
तेहरान/यरुशलम/वाशिंगटन, 20 मार्च 2026 – अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए युद्ध (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी) अब अपने तीसरे सप्ताह में है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई इस जंग में अमेरिका-इज़राइल ने ईरान के 7,000+ लक्ष्यों पर हमले किए हैं, जिसमें ईरान की नौसेना “खत्म” हो चुकी है (पेंटागन के अनुसार 120+ जहाज नष्ट)। ईरान ने जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमलों से इज़राइल पर हमला जारी रखा है, जिसमें हैफा तेल रिफाइनरी और अन्य स्थानों पर क्लस्टर म्यूनिशन का उपयोग रिपोर्ट हुआ है।
प्रमुख घटनाक्रम (19-20 मार्च तक)
- अमेरिका-इज़राइल के हमले: दक्षिण पार्स गैस फील्ड, असलुयेह प्रोसेसिंग हब और तेहरान में IRGC नौसेना मुख्यालय पर हमले। ईरान की गैस प्रोसेसिंग क्षमता में 20% नुकसान, बिजली उत्पादन प्रभावित। IDF ने IRGC और अन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसमें खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब और अन्य उच्च अधिकारी मारे गए।
- ईरान की जवाबी कार्रवाई: इज़राइल पर कई मिसाइल बैराज, जिसमें सेंट्रल इज़राइल में क्लस्टर म्यूनिशन से नुकसान। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग को बाधित करने की कोशिश की, लेकिन अमेरिका-इज़राइल ने इसे रोकने के लिए हमले तेज किए।
- क्षेत्रीय प्रभाव: हिजबुल्लाह और हूती ग्रुप्स ने हमले किए, लेकिन हथियारों की कमी से सीमित। खाड़ी देशों (सऊदी, UAE, कतर) में ईरानी हमलों से विस्फोट रिपोर्ट। कुल मौतें 2,200+ (मध्य पूर्व में), जिसमें ईरान में 1,400-3,000+ और इज़राइल में दर्जनों।
- अंत का कोई स्पष्ट संकेत नहीं: ट्रंप ने कहा “युद्ध जल्द खत्म होगा”, लेकिन नेतन्याहू ने “ग्राउंड कंपोनेंट” की जरूरत बताई। युद्ध क्षेत्रीय संकट बन चुका है, तेल कीमतें आसमान छू रही हैं।
अन्य राष्ट्रों की प्रतिक्रियाएं
वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रियाएं विभाजित हैं – अधिकांश देश युद्धविराम और कूटनीति की मांग कर रहे हैं, लेकिन कुछ अमेरिका-इज़राइल का समर्थन कर रहे हैं:
- संयुक्त राष्ट्र: महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने “सैन्य वृद्धि” की निंदा की और तत्काल युद्धविराम की अपील की। सुरक्षा परिषद में आपात बैठक हुई, जहां रूस-चीन ने हमलों को “अनधिकृत” बताया।
- रूस: विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका-इज़राइल को “अनुचित और उकसावे वाली आक्रामकता” बताया, क्षेत्र को “मानवीय-आर्थिक आपदा” की ओर धकेलने का आरोप लगाया। प्रत्यक्ष सैन्य मदद नहीं दी।
- चीन: हमलों को “ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन” बताया, युद्धविराम और बातचीत की मांग की। UN में बैठक की मांग की, लेकिन कोई सैन्य समर्थन नहीं।
- यूरोपीय संघ: “अधिकतम संयम” और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपील। Ursula von der Leyen ने संघर्ष को “बहुत चिंताजनक” बताया।
- फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन (E3): ईरान के क्षेत्रीय हमलों की निंदा की, लेकिन अमेरिका-इज़राइल के हमलों पर चुप्पी। क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर।
- स्पेन: प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने अमेरिका-इज़राइल के “एकतरफा हमलों” की निंदा की, “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताया।
- तुर्की: राष्ट्रपति रेजेप तैय्यिप एर्दोगन ने दोनों पक्षों की निंदा की, खामेनेई की मौत पर शोक जताया और हमलों को “अवैध” बताया। कूटनीतिक मध्यस्थता की पेशकश।
- खाड़ी देश (सऊदी, UAE, कतर): ईरान के हमलों की कड़ी निंदा, “स्पष्ट आक्रामकता” बताया। ओमान ने अमेरिका को “युद्ध में गहराई से न फंसने” की चेतावनी दी।
- कनाडा और ऑस्ट्रेलिया: अमेरिका के हमलों का खुला समर्थन, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खतरा बताया।
- प्रतिरोध अक्ष (हिजबुल्लाह, हूती): ईरान का समर्थन, हमलों को “बड़े इज़राइल” की साजिश बताया।
युद्ध अब क्षेत्रीय संकट बन चुका है, जिसमें कोई भी प्रमुख देश (रूस-चीन सहित) ईरान को प्रत्यक्ष सैन्य मदद नहीं दे रहा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है, तेल संकट गहरा रहा है।