भगवान महावीर का प्रसिद्ध संदेश जियो और जीने दो आज भी उतना ही सार्थक है जितना उनके समय में था। यह विचार बताता है कि प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक राष्ट्र को शांति, स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। यदि विश्व समुदाय इस सिद्धांत को अपनाए, तो संघर्ष की जगह सहयोग और मानवीय सह-अस्तित्व का वातावरण बन सकता है।
अतः, यदि मानव समाज महावीर स्वामी के इन सिद्धांतों अहिंसा, अनेकांतवाद, अपरिग्रह और सत्य को अपने जीवन में अपनाए, तोआज विश्व युद्ध की स्थिति को टालकर एक शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और संतुलित विश्व और समाज का निर्माण संभव है।
महावीर जन्मकल्याणक का यह पावन अवसर हमें यह स्मरण कराता है कि उनके संदेश को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे अपने जीवन और आचरण में भी उतारा जाए। यदि व्यक्ति, और समाज राष्ट्र अहिंसा, सहिष्णुता और करुणा के मार्ग पर चलें, तो निश्चित ही एक प्रेम और विश्वास का वातावरण सृजन किया जा सकता है । इस प्रकार भगवान महावीर का संदेश किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए एक सार्वभौमिक मार्गदर्शन है। आज के अशांत विश्व में उनके विचार हमें यह विश्वास दिलाते हैं कि शांति, करुणा और सह-अस्तित्व के मार्ग पर चलकर ही मानव सभ्यता का भविष्य सुरक्षित हो सकता है.
लेखक डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*