनाएं दोहराती रहेंगी और जनता का भरोसा टूटता जाएगा। न्याय मिले क्षितिज को… और हर उस मां को जो अपने बच्चे के लिए लड़ रही है।
(रिपोर्ट विभिन्न समाचार स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पीड़ित परिवार के बयानों पर आधारित। आगे की अपडेट के लिए पुलिस की जांच पर नजर रखें।)
