दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं—चीन और भारत—की जनसंख्या संरचना में तेज बदलाव हो रहा है। यह बदलाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, श्रम बाजार, विकास मॉडल और भविष्य की शक्ति संतुलन को गहराई से प्रभावित करेगा।
संयुक्त राष्ट्र और UNFPA की ताज़ा रिपोर्ट्स
World Population Prospects 2024 और State of World Population 2025 के अनुसार—
- चीन की जनसंख्या लगातार चौथे वर्ष घट रही है
- भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन चुका है
- भारत के पास अभी भी Demographic Dividend का अवसर है, लेकिन यह तेजी से सिमट रहा है
चीन में जनसंख्या संकट: गिरावट लगातार गहराती हुई
राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (NBS) द्वारा 19 जनवरी 2026 को जारी 2025 के आंकड़े गंभीर चेतावनी देते हैं:
चीन की जनसंख्या से जुड़े प्रमुख आंकड़े
- कुल जनसंख्या: 1.405 अरब (एक साल में 33.9 लाख की गिरावट)
- जन्म: 7.92 मिलियन (2024 से 17% कम)
- जन्म दर: 5.63 प्रति 1,000 (1949 के बाद सबसे कम)
- मृत्यु: 11.31 मिलियन (लगातार बढ़ोतरी)
- TFR: लगभग 1.0 (दुनिया के सबसे निचले स्तरों में)
👉 यह गिरावट 2022 से बिना रुके जारी है।
तीन-बच्चा नीति क्यों फेल हो रही है?
- एक-बच्चा नीति (1979–2015) का दीर्घकालिक प्रभाव
- बच्चों की परवरिश का अत्यधिक खर्च
- महिलाओं की शिक्षा और करियर प्राथमिकता
- आर्थिक अनिश्चितता
- युवाओं में “Lying Flat (Tangping)” सोच
चीन के सामने दीर्घकालिक खतरे
- श्रम शक्ति में तेज गिरावट – मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन पर असर
- 60+ आबादी 23% से अधिक – पेंशन और हेल्थ सिस्टम पर दबाव
- “Grow Old Before Rich” का खतरा
- ग्लोबल सप्लाई चेन और निवेश पर नकारात्मक प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन में जन्म दर 1738 के स्तर तक गिर चुकी है—जब आबादी सिर्फ 150 मिलियन थी।
भारत: युवा आबादी का फायदा, लेकिन समय सीमित
UNFPA और UN डेटा के अनुसार भारत की स्थिति फिलहाल बेहतर है, लेकिन चेतावनी भी साफ है।
भारत की जनसंख्या प्रोफाइल (2025)
- कुल जनसंख्या: 1.463–1.464 अरब (विश्व में सबसे अधिक)
- TFR: 1.9 (रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे)
- कार्यशील आयु (15–64): 68–69%
- जन्म: ~23.1 मिलियन (दुनिया में सबसे ज्यादा)
भारत में क्षेत्रीय जनसंख्या असमानता
- दक्षिणी राज्य (केरल, तमिलनाडु): TFR 1.3–1.5
- उत्तरी राज्य (बिहार ~3.0, उत्तर प्रदेश ~2.6)
- UNFPA इसे “High–Low Fertility Duality” कहता है
भारत का Demographic Dividend: कितना और कब तक?
- पीक कार्यशील आबादी: 2026–2028
- Golden Period: 2025–2035
- कुल विंडो: लगभग 2045 तक
खतरे अगर तैयारी नहीं हुई
- स्किल गैप
- बेरोजगारी
- महिलाओं की कम श्रम भागीदारी
- ऑटोमेशन का दबाव
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं—अगर शिक्षा, स्किलिंग, रोजगार और स्वास्थ्य में निवेश नहीं हुआ, तो युवा आबादी डिविडेंड नहीं बल्कि टाइम बम बन सकती है।
वैश्विक जनसंख्या परिदृश्य: अब पीक के करीब
संयुक्त राष्ट्र World Population Prospects 2024 के अनुसार:
- वर्तमान वैश्विक जनसंख्या: ~8.25 अरब
- पीक: ~10.3 अरब (mid-2080s)
- 2100 तक: ~10.2 अरब (गिरावट शुरू)
- विकसित देश: एजिंग और गिरावट
- विकासशील देश: भारत, अफ्रीका में वृद्धि
- Global TFR: 2050 तक 2.1 से नीचे
निष्कर्ष: भारत के पास मौका है, चीन के सामने चुनौती
चीन की गिरती जनसंख्या उसकी अर्थव्यवस्था के लिए लंबे समय का जोखिम है।
भारत अभी युवा है, लेकिन 2025–2040 निर्णायक दौर है।
भारत के लिए स्पष्ट रोडमैप
✅ शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट
✅ बड़े पैमाने पर जॉब क्रिएशन
✅ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी
✅ हेल्थ और सोशल सिक्योरिटी
👉 तभी भारत का Demographic Advantage
“जनसंख्या बोझ” नहीं बल्कि “वैश्विक शक्ति” बनेगा।
