Sat. Jun 6th, 2026

उत्तराखंड PCS में ऐतिहासिक रिजल्ट्स: प्रीलिम्स में 33% उत्तराखंड संबंधी प्रश्न और मेन्स में दो पूर्ण उत्तराखंड जीएस पेपर – पुष्कर सिंह धामी सरकार का दूरदर्शी निर्णय बन गया देवभूमि के युवाओं का सच्चा गेम चेंजर! रिकॉर्ड चयन, बाहरी दबदबे का अंत, स्थानीय युवाओं के हाथ में नौकरियां और परीक्षा व्यवस्था में लौटा विश्वास

देहरादून, 5 जून 2026/-भानु प्रताप सिंह

देवभूमि उत्तराखंड की पावन भूमि पर जहां आस्था की गंगा निरंतर बहती है, वहीं अब युवा शक्ति का नया उदय हो रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की परीक्षाओं में जो क्रांतिकारी बदलाव किया है, वह न केवल राज्य के स्थानीय युवाओं के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल भी बन गया है। प्रीलिम्स के जनरल स्टडीज पेपर में कम से कम 33 प्रतिशत प्रश्न उत्तराखंड से संबंधित अनिवार्य करने और मेन्स परीक्षा में दो पूर्ण उत्तराखंड केंद्रित जनरल स्टडीज पेपर शामिल करने का निर्णय स्थानीय युवाओं की आकांक्षाओं को साकार कर रहा है।

इस बदलाव के बाद UKPSC Upper PCS और Lower PCS परीक्षाओं के परिणामों में रिकॉर्ड संख्या में उत्तराखंडी युवा चयनित हो रहे हैं। पहले जहां UPSC पैटर्न की नकल करते सिलेबस की वजह से बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों के बाहरी उम्मीदवारों का दबदबा रहता था, वहीं अब देवभूमि के बेटे-बेटियां सरकारी नौकरियों (SDM, DSP, SDO आदि) पर काबिज हो रहे हैं। यह रिपोर्ट इस ऐतिहासिक सुधार की विस्तृत पृष्ठभूमि, प्रभाव, सफल कहानियों, धामी सरकार की सराहना, निरंतर परीक्षा चक्र, युवाओं में बहाल विश्वास और अन्य UKPSC परीक्षाओं में भी उत्तराखंड सिलेबस की मांग पर आधारित है। हम विस्तार से हर पहलू को उजागर करेंगे ताकि पाठक इस परिवर्तन की गहराई समझ सकें।

1. धामी सरकार का दूरदर्शी निर्णय: स्थानीयता की प्राथमिकता और सिलेबस सुधार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य गठन के बाद से ही “उत्तराखंड के युवाओं को उत्तराखंड की नौकरियां” को अपनी प्राथमिकता बनाया है। साथ ही स्थानीय आरक्षण नीति के बाद UKPSC सिलेबस में सुधार एक और मील का पत्थर है।

UKPSC की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, प्रीलिम्स GS Paper-I में अब कम से कम 33% प्रश्न उत्तराखंड के इतिहास, भूगोल, संस्कृति, लोक परंपराओं, हिमालयी पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, पर्यटन, कृषि, जल विद्युत, वन नीति, राज्य योजनाओं (जैसे उद्यमी योजना, बागवानी मिशन) और वर्तमान विकास कार्यक्रमों पर आधारित होंगे। मेन्स में दो अलग-अलग GS पेपर (कहें तो Paper-V और Paper-VI) पूर्ण रूप से उत्तराखंड विशिष्ट हैं, जिनमें राज्य की भौगोलिक चुनौतियां, सांस्कृतिक विविधता, पलायन समस्या, सीमा सुरक्षा, चारधाम यात्रा प्रबंधन, ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव आदि शामिल हैं।

यह बदलाव UPSC-केंद्रित राष्ट्रीय सिलेबस से हटकर राज्य की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप था। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी जी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था, “देवभूमि के युवा ही यहां की समस्याओं को सबसे बेहतर समझते हैं। हम बाहरी प्रतिभा का स्वागत करते हैं, लेकिन स्थानीय युवाओं को उनकी मातृभूमि की सेवा का अवसर मिलना चाहिए।” इस फैसले ने न केवल राजनीतिक स्तर पर सराहना बटोरी, बल्कि लाखों aspirants के बीच उत्साह की लहर दौड़ा दी।

जब 2021 में पेपर लीक के मामले में राज्यभर में आंदोलन चल रहे थे तो देवभूमि के लोग के संपादक भानु प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री और सरकार को पत्र के माध्यम से उत्तराखण्ड के सिलेबस को बढ़ाए जाने की पुरजोर वकालत की थी, जिससे स्थानीय युवाओं को एज मिल सके और उसके दूरगामी परिणाम अब सामने आ रहे हैं जब हर जगह स्थानीय युवा रिकॉर्ड मात्रा में चयनित हो रहे हैं।

सुधार की पृष्ठभूमि: राज्य गठन (2000) के बाद UKPSC की परीक्षाएं शुरू हुईं, लेकिन शुरुआती वर्षों में सिलेबस राष्ट्रीय पैटर्न पर आधारित रहा। इससे पहाड़ी जिलों (उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर आदि) के युवा, जिनके पास उन्नत कोचिंग संसाधन कम थे, पीछे रह जाते थे। धामी सरकार ने 2021 में युवाओं की इस मांग पर इसकी समीक्षा की और मांग के अनुरूप 2022 से लागू किया। यह निर्णय युवा सशक्तिकरण, पलायन रोकथाम और बेहतर प्रशासन की त्रिपक्षीय रणनीति का हिस्सा है।

2. पहले की समस्या: बाहरी उम्मीदवारों का दबदबा और स्थानीय युवाओं की निराशा

पिछले 10-15 वर्षों में UKPSC Upper PCS और Lower PCS में UPSC जैसा व्यापक सिलेबस (भारतीय इतिहास, विश्व अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय संबंध आदि) होने के कारण स्थानीय उम्मीदवार संघर्ष करते थे।

  • प्रीलिम्स: उत्तराखंड GK का वजन मात्र 10-15%। बाकी राष्ट्रीय विषयों पर फोकस।
  • मेन्स: कोई अलग उत्तराखंड पेपर नहीं, जिससे पहाड़ी संस्कृति, स्थानीय मुद्दों (जैसे हिमालयी भू-धरातल, ग्लेशियर पिघलना, वन्यजीव संरक्षण) की गहराई नहीं आ पाती।
  • परिणाम: बिहार और UP के कोचिंग सेंटर्स (दिल्ली, इलाहाबाद आदि) से आने वाले उम्मीदवार, जो UPSC की तैयारी करते थे, UKPSC में भी टॉप करते थे। 2018-2022 के परिणामों में उत्तराखंडी चयनितों का प्रतिशत 30-40% से नीचे रहा।
  • प्रभाव: स्थानीय युवाओं में निराशा, पलायन बढ़ा, और सरकार के प्रति अविश्वास। कई प्रतिभाशाली पहाड़ी युवा दिल्ली-मुंबई की ओर रुख करते थे।

बाहरी उम्मीदवार को राज्य की समझ न होने के बावजूद राज्य में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर बैठा दिया जाता था चाहे राज्य के प्रति समर्पण और व्यवहारिक ज्ञान शून्य ही क्यों न हो, ऊपर से सरकारी का टैग, कि सिस्टम में फिट हो गए तो फिर कोई चाहकर भी शायद कुछ कर पाए, चाहे कार्य में कर्मचारी निल बट्टे सन्नाटा ही क्यों न हो।

एक पूर्व aspirant (नाम: दीपक राणा, चमोली) ने बताया, “हम उत्तराखंड की भौगोलिक और सांस्कृतिक किताबें पढ़ते थे, लेकिन परीक्षा में उनका वजन कम होने से स्कोर प्रभावित होता था। बाहरी उम्मीदवार राष्ट्रीय करंट अफेयर्स में आगे रहते थे क्योंकि पहाड़ी युवा संसाधनों के हमेशा पिछड़ जाते हैं, जहां कई जगहों पर कई दिनों तक बुनियादी इंटरनेट सुविधा भी मुश्किल से मिल पाती है।”

3. बदलाव के बाद रिकॉर्ड चयन: उत्तराखंडी युवाओं की जीत की कहानी

धामी सरकार के सिलेबस सुधार के बाद UKPSC परिणाम पूरी तरह बदले हैं।

हालिया Upper PCS 2024-26 परिणाम (जून 2026 में घोषित):

  • 80-90% से अधिक चयनित उत्तराखंड मूल के।
  • Top ranks में पहाड़ी जिलों व स्थानीय उम्मीदवारों का दबदबा।
  • पौड़ी, टिहरी, अल्मोड़ा, बागेश्वर आदि जिलों से सैकड़ों चयन।
  • Lower PCS में भी यही ट्रेंड – क्लर्क, पटवारी, लेखपाल पदों पर स्थानीय युवा।
  • यही रिजल्ट्स पूर्व के अपर पीसीएस और लोअर पीसीएस में लगातार देखा जा रहा है।

सफलता की कहानियां:

  • त्रितुंजय चैसर (देहरादून): “33% UK GK ने मुझे फायदा दिया। मैंने राज्य की आपदा प्रबंधन और पर्यटन नीतियों पर विशेष फोकस किया। ।”
  • श्रुति (पिथौरागढ़): महिला उम्मीदवार, मेन्स के UK GS पेपर में अच्छे अंक। “धामी सरकार ने हमारी परेशानी को समझा और सही नीति निर्धारित की। पहले हम पीछे अन्य राज्यों के छात्रों से रह जाते थे।”
  • ग्रामीण पृष्ठभूमि के कई युवा, जो कोचिंग के बिना तैयारी करते थे, अब सफल।

ये चयन न केवल व्यक्तिगत सफलता हैं, बल्कि सामूहिक उत्थान का प्रतीक। राज्य सरकार ने इन चयनितों को नियुक्ति पत्र वितरित कर उत्सव मनाया।

राज्य की महिलाओं के लिए 30% आरक्षण से बदल गई महिलाओं की किश्मत: उत्तराखंड की महिलाओं के लिए वरदानधामी सरकार द्वारा लागू किए गए 30 प्रतिशत महिला आरक्षण ने देवभूमि की बेटियों को नई उड़ान दी है। यह आरक्षण महिलाओं को UKPSC परीक्षाओं में विशेष अवसर प्रदान कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप हालिया परिणामों में रिकॉर्ड संख्या में लड़कियों का चयन हुआ है।

पहाड़ी जिलों की महिलाएं, जो पहले संसाधनों की कमी और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण पिछड़ जाती थीं, अब SDM, DSP, Lecturer और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर पहुंच रही हैं। कई सफल महिला उम्मीदवारों की कहानियां प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। इस आरक्षण ने न केवल लिंग समानता को बढ़ावा दिया है, बल्कि परिवारों और समाज में महिलाओं की भूमिका को मजबूत किया है। पलायन प्रभावित परिवारों की महिलाएं अब सरकारी नौकरियों के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन हासिल कर रही हैं, जो राज्य के समग्र विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

4. निरंतर परीक्षा चक्र: युवाओं में परीक्षा व्यवस्था के प्रति विश्वास की बहाली

धामी सरकार ने UKPSC को निरंतर और समयबद्ध परीक्षा चक्र चलाने का निर्देश दिया।

  • हर साल Upper PCS, Lower PCS, RO/ARO, Lecturer, Forest Services आदि परीक्षाएं नियमित।
  • Anti-Cheating कानून (सबसे सख्त) से पेपर लीक पर अंकुश।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म: ऑनलाइन आवेदन, एडमिट कार्ड, उत्तर कुंजी, OMR स्कैनिंग।
  • तेज परिणाम घोषणा और साक्षात्कार।

पहले महीनों-महीनों इंतजार होता था; अब विश्वसनीयता बढ़ी। युवा कहते हैं, “मेहनत का फल अब मिलता है। सरकार पर भरोसा लौटा।” इससे हजारों युवा तैयारी में जुटे हैं, बेरोजगारी कम हुई।

5. धामी सरकार की सराहना: विकास, स्थानीयता और युवा सशक्तिकरण का मॉडल

पुष्कर सिंह धामी की सरकार को इस कदम के लिए पूरे राज्य से बधाई मिल रही है।

  • युवा केंद्रित नीतियां: 80% लोकल रिजर्वेशन + सिलेबस सुधार + पारदर्शी भर्ती।
  • प्रशासनिक सुधार: चयनित स्थानीय अधिकारी पहाड़ी समस्याओं (सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा) को बेहतर समझेंगे।
  • आर्थिक प्रभाव: स्थानीय नौकरियां बढ़ने से गांवों में आय, खपत और विकास।
  • राजनीतिक दूरदर्शिता: धामी जी की “सन ऑफ सॉइल” नीति ने सरकार की लोकप्रियता बढ़ाई। अन्य राज्यों (यूपी, HP, J&K) में चर्चा।

धामी जी ने कहा, “हमारी सरकार युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह सुधार केवल शुरुआत है।”

6. अब अन्य UKPSC परीक्षाओं में भी उत्तराखंड सिलेबस की मांग

युवा संगठन (UKPSC Aspirants Union आदि) अब सभी परीक्षाओं (Engineering, Medical, Polytechnic, Forest, High Court Staff आदि) में 30-40% अनिवार्य उत्तराखंड GK की मांग कर रहे हैं।

  • तर्क: राज्य नौकरियां स्थानीय लोगों को।
  • इससे पलायन रुकेगा, प्रशासन मजबूत होगा।
  • UKPSC को शीघ्र अधिसूचना जारी करने की अपील।

7. व्यापक प्रभाव, चुनौतियां और भविष्य की दिशा

सकारात्मक प्रभाव:

  • सामाजिक: पलायन कम, आत्मविश्वास बढ़ा।
  • प्रशासनिक: बेहतर नीति निर्माण।
  • आर्थिक: युवा शक्ति का उपयोग।
  • पर्यावरण: स्थानीय अधिकारी हिमालय संरक्षण पर फोकस करेंगे।

चुनौतियां: व्यवहारिक ज्ञान की कमी, कार्मिको की बेहतर ट्रेनिंग की कमी, बाहरी उम्मीदवारों का समायोजन, सिलेबस की गुणवत्ता, कोचिंग सेंटर्स का विकास।

भविष्य: और अधिक सुधार, डिजिटल लर्निंग, व्यवहारिक ज्ञान की आवश्यकता। धामी सरकार का यह मॉडल पूरे देश के लिए उदाहरण बना है।

पुष्कर सिंह धामी सरकार का UKPSC सुधार उत्तराखंड के युवाओं के लिए सच्चा गेम चेंजर है। युवाओं का यह भी कहना है कि पुष्कर धामी की सरकार ने सबसे अधिक नौकरी दी है और अब के समय में नौकरी बिना सिफ़ारिश के मेहनत से मिलती है।

कई ऐसे युवा हैं जो आज दस से ऊपर परीक्षाएं पास कर चुके हैं और आंकड़े बताते हैं कि पूर्ववर्ती सरकारों से अधिक रिकॉर्ड नंबर में नौकरी दी गई हैं, हालांकि परीक्षार्थियों की संख्या कई अधिक है किंतु मेहनत वाले फल जरूर पा रहे हैं चाहे उसमें समय लग रहा हो, लेकिन युवाओं में आशा है कि मेहनत करेंगे तो नौकरी अवश्य मिलेगी।

किंतु अभी भी कई बिंदुओं पर सुधार की आवश्यकता है जिसमें परीक्षाओं के आयोजन में अनावश्यक अधिक समय लगाना, समयबद्ध चयन प्रकिया न होना, कॉपी आंकलन में अनियमितता, कोर्ट केस में भर्ती लटक जाना, बेरोजगार युवाओं की बड़ी संख्या पर सीमित सरकारी पद, भर्ती कैलेंडर के अनुरूप लगातार भर्तियां करना इत्यादि अभी भी युवाओं को परेशानी बड़ा रहे हैं।


इसके साथ ही इससे नौकरियां स्थानीय हाथों में आईं, परीक्षा प्रणाली मजबूत हुई और देवभूमि का भविष्य उज्ज्वल हुआ। युवा अब कह सकते हैं – “हमारी मेहनत, हमारी नौकरी, हमारा हक।” जय देवभूमि! जय उत्तराखंड!!

By The Common Man

News and public affairs

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *