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उत्तराखंड में जुआ और सट्टेबाजी पर कड़ा प्रहार: कैबिनेट ने मंजूर किया ‘सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक 2026’, अब 5 साल तक जेल और 10 लाख जुर्माना संभव

देहरादून, 7 मार्च 2026: उत्तराखंड सरकार ने जुआ और सट्टेबाजी जैसी सामाजिक बुराइयों पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक 2026’ (Uttarakhand Public Gambling Prevention Bill 2026) को मंजूरी दे दी गई। यह विधेयक ब्रिटिश काल के पुराने ‘पब्लिक गैंबलिंग एक्ट 1867’ की जगह लेगा और राज्य में जुआ, सट्टेबाजी, कॉमन गैंबलिंग हाउस चलाने और इससे जुड़ी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान करेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुपालन में लाया गया यह बिल जल्द ही विधानसभा में पेश किया जाएगा।यह विधेयक राज्य में बढ़ती जुआ-सट्टेबाजी की समस्या को देखते हुए तैयार किया गया है, जो युवाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से बर्बाद कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पुराना कानून अपर्याप्त था, इसलिए नए प्रावधानों से पुलिस को मजबूत अधिकार मिलेंगे। आइए विस्तार से समझते हैं पुराने प्रावधान, नए बदलाव, क्या प्रतिबंधित है और उत्सवों जैसे दिवाली में घरेलू जुआ की स्थिति।

पुराने प्रावधान क्या थे? (Earlier Provisions under Public Gambling Act 1867)

1867 का पब्लिक गैंबलिंग एक्ट ब्रिटिश काल का कानून था, जो मुख्य रूप से सार्वजनिक जुआ और कॉमन गैंबलिंग हाउस (सार्वजनिक जुआघर) पर रोक लगाता था। यह कानून कई राज्यों, включая उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश का हिस्सा), में लागू था। मुख्य प्रावधान इस प्रकार थे:-

*जुआघर चलाना या संचालन: कोई व्यक्ति अगर कॉमन गैंबलिंग हाउस का मालिक, संचालक या प्रबंधक पाया जाता, तो उसे 200 रुपये जुर्माना या 3 महीने तक की जेल हो सकती थी।

*जुआघर में जाना या जुआ खेलना: जुआघर में पकड़े जाने पर 100 रुपये जुर्माना या 1 महीने की जेल का प्रावधान था।

*परिभाषा और अपवाद: कानून में ‘जुआ’ की स्पष्ट परिभाषा नहीं थी, लेकिन यह ‘चांस के खेल’ (games of chance) पर लागू होता था। ‘स्किल के खेल’ (games of skill) जैसे रमी (कुछ मामलों में) या हॉर्स रेसिंग को अपवाद माना जाता था। लॉटरी और कुछ सरकारी अनुमति वाले खेल भी बाहर थे।

*प्रवर्तन: पुलिस को जुआघर में छापा मारने और गिरफ्तारी का अधिकार था, लेकिन जुर्माना बहुत कम था, जो आज के समय में अप्रभावी साबित हो रहा था। जानवरों या पक्षियों की लड़ाई पर सट्टेबाजी पर भी 50 रुपये जुर्माना या 1 महीने जेल थी।

*सीमाएं: कानून पुराना होने से ऑनलाइन जुआ या आधुनिक सट्टेबाजी पर स्पष्ट प्रावधान नहीं थे। निजी घरों में छोटे स्तर का जुआ अगर ‘कॉमन गैंबलिंग हाउस’ नहीं माना जाता, तो अक्सर छूट जाता था।यह कानून सामाजिक बुराई को रोकने में कमजोर साबित हुआ, क्योंकि सजा हल्की थी और प्रवर्तन में कमी थी।

नए प्रावधान क्या हैं? (New Provisions in the Bill)

नया विधेयक पुराने कानून की कमियों को दूर करते हुए सख्ती बढ़ाता है। मुख्य नए प्रावधान:-

*सजा में बढ़ोतरी: जुआ खेलने या खिलाने में शामिल होने पर न्यूनतम 3 महीने से अधिकतम 5 साल तक की जेल और 5,000 से 10 लाख रुपये तक जुर्माना (या दोनों) का प्रावधान।

*अलग-अलग श्रेणियां: गतिविधि के आधार पर सजा अलग-अलग। – सार्वजनिक स्थान (सड़क, गली) पर जुआ: 3 महीने जेल या 5,000 रुपये जुर्माना (या दोनों)।

*घर में जुआ अड्डा चलाना: 2 साल जेल या 10,000 रुपये जुर्माना (या दोनों)। – सिंडिकेट या संगठित जुआ (बड़ी सट्टेबाजी गिरोह): 5 साल तक जेल और 10 लाख तक जुर्माना।

*ऑनलाइन और सट्टेबाजी शामिल: विधेयक में ऑनलाइन जुआ, सट्टेबाजी और इससे जुड़ी incidental गतिविधियों (जैसे विज्ञापन, फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन) पर रोक। यह राष्ट्रीय स्तर के ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025’ से प्रेरित लगता है, जहां रियल मनी गेमिंग पर बैन है।

*प्रवर्तन मजबूत: पुलिस को बिना वारंट छापेमारी, गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त करने के अधिक अधिकार। अपराध गैर-जमानती होंगे।

*उद्देश्य: युवाओं को व्यसन से बचाना, आर्थिक शोषण रोकना और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत यह बिल लाया गया है।

अब क्या-क्या प्रतिबंधित है? (What is Banned Now)

विधेयक के तहत निम्नलिखित गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित हैं:

*सार्वजनिक जुआ (public gambling)।

*कॉमन गैंबलिंग हाउस (जुआघर) चलाना या संचालन।

*खेलों पर सट्टेबाजी (betting on games), चाहे ऑफलाइन हो या ऑनलाइन।

*जानवरों/पक्षियों की लड़ाई पर जुआ।

*ऑनलाइन मनी गेमिंग ऐप्स (जैसे रमी, पोकर, फैंटसी स्पोर्ट्स अगर रियल मनी शामिल हो)।

*इससे जुड़े विज्ञापन, प्रचार या फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन।

अपवाद: स्किल-बेस्ड गेम्स (बिना मनी स्टेक के), सरकारी लॉटरी, हॉर्स रेसिंग (कुछ मामलों में)। लेकिन अगर मनी शामिल हो, तो बैन।

क्या उत्सवी जुआ भी प्रतिबंधित है? (Is Celebration Gambling Also Banned?)

हां, विधेयक में उत्सवी या पारंपरिक जुआ (celebration gambling) पर स्पष्ट अपवाद नहीं दिया गया है। जुआ की कोई भी गतिविधि, चाहे त्योहार के नाम पर हो, प्रतिबंधित मानी जाएगी। पुराने कानून में भी ऐसा कोई अपवाद नहीं था, लेकिन प्रवर्तन कमजोर होने से त्योहारों में छोटा-मोटा जुआ चलता था। नए बिल में सख्ती से इसे रोका जाएगा, क्योंकि यह ‘चांस के खेल’ को कवर करता है। हालांकि, अगर यह बहुत छोटा स्तर का हो और शिकायत न हो, तो व्यावहारिक रूप से अनदेखा किया जा सकता है, लेकिन कानूनी रूप से जोखिम है।

क्या दिवाली में घरों में जुआ खेल सकते हैं? (Can People Gamble During Diwali in Homes?)

नहीं, कानूनी रूप से नहीं। विधेयक में घर में जुआ अड्डा चलाने पर 2 साल जेल या 10,000 जुर्माना का प्रावधान है। अगर दिवाली जैसे त्योहार में परिवार या दोस्तों के बीच छोटा-मोटा जुआ (जैसे ताश खेलना) हो और यह ‘कॉमन गैंबलिंग हाउस’ न बने (यानी नियमित न हो), तो पुलिस आमतौर पर हस्तक्षेप नहीं करती। लेकिन अगर शिकायत हो या बड़ा स्टेक हो, तो गिरफ्तारी संभव है। पुराने कानून में भी घरेलू जुआ अगर निजी हो, तो अक्सर छूट जाता था, लेकिन नया बिल इसे सख्ती से देखेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों में सांस्कृतिक परंपरा के नाम पर छोटा जुआ व्यावहारिक रूप से जारी रह सकता है, लेकिन कानूनन यह प्रतिबंधित है। नागरिकों को सलाह है कि ऐसी गतिविधियों से दूर रहें, क्योंकि सजा भारी है।

निष्कर्ष और प्रभाव

यह विधेयक उत्तराखंड को जुआ-मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “यह बिल युवाओं को व्यसन से बचाएगा और समाज को मजबूत करेगा।” हालांकि, आलोचक कहते हैं कि ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री पर असर पड़ेगा, जहां स्किल-बेस्ड गेम्स भी प्रभावित हो सकते हैं। कैबिनेट ने अन्य बिल भी पास किए, जैसे अल्पसंख्यक आयोग संशोधन और निजी विश्वविद्यालय स्थापना। विधेयक विधानसभा में पास होने के बाद लागू होगा। नागरिकों से अपील है कि जुआ से दूर रहें और कोई जानकारी हो तो पुलिस को सूचित करें।

By The Common Man

News and public affairs

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