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दिल्ली से लौट रहे युवक की सड़क हादसे में मौत, टांडा-लालकुआं मार्ग फिर सवालों के घेरे में

लगातार बढ़ रहे हादसे, पुलिस चौकी और सीसीटीवी की मांग तेज

लालकुआं/हल्द्वानी, विशेष रिपोर्ट– देवभूमि के लोग/-

नैनीताल जनपद के टांडा और लालकुआं क्षेत्र में एक बार फिर सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। दिल्ली से घर लौट रहे एक युवक की बाइक को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में शोक की लहर है और स्थानीय लोगों ने टांडा-लालकुआं मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कई वर्षों से टांडा, बिंदुखत्ता, लालकुआं, हल्दूचौड़ और काठगोदाम-लालकुआं क्षेत्र सड़क दुर्घटनाओं के लिए बदनाम होते जा रहे हैं। तेज रफ्तार वाहन, अपर्याप्त पुलिस निगरानी, अंधेरे क्षेत्र, जंगल से गुजरने वाले सुनसान मार्ग और सीसीटीवी की कमी के कारण दुर्घटनाओं के साथ-साथ अपराधों की आशंका भी बनी रहती है।

हादसों का बढ़ता ग्राफ

उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। परिवहन और सड़क सुरक्षा से जुड़े आंकड़ों के अनुसार राज्य में हर वर्ष हजारों सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हो रही हैं। 2025 में राज्य में 1,846 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 1,242 लोगों की मौत हुई। यह 2024 की तुलना में अधिक था।

आरटीआई से सामने आए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2000 से अब तक उत्तराखंड में 34,000 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं और 21,000 से अधिक मौतें दर्ज हो चुकी हैं। उधम सिंह नगर और कुमाऊं क्षेत्र के मैदानी हिस्सों में भी दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी है।

हाईकोर्ट भी जता चुका है चिंता

काठगोदाम-लालकुआं मार्ग पर दुर्घटनाओं को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट पहले भी चिंता जता चुका है। अदालत ने इस मार्ग पर कथित रूप से खतरनाक सड़क कट और डिजाइन संबंधी खामियों के कारण हुई मौतों पर जांच के आदेश दिए थे। रिपोर्टों के अनुसार एक वर्ष में इस मार्ग पर 14 लोगों की जान गई थी।

टांडा और जंगल क्षेत्र क्यों बन रहे हैं “ब्लैक स्पॉट”?

स्थानीय लोगों के अनुसार:

  • कई हिस्सों में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं हैं।
  • रात के समय पुलिस गश्त बेहद सीमित रहती है।
  • दुर्घटना होने पर तत्काल सहायता उपलब्ध नहीं हो पाती।
  • कई किलोमीटर तक कोई पुलिस चौकी या आपात सहायता केंद्र नहीं है।
  • सीसीटीवी कैमरों का अभाव है।
  • भारी वाहनों की तेज रफ्तार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की हत्या कर शव सड़क किनारे फेंक दिया जाए तो प्रारंभिक तौर पर उसे दुर्घटना मान लिया जाना संभव है, क्योंकि कई स्थानों पर न तो निगरानी व्यवस्था है और न ही तत्काल प्रत्यक्षदर्शी उपलब्ध होते हैं। ऐसे में आधुनिक निगरानी तंत्र की आवश्यकता और बढ़ जाती है।

पुलिस चौकी और थाना की मांग

स्थानीय सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से निम्न मांगें उठाई जा रही हैं:

  • टांडा क्षेत्र में स्थायी पुलिस चौकी।
  • लालकुआं-बिंदुखत्ता मार्ग पर अतिरिक्त पुलिस गश्त।
  • जंगल क्षेत्र में हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी नेटवर्क।
  • दुर्घटना संभावित स्थानों पर स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम।
  • 24×7 आपातकालीन सहायता केंद्र।
  • एम्बुलेंस और ट्रॉमा रिस्पॉन्स यूनिट की तैनाती।
  • महिला सुरक्षा हेतु विशेष पेट्रोलिंग।

सार्वजनिक सुविधाओं की भी कमी

स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में केवल पुलिसिंग ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुविधाओं का भी अभाव है।

  • पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं।
  • आपातकालीन हेल्प पॉइंट नहीं।
  • शौचालय और विश्राम स्थल नहीं।
  • दुर्घटना सूचना बोर्ड और चेतावनी संकेत सीमित।
  • रिफ्लेक्टर और रोड मार्किंग कई स्थानों पर खराब स्थिति में।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश दुर्घटनाओं के पीछे तेज रफ्तार, अपर्याप्त निगरानी, सड़क इंजीनियरिंग की खामियां और दुर्घटना के बाद सहायता पहुंचने में देरी प्रमुख कारण होते हैं। राष्ट्रीय और राज्य स्तर के अध्ययनों में भी ओवरस्पीडिंग और कमजोर प्रवर्तन को प्रमुख कारण माना गया है।

क्या हो समाधान?

विशेषज्ञों का मानना है कि टांडा-लालकुआं क्षेत्र में निम्न कदम तत्काल उठाए जाने चाहिए:

  • प्रत्येक 2–3 किमी पर सीसीटीवी कैमरे।
  • एआई आधारित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली।
  • रात्रिकालीन पुलिस गश्त बढ़ाना।
  • दुर्घटना संभावित स्थानों की वैज्ञानिक पहचान।
  • हाईवे पेट्रोल यूनिट की तैनाती।
  • बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग।
  • ट्रॉमा सेंटर और त्वरित चिकित्सा सहायता।

कब होगा सुधार, कब जागेगा प्रशासन?

दिल्ली से लौट रहे युवक की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह टांडा-लालकुआं क्षेत्र की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। लगातार हो रहे हादसे संकेत दे रहे हैं कि केवल शोक व्यक्त करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। मजबूत पुलिस निगरानी, सीसीटीवी नेटवर्क, सड़क सुरक्षा सुधार और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार के बिना इस क्षेत्र में दुर्घटनाओं और अपराधों की आशंका बनी रहेगी। अब देखना होगा कि प्रशासन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है।

By B P Singh

News and public affairs

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