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उत्तराखंड का बजट 2026-27: केंद्र पर भारी निर्भरता, अपना राजस्व सिर्फ 45%, कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है – विकास के सपने vs वित्तीय स्थिरता का सवाल

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने फरवरी 2026 में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया, जिसमें कुल व्यय ₹1,11,703 करोड़ का लक्ष्य रखा गया है। यह पिछले साल से करीब 10% ज्यादा है। लेकिन बजट के आंकड़ों को गौर से देखें तो सच्चाई सामने आती है – राज्य की अपनी कमाई सिर्फ कुल राजस्व प्राप्तियों का लगभग 45% है, बाकी 55% केंद्र की सहायता पर टिका हुआ है। उधार (लोन) और कर्ज बढ़ाने से ही पूंजीगत खर्च और घाटा पूरा किया जा रहा है। राजस्व अधिशेष तो है, लेकिन वित्तीय स्थिति संतुलित दिखते हुए भी चिंता का विषय बनी हुई है। आइए, इस बजट का विस्तार से विश्लेषण करें – फायदे, नुकसान, राजस्व स्रोतों का अनुपात और राज्य की आर्थिक स्थिति।

राजस्व प्राप्तियों का ब्रेकडाउन: अपना राजस्व कम, केंद्र की कृपा ज्यादा
बजट दस्तावेजों और उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2026-27 में राजस्व प्राप्तियां ₹67,526 करोड़ अनुमानित हैं (पिछले साल के रिवाइज्ड अनुमान से थोड़ी ज्यादा)। इसमें राज्य की अपनी टैक्स आय (स्टेट जीएसटी, एक्साइज, स्टांप ड्यूटी, वाहन कर आदि) और नॉन-टैक्स आय (ब्याज, फीस, खनन आदि) मिलाकर कुल स्वयं का राजस्व लगभग 45% (करीब ₹30,000-32,000 करोड़) है। बाकी 55% केंद्र से – इसमें केंद्र सरकार के टैक्स में राज्य का हिस्सा (लगभग 25%) और अनुदान/ग्रांट्स (29-30%) शामिल हैं।

पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के विस्तृत आंकड़ों (PRS विश्लेषण) से पैटर्न साफ है: कुल राजस्व ₹62,541 करोड़ में अपना टैक्स ₹24,015 करोड़ + नॉन-टैक्स ₹4,395 करोड़ = 45%। केंद्र का शेयर ₹15,903 करोड़ (25%) + ग्रांट्स ₹18,227 करोड़ (29%) = 55%। 2026-27 में भी यही ट्रेंड जारी है। टैक्स रेवेन्यू कुल ₹43,327 करोड़ (अपना टैक्स + केंद्र शेयर) और नॉन-टैक्स ₹24,198 करोड़ में ग्रांट्स का बड़ा हिस्सा है।

कितना लोन? कितनी केंद्र सहायता?
वित्तीय घाटा (Fiscal Deficit) ₹12,580 करोड़ अनुमानित है, जो GSDP का 3% से कम रखा गया है (FRBM नियमों के मुताबिक ठीक)। यह घाटा मुख्य रूप से उधार (borrowings) से पूरा होगा – आंतरिक ऋण और केंद्र से लोन। कुल पूंजीगत प्राप्तियां ₹42,617 करोड़ में लोन का बड़ा हिस्सा शामिल है। राज्य का कुल कर्ज पहले से ही ₹21,000 करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है। पिछले पैटर्न से देखें तो उधार कुल प्राप्तियों का 20-25% हिस्सा बनता है। केंद्र की सहायता (टैक्स शेयर + ग्रांट्स) बिना राज्य की विकास योजनाएं ठप हो जाएंगी।

स्वयं के राजस्व के अनुपात में खर्च और आर्थिक स्थिति का विश्लेषण
राज्य की अपनी कमाई (₹30,000 करोड़ के आसपास) के मुकाबले कुल खर्च (₹1,11,703 करोड़) कई गुना ज्यादा है। राजस्व खर्च ₹64,989 करोड़ और पूंजीगत खर्च ₹46,714 करोड़। मतलब, अपना राजस्व सिर्फ दैनिक खर्च (वेतन, पेंशन, सब्सिडी) के लिए भी काफी नहीं। बाकी केंद्र और कर्ज से चल रहा है।

GSDP (2025-26 में ₹4.29 लाख करोड़, 2026-27 में अनुमानित 13% ग्रोथ के साथ और बढ़ा) के हिसाब से अपना टैक्स रेवेन्यू सिर्फ 5.6% है – जो राष्ट्रीय औसत से कम है। पहाड़ी राज्य होने के कारण उद्योग, कृषि और सेवाओं में सीमित स्कोप। जीएसटी के बाद इंटरस्टेट बिक्री पर राजस्व का नुकसान भी हुआ। नतीजा: राजस्व अधिशेष ₹2,536 करोड़ (0.6% GSDP) तो दिखता है, लेकिन फिस्कल डेफिसिट और बढ़ता कर्ज (28-29% GSDP तक पहुंच सकता है) भविष्य में ब्याज बोझ बढ़ाएगा। आर्थिक स्थिति मध्यम कही जा सकती है – विकास दर अच्छी (7.6% रियल टर्म्स में), लेकिन आत्मनिर्भरता की कमी। अगर केंद्र की ग्रांट्स कम हुईं या जीएसटी कलेक्शन प्रभावित हुआ तो संकट गहरा सकता है।

फायदे: विकास की रफ्तार, जनकल्याण पर फोकस
सरकार ने बजट को ‘GYAN’ मॉडल (गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी) पर आधारित बनाया है। बड़े फायदे:

  • इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़कें: PWD को ₹2,502 करोड़, PMGSY के तहत ₹1,050 करोड़। 220 किमी नई सड़कें, 1,500 किमी सुधार – पर्यटन और कनेक्टिविटी बढ़ेगी।
  • कुंभ 2027: ₹1,027 करोड़ – हरिद्वार-ऋषिकेश में गंगा कॉरिडोर, भीड़ प्रबंधन, टूरिज्म बूस्ट।
  • कृषि और पर्यटन: मिशन एप्पल, ट्राउट फिशिंग, ऑर्गेनिक फार्मिंग, मिलेट, नंदा देवी राज जात यात्रा। महिलाओं और युवाओं के लिए सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट स्कीम्स।
  • शिक्षा-स्वास्थ्य: ₹11,871 करोड़ शिक्षा पर, स्किल डेवलपमेंट ₹586 करोड़। स्वास्थ्य इंफ्रा में बढ़ोतरी, दूरदराज जिलों पर फोकस।
  • महिलाओं और आपदा प्रबंधन: जेंडर बजट ₹19,692 करोड़, क्लाइमेट रेजिलिएंट प्रोजेक्ट्स।

ये योजनाएं रोजगार बढ़ाएंगी, माइग्रेशन रोकेंगी और पर्यटन से राजस्व बढ़ेगा। पहाड़ी इलाकों में बिजली, पानी और सड़कें बेहतर होंगी।

नुकसान: निर्भरता, कर्ज और संरचनात्मक कमजोरियां

  • केंद्र पर अत्यधिक निर्भरता: 55% राजस्व केंद्र से। स्पेशल कैटेगरी स्टेट होने के बावजूद, अपना टैक्स-टू-GSDP रेशियो सिर्फ 5.6%। पहाड़ी भूगोल, कम उद्योग और खपत के कारण राजस्व जेनरेशन कमजोर।
  • कर्ज बढ़ने का खतरा: फिस्कल डेफिसिट ₹12,580 करोड़ + पिछले कर्ज का ब्याज। अगर ग्रोथ धीमी हुई तो डेब्ट ट्रैप। CAG रिपोर्ट्स में भी लोकल बॉडीज और डिजास्टर ग्रांट्स में कमी की शिकायतें रही हैं।
  • खर्च का असंतुलन: अपना राजस्व कम, लेकिन वेतन-पेंशन और सब्सिडी पर भारी खर्च। पूंजीगत खर्च उधार से, जो लंबे समय में टिकाऊ नहीं।
  • अन्य चुनौतियां: जीएसटी से पहले के नुकसान अभी भी असर कर रहे। खनन और पर्यावरण प्रतिबंध से नॉन-टैक्स आय सीमित।

समग्र फिस्कल स्थिति: संतुलित लेकिन संवेदनशील
राजस्व अधिशेष और फिस्कल डेफिसिट कंट्रोल में है, जो अच्छी बात है। लेकिन स्वयं के राजस्व के मुकाबले खर्च का अनुपात 3-4 गुना ज्यादा बताता है कि राज्य अभी ‘केंद्र की सहायता पर चलने वाला’ मॉडल है। GSDP ग्रोथ 13% (करंट प्राइस) अच्छी है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय और रोजगार में सुधार की जरूरत। अगर वेंचर कैपिटल फंड, पावर सेक्टर रिफॉर्म और स्टार्टअप्स पर फोकस कामयाब हुआ तो आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। वरना, कर्ज और केंद्र पर निर्भरता बढ़ती रहेगी।

विश्लेषकों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए स्पेशल पैकेज जारी रखना जरूरी है, लेकिन राज्य को भी अपना टैक्स बेस मजबूत करना होगा – डिजिटल कलेक्शन, पर्यटन टैक्स, हर्बल इंडस्ट्री पर जोर देकर।

** विकास की उम्मीदें vs वास्तविकता**
यह बजट विकासपरक है – सड़कें, कुंभ, कृषि, युवा स्कीम्स से जनता को फायदा होगा। लेकिन आर्थिक रूप से राज्य अभी ‘कर्ज और केंद्र पर टिका’ है। अगर 2026-27 में राजस्व लक्ष्य हासिल हुए और कर्ज नियंत्रित रहा तो अच्छा, नहीं तो अगले बजट में कठिन फैसले आ सकते हैं।
उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के लिए स्वयं का राजस्व बढ़ाना ही असली चुनौती है। सरकार का प्रयास सराहनीय है, लेकिन नतीजे समय बताएगा।

(बजट दस्तावेज, PRS, CAG और सरकारी आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण। आंकड़े अनुमानित, इंटरनेट डाटा और पैटर्न-आधारित हैं।)

By The Common Man

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