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टिहरी में ब्रेक फेल: चारधाम यात्रियों से भरी UTC बस पलटी, बड़े हादसे से बाल-बाल बचे 39 यात्री, लगातार हादसों से आम जनता की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह!

टिहरी गढ़वाल। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के दौरान एक बार फिर सरकारी बस की लापरवाही ने यात्रियों की जान पर बनाई। रविवार सुबह ऋषिकेश-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर तोताघाटी के पास चारधाम यात्रा से लौट रही उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC) की बस अचानक ब्रेक फेल होने के कारण अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। बस में 39 यात्री सवार थे। राहत की बात यह रही कि बस खाई में नहीं गिरी, जिससे एक बड़ा जनहानि का हादसा टल गया।

घटना के अनुसार, बस संख्या UK04 PA 0418 चारधाम यात्रा समाप्त कर ऋषिकेश की ओर आ रही थी। सुबह करीब 8:30 बजे तोताघाटी के पास ब्रेक फेल हो गए। चालक ने बस को संभालने की पूरी कोशिश की, लेकिन वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। पुलिस, स्थानीय प्रशासन और SDRF की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। SDRF निरीक्षक कविंद्र सजवाण के नेतृत्व में सभी 39 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हादसे में 3-4 यात्रियों को हल्की चोटें आईं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद ऋषिकेश के अस्पताल में भर्ती कराया गया। अन्य यात्री सुरक्षित हैं।

प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है और प्रारंभिक रिपोर्ट में ब्रेक फेल को मुख्य कारण बताया गया है। यह घटना चारधाम यात्रा के दौरान वाहनों की सुरक्षा और तकनीकी जांच की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

लगातार ब्रेक फेल की समस्या: UTC बसों में सुरक्षा की लापरवाही

यह पहली बार नहीं है जब UTC की बसों में ब्रेक फेल की समस्या सामने आई हो। पिछले एक वर्ष में उत्तराखंड में सरकारी रोडवेज बसों में कई हादसे ब्रेक फेल या यांत्रिक खराबी के कारण हुए हैं। उदाहरण के तौर पर:

  • कुछ दिन पहले ही लोहाघाट में बस ड्राइवर की ब्रेक फेल होने के दौरान दुःखद मौत हो गई, किंतु जांबाज ड्राइवर ने अन्य यात्रियों की जान बचा ली ।
  • जून 2025 में ऋषिकेश-बद्रीनाथ मार्ग पर एक बस में ब्रेक फेल होने से पलट गई, जिसमें 30 यात्री सवार थे। बाल-बाल बचे।
  • अन्य घटनाओं में चंपावत, नैनीताल, उत्तरकाशी और अल्मोड़ा क्षेत्रों में ब्रेक फेल या वाहन खराबी से बसें खाई में गिरीं, जिनमें दर्जनों मौतें हुईं।

ये हादसे साफ संकेत देते हैं कि UTC बसों की नियमित मेंटेनेंस और ब्रेक सिस्टम की जांच में गंभीर कमी है। पहाड़ी इलाकों में घुमावदार सड़कों पर पुरानी बसें यात्रियों के लिए मौत का जाल साबित हो रही हैं।

UTC द्वारा पुरानी बसों की खरीद: भ्रष्टाचार का आरोप और जनता की जान का खेल

उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC) लंबे समय से पुरानी बसों के बेड़े को नवीनीकृत करने की बात कर रहा है, लेकिन हकीकत में स्थिति बदतर होती जा रही है। बार-बार नए बसों की खरीद के टेंडर निकलते हैं, फिर भी सड़कों पर पुरानी, खस्ताहाल बसें दौड़ती नजर आती हैं। यात्रियों और विशेषज्ञों का आरोप है कि बसों की खरीद में भ्रष्टाचार के चलते घटिया या पुरानी बसें खरीदी जा रही हैं, जिसकी कीमत आम आदमी की जान देकर चुकानी पड़ रही है, विभागीय अधिकारियों की कोई जिम्मेदारी तय नहीं की जाती कि आखिर क्यों लगातार बस हादसे हो रहे हैं।

पिछले वर्षों में UTC ने सैकड़ों नई बसें खरीदने के दावे किए, लेकिन फ्लीट की स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा। पूर्व में एक पूर्व मंत्री पर 2019 में 2012 मॉडल खरीदने के खुले आरोप लगे थे, और बस के गियर बॉक्स और लीवर निकलकर हाथ में आ रहे थे। ड्राइवर और स्टाफ ने शिकायतें की तो उन्हें डरा-धमकाकर चुप करा दिया गया क्योंकि कर्ता-धर्ता ही मालिक थे। किंतु कोई कार्यवाही नहीं की गई और तब से कर्मचारी और आमजन अपनी जान डेकर इसकी कीमत चुका रहे हैं, किंतु आजतक किसी जांच में कोई दोषी नहीं निकल पाया क्योंकि जांच करता ही खरीददार होता है। कई बार तीसरी पार्टी जांच की बात कही गई, फिर भी ब्रेक फेल जैसी मूलभूत समस्याएं बनी हुई हैं। इससे साफ है कि निगम में जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया वाहन सड़कों पर उतारे जा रहे हैं, जो सीधे-सीधे जनता के साथ धोखा और लापरवाही है।

जवाबदेही तय करने की मांग

इस तरह के बार-बार होने वाले हादसों में UTC प्रबंधन, परिवहन मंत्री और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। बसों की नियमित फिटनेस जांच, ड्राइवर ट्रेनिंग और मेंटेनेंस पर सख्त निगरानी की जरूरत है। चारधाम यात्रा जैसे संवेदनशील मौसम में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

प्रशासन से मांग है कि इस हादसे की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई की जाए और UTC बसों को तुरंत आधुनिक, सुरक्षित बेड़े से बदला जाए। यात्रियों की सुरक्षा सबसे ऊपर होनी चाहिए, न कि भ्रष्टाचार और लापरवाही।

सुरक्षा की अपील: चारधाम यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि बस की स्थिति की जांच करें और किसी भी संदेह पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। जनता की जान अमूल्य है—इसकी कीमत भ्रष्टाचार या लापरवाही नहीं चुकानी चाहिए।

By B P Singh

News and public affairs

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