नई दिल्ली/बीजिंग, 21 जनवरी 2026 – दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं – चीन और भारत – की जनसंख्या में तेज बदलाव हो रहे हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था, श्रम बाजार और विकास मॉडल को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) और UNFPA की नवीनतम रिपोर्ट्स (World Population Prospects 2024 और State of World Population 2025) के अनुसार, चीन की जनसंख्या चौथे साल लगातार घट रही है, जबकि भारत दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बना हुआ है और अभी भी “डेमोग्राफिक डिविडेंड” का फायदा उठा सकता है – लेकिन यह खिड़की तेजी से बंद हो रही है।
चीन: जनसंख्या संकट गहराता हुआ
चीन की राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (NBS) ने 19 जनवरी 2026 को 2025 के आंकड़े जारी किए, जो चिंताजनक हैं:
- कुल जनसंख्या: 1.405 अरब (पिछले साल से 3.39 मिलियन की गिरावट)।
- जन्म: केवल 7.92 मिलियन बच्चे (2024 के 9.54 मिलियन से 17% कम)।
- जन्म दर: 5.63 प्रति 1,000 लोग – 1949 (कम्युनिस्ट क्रांति के बाद) से अब तक सबसे कम।
- मृत्यु: 11.31 मिलियन (पिछले साल से बढ़ी)।
- कुल प्रजनन दर (TFR): लगभग 1.0 के आसपास – दुनिया में सबसे निचले स्तरों में से एक।
यह गिरावट 2022 से लगातार जारी है। तीन-बच्चा नीति (2021 से लागू) के बावजूद कोई स्थायी सुधार नहीं हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि एक-बच्चा नीति (1979-2015) का लंबा असर, उच्च बच्चे पालने का खर्च, महिलाओं की शिक्षा/कैरियर प्राथमिकता, आर्थिक अनिश्चितता और “lying flat” (तांगपिंग) जैसी युवा सोच ने जन्म दर को दबा रखा है।
चीन के लिए गंभीर खतरा:
- श्रम शक्ति तेजी से घट रही – फैक्टरियां और इनोवेशन प्रभावित।
- बुजुर्ग आबादी (60+) बढ़कर 23% – पेंशन और हेल्थकेयर पर भारी बोझ।
- “grow old before rich” का खतरा – अर्थव्यवस्था धीमी होगी, ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित।
विशेषज्ञ (जैसे Yi Fuxian, University of Wisconsin) कहते हैं कि जन्म 1738 के स्तर पर पहुंच गए हैं, जब चीन की आबादी सिर्फ 150 मिलियन थी। नीतियां (सब्सिडी, मैरिज आसान करना) असर नहीं कर रही हैं।
भारत: युवा शक्ति अभी बरकरार, लेकिन समय कम
UNFPA की State of World Population 2025 रिपोर्ट और UN डेटा के अनुसार:
- कुल जनसंख्या (2025): 1.463-1.464 अरब (दुनिया में सबसे ज्यादा)।
- TFR: 1.9 (रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे) – NFHS-5 और SRS से भी यही ट्रेंड।
- कार्यशील उम्र (15-64): 68-69% – पीक के करीब।
- जन्म: अनुमानित 23.1 मिलियन (दुनिया में सबसे ज्यादा)।
क्षेत्रीय असमानता: केरल, तमिलनाडु जैसे राज्य TFR 1.3-1.5 पर, जबकि बिहार (~3.0), उत्तर प्रदेश (~2.6) ऊंचे। UNFPA इसे “high-low fertility duality” कहता है।
प्रोजेक्शन:
- पीक: 1.7 अरब के आसपास 2060s में (UN), या 1.8-1.9 अरब तक 2080 में (कुछ भारतीय विशेषज्ञ)।
- 2100 तक: 1.5-1.6 अरब के आसपास स्थिर या गिरावट।
डेमोग्राफिक डिविडेंड की स्थिति:
- विशेषज्ञों (Goldman Sachs, McKinsey, Data for India, ORF) का मत: कार्यशील आबादी का शेयर अगले 2-4 साल (2026-2028) में पीक, फिर गिरावट।
- “स्वीट स्पॉट”: 2025-2035 (Bery/McKinsey) – अधिकतम लाभ का समय।
- कुल विंडो: 20-33 साल (2045 तक) – लेकिन स्किल गैप, बेरोजगारी, महिलाओं की कम भागीदारी और ऑटोमेशन से खतरा।
- विशेषज्ञ चेतावनी: अगर शिक्षा, स्किलिंग, जॉब क्रिएशन और हेल्थ में निवेश नहीं हुआ तो “टाइम बम” बन सकता है (बेरोजगार युवा)।
वैश्विक परिदृश्य: पीक और गिरावट की ओर
UN World Population Prospects 2024 के अनुसार:
- वर्तमान विश्व जनसंख्या: ~8.23-8.25 अरब (2025-2026)।
- पीक: 10.3 अरब के आसपास mid-2080s में, फिर 10.2 अरब तक गिरावट (2100)।
- विकासशील देशों (अफ्रीका, भारत, पाकिस्तान) में अभी वृद्धि, विकसित (चीन, जापान, यूरोप) में गिरावट और एजिंग।
- ग्लोबल TFR: ~2.25, 2050 तक 2.1 से नीचे।
चीन की गिरती जनसंख्या एक “टाइम बम” है जो उसकी अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक प्रभावित करेगी, जबकि भारत अभी युवा बहुल है और “डेमोग्राफिक एडवांटेज” का फायदा उठा सकता है – लेकिन 2025-2040 क्रिटिकल पीरियड है। विशेषज्ञों का सुझाव: भारत को स्किल, शिक्षा, रोजगार और जेंडर इक्वालिटी पर फोकस करना होगा ताकि यह अवसर “डिविडेंड” बने, न कि चुनौती।
यह रिपोर्ट UN, UNFPA, NBS, और विभिन्न विशेषज्ञों (2025-2026) के नवीनतम आंकड़ों पर आधारित है।
