देहरादून, 3 अप्रैल 2026:B P Singh- उत्तराखंड सरकार ने विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों उपनल (UPNL) कर्मियों के लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को ध्यान में रखते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब इन कर्मियों को समान कार्य के लिए समान वेतन और महंगाई भत्ता (DA) मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। कार्मिक विभाग ने इसके लिए आधिकारिक अनुबंध (Contract) का नया प्रारूप जारी कर दिया है। साथ ही, अनुबंध प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा को बढ़ा दिया गया है।
इस फैसले से राज्य के करीब 11,000 से 22,000 उपनल कर्मियों और उनके परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। 2026-27 बजट में इस उद्देश्य के लिए ₹289.98 करोड़ का प्रावधान भी किया गया है, जो सरकार की संवेदनशील नीति को दर्शाता है।
समान वेतन का लाभ किन्हें और कैसे?
सरकार ने 2 फरवरी 2026 को समान वेतन देने का बड़ा निर्णय लिया था, जिसे अब धरातल पर उतारा जा रहा है। मुख्य संभावित प्रावधान निम्नलिखित हैं:
- कट-ऑफ डेट: 12 नवंबर 2018 तक निरंतर सेवारत उपनल कर्मी पात्र होंगे।
- पहला चरण: जिन कर्मियों ने 10 वर्ष (कुछ मामलों में 12 वर्ष) की निरंतर सेवा पूरी कर ली है, उन्हें प्राथमिकता मिलेगी। उन्हें संबंधित पद के न्यूनतम वेतनमान + महंगाई भत्ता (58% DA के अनुसार) दिया जाएगा।
- उदाहरण: अकुशल कर्मी को लगभग ₹28,440, कुशल को ₹40,290 तक मासिक राशि मिल सकती है।
- अगले चरण: शेष कर्मियों को 2028 तक चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा।
- वेतन अब संबंधित विभाग द्वारा सीधे कर्मी के बैंक खाते में जमा होगा। UPNL के माध्यम से नहीं। GST या सेवा कर की कोई कटौती नहीं होगी, जिससे शुद्ध राशि बढ़ेगी।
अनुबंध के मुख्य प्रावधान और अन्य महत्वपूर्ण लाभ
नए अनुबंध प्रारूप में कर्मियों की सुविधाओं के साथ अनुशासन पर भी ध्यान रखा गया है। अन्य प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- अवकाश की सुविधाएं:
- प्रति वर्ष 12 आकस्मिक अवकाश (Casual Leave)।
- 15 उपार्जित अवकाश (Earned Leave)।
- महिला कर्मियों को मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) का लाभ (180 दिन तक, उच्च न्यायालय के आदेशानुसार)।
- साप्ताहिक अवकाश और राष्ट्रीय अवकाश भी लागू।
- अनुशासन और सेवा संबंधी नियम:
- अनुबंध अवधि सरकार तय करेगी और इसे बढ़ाया भी जा सकता है।
- ड्यूटी के दौरान सख्त अनुशासन अनिवार्य। आपराधिक कृत्य या लंबी बीमारी में सेवा समाप्ति का प्रावधान।
- बिना कारण बताए नोटिस देकर भी सेवा समाप्त की जा सकती है।
- स्वास्थ्य और अन्य सुरक्षा:
- ESI योजना या Workman Compensation का प्रावधान (जिला अनुसार)।
- लंबी सेवा करने वाले कर्मियों के लिए भविष्य में ग्रेच्युटी या अन्य सेवानिवृत्ति लाभों पर विचार संभव।
- चरणबद्ध नियमितीकरण की उम्मीद:
सरकार ने सैद्धांतिक रूप से चरणबद्ध नियमितीकरण की बात कही है। पहले चरण में 10-12 वर्ष सेवा पूर्ण करने वाले कर्मी शामिल होंगे। इससे कर्मियों की नौकरी की सुरक्षा बढ़ेगी।
समय-सीमा क्यों बढ़ाई गई?
अनुबंध प्रक्रिया और प्रारूप तैयार करने में समय लगा, इसलिए शासन ने मूल समय-सीमा को दो महीने और बढ़ा दिया है। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र कर्मियों के साथ कागजी औपचारिकताएं जल्द पूरी करें।
यह फैसला उपनल कर्मियों के लंबे आंदोलन और उच्च न्यायालय के निर्देशों का परिणाम है। कर्मचारी संगठनों ने इसका स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे कार्यक्षमता बढ़ेगी तथा सरकारी कामकाज में सुधार आएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार का यह कदम न सिर्फ उपनल कर्मियों के लिए राहत भरा है, बल्कि राज्य में ठेका/आउटसोर्सिंग प्रथा पर काम करने वाले हजारों परिवारों के लिए भी सकारात्मक संदेश है। आगे इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर सभी की नजर रहेगी।
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