
तेहरान, 1 मार्च 2026: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर ने पूरे मध्य पूर्व को हिला कर रख दिया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा संयुक्त रूप से किए गए बड़े पैमाने पर हमलों में खामेनेई की मौत हो गई। ईरानी राज्य मीडिया ने इसकी पुष्टि की है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइली अधिकारियों ने भी इसकी जानकारी दी। यह हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से किया गया बताया जा रहा है।
हमले का विवरण
हमले में तेहरान सहित ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य और सरकारी ठिकानों पर बमबारी की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई अपने कार्यालय में मौजूद थे जब हमला हुआ। इस ऑपरेशन में इज़राइल की वायुसेना ने प्रमुख भूमिका निभाई, जिसमें 30 से अधिक वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों की मौत हुई। ईरान ने दावा किया है कि एक लड़कियों के स्कूल पर भी हमला हुआ, जिसमें दर्जनों बच्चियां मारी गईं। ईरान ने इसे “क्रूर अपराध” करार दिया है।
अन्य राष्ट्रों पर हमले
यह हमला केवल ईरान तक सीमित नहीं रहा। ईरान समर्थित समूहों और अन्य राष्ट्रों पर भी प्रभाव पड़ा है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इज़राइल और अमेरिका ने ईरान के अलावा लेबनान, सीरिया और यमन में हिजबुल्लाह, हूती विद्रोहियों और अन्य प्रॉक्सी ठिकानों पर भी हमले किए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।
भाग लेने वाले राष्ट्र
अमेरिका: राष्ट्रपति ट्रंप ने हमले की पुष्टि की और कहा कि यह “रेजीम चेंज” का हिस्सा है। अमेरिकी सेना ने हवाई और मिसाइल हमलों में सहयोग किया।
इज़राइल: प्रधानमंत्री नेतन्याहू के नेतृत्व में इज़राइल ने मुख्य हमले किए। इज़राइली रक्षा मंत्री ने इसे “शेर की दहाड़” नाम दिया।
ईरान ने जवाबी हमलों में अपने सहयोगी समूहों (हिजबुल्लाह, हूती) को शामिल किया।
भारत और अन्य राष्ट्रों की प्रतिक्रिया
भारत: भारत ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता महत्वपूर्ण है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के रास्ते अपनाने की अपील की। भारत ने ईरान के साथ अपने मजबूत संबंधों का जिक्र करते हुए नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया।
रूस और चीन: दोनों देशों ने अमेरिका-इज़राइल हमलों की निंदा की और इसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताया। रूस ने ईरान को समर्थन देने का संकेत दिया।
फ्रांस: राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि इस संघर्ष के “गंभीर परिणाम” होंगे और अंतरराष्ट्रीय शांति को खतरा है।
संयुक्त राष्ट्र: सुरक्षा परिषद में आपात बैठक बुलाई गई है, जहां ईरान ने अमेरिका-इज़राइल के खिलाफ प्रस्ताव लाने की कोशिश की।
क्षेत्रीय युद्ध का खतरा
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों ने अब पड़ोसी देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप्स पर लक्षित हमलों से लेबनान, सीरिया, यमन और इराक में स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। ईरान ने जवाबी हमलों में इन देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा गया।
लेबनान में हमले और हिजबुल्लाह की भूमिका
इज़राइल ने ईरान पर हमलों के साथ ही दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के कई ठिकानों पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अल-तुफ्फाह क्षेत्र, मारकाबा और अन्य इलाकों में इज़राइली ड्रोन और लड़ाकू विमानों ने हिजबुल्लाह की सैन्य सुविधाओं, हथियार डिपो और मिसाइल लॉन्च साइट्स पर बमबारी की। हिजबुल्लाह ने ईरान के प्रति एकजुटता जताई है और कहा है कि अमेरिका-इज़राइल की “आक्रामकता” का जवाब “बड़ा और निर्णायक” होगा। लेबनान सरकार ने हिजबुल्लाह को चेतावनी दी है कि देश को युद्ध में न घसीटें, लेकिन हिजबुल्लाह ने अभी तक बड़े पैमाने पर जवाबी हमला नहीं किया है। अमेरिका ने लेबनान को संदेश दिया है कि अगर लेबनानी धरती से कोई हमला नहीं हुआ तो इज़राइल आगे नहीं बढ़ेगा।
सीरिया में स्थिति
सीरिया में ईरानी मिसाइल हमलों के जवाब में इज़राइल ने कई ठिकानों पर हमले किए। ईरानी जवाबी मिसाइलों से सीरिया में कम से कम चार लोगों की मौत हुई है। इज़राइल ने दमिश्क के पास ईरानी प्रभाव वाले इलाकों पर स्ट्राइक की, जहां हिजबुल्लाह और ईरानी मिलिशिया मौजूद हैं। सीरिया में पहले से ही अस्थिरता है, और यह हमले वहां के शेष ईरानी प्रभाव को कमजोर कर रहे हैं।
यमन में हूती विद्रोहियों पर हमले
यमन में हूती विद्रोहियों ने ईरान के समर्थन में लाल सागर में जहाजों पर हमले फिर से शुरू करने की घोषणा की है। इज़राइल और अमेरिका ने हूतियों के ठिकानों, खासकर सना और अन्य क्षेत्रों में, हवाई हमले किए हैं। हूतियों के वरिष्ठ नेताओं की मौत की खबरें हैं, और वे इज़राइल तथा अमेरिकी जहाजों पर मिसाइल-ड्रोन हमले बढ़ा रहे हैं। हूतियों ने कहा है कि यह ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत का बदला है।
इराक में अमेरिकी ठिकानों पर हमले
इराक में कताइब हिजबुल्लाह जैसे ईरान समर्थित मिलिशिया ने अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और रॉकेट हमले किए हैं। अमेरिकी सेना ने इराक और सीरिया में ईरानी प्रभाव वाले ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की। इराकी कुर्दिस्तान क्षेत्र को भी खतरे की चेतावनी मिली है कि अगर अमेरिका-इज़राइल के हमलों में सहयोग किया तो हमले होंगे।
अन्य प्रभावित देश
ईरान के जवाबी हमलों में जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया गया। यूएई में एक नागरिक की मौत मिसाइल मलबे से हुई, जबकि दुबई में एक होटल प्रभावित हुआ। इन हमलों से खाड़ी देशों में हवाई यातायात ठप हो गया और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं और आगे का खतरा
भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील दोहराई है और क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर नजर रखी जा रही है। रूस और चीन ने हमलों की कड़ी निंदा की, जबकि यूरोपीय संघ ने “अधिकतम संयम” की मांग की। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हिजबुल्लाह या हूती बड़े पैमाने पर शामिल हुए तो पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध छिड़ सकता है। ईरान में नेतृत्व संकट गहरा रहा है, और अगले कुछ दिनों में और बड़े हमलों की आशंका है।
यह स्थिति घंटे-दर-घंटे बदल रही है, और दुनिया मध्य पूर्व के भविष्य पर नजरें गड़ाए हुए है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना मध्य पूर्व में बड़े युद्ध की शुरुआत हो सकती है। ईरान ने “सबसे विनाशकारी जवाबी कार्रवाई” की चेतावनी दी है, जबकि ट्रंप ने कहा है कि हमले “हफ्तों तक जारी रहेंगे”। ईरान में नेतृत्व संकट पैदा हो सकता है, क्योंकि खामेनेई का कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं है। क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है, तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान और आसपास के इलाकों से निकालने के आदेश दिए हैं।
यह स्थिति तेजी से बदल रही है, और दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर टिकी हुई हैं।