16 फरवरी से शुरू हुआ धमकी भरे मेल का सिलसिला
उत्तराखंड के जिला न्यायालयों से लेकर हाई कोर्ट तक बम से उड़ाने की धमकियों का मामला अब Dark Web Connection से जुड़ता दिख रहा है। 16 फरवरी से नैनीताल और उत्तरकाशी जिलों में धमकी भरे ईमेल भेजे जाने की शुरुआत हुई, जो अगले ही दिन टिहरी, अल्मोड़ा, देहरादून और हरिद्वार समेत कई जिलों तक पहुंच गई।
इन संदेशों के लगातार आने ने राज्य की सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है।
जांच में सामने आया Dark Web Connection और टोर ब्राउजर का इस्तेमाल
प्रारंभिक जांच में साइबर सेल और एसटीएफ को संकेत मिले हैं.
कि मेल भेजने में डार्क वेब, टोर ब्राउजर और क्लाउड सर्वरों का उपयोग किया गया। वीपीएन और प्रॉक्सी सर्वर के जरिये असली पहचान और लोकेशन छिपाने की कोशिश की गई है।
इसी Dark Web Connection के चलते अपराधियों तक सीधे पहुंच पाना पुलिस के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।
कई एजेंसियां जांच में जुटीं
राज्य की साइबर सेल, एसटीएफ और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां मामले की संयुक्त जांच कर रही हैं।
Ridhim Agarwal (आईजी) ने बताया कि एक के बाद एक अलग-अलग जिलों में मेल भेजे जाना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। अप्रैल 2025 में दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में भी इस तरह की धमकियां सामने आई थीं।
विदेशों से Dark Web Connection के ट्रेस हुए आईपी एड्रेस
जांच के दौरान कुछ आईपी एड्रेस विदेशी लोकेशन से ट्रेस हुए हैं।
संबंधित सर्विस प्रोवाइडरों से डाटा प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
डार्क वेब के जरिए अपराधी अपनी लोकेशन छिपाने में सक्षम होते हैं,
जिससे जांच प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है।
अधिकारियों के अनुसार, कई राज्यों में इसी तरह के धमकी भरे संदेश मिलने से केंद्रीय एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।
पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
चार दिन बीत जाने के बाद भी मेल भेजने वाले की पुष्टि नहीं हो पाई है।
इससे साफ है कि Dark Web Connection ने जांच एजेंसियों के सामने बड़ी तकनीकी चुनौती खड़ी कर दी है।
हालांकि अधिकारियों का दावा है कि साइबर सेल और एसटीएफ के समन्वय से जल्द ही धमकियों के सोर्स तक पहुंचा जाएगा।
