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वैश्विक हथियारों की दौड़ में भारत-रूस की अटूट साझेदारी: S-400, ब्रह्मोस और नई चुनौतियाँ

देवभूमि न्यूज़ स्पेशल – 21 जनवरी 2026,By B P Singh- वैश्विक हथियारों की दौड़ में भारत-रूस की अटूट साझेदारी: S-400, ब्रह्मोस और नई चुनौतियाँदुनिया तेजी से एक नई हथियारों की दौड़ (Global Arms Race) में उतर चुकी है। न्यू START संधि की समाप्ति, हाइपरसोनिक मिसाइलों का विकास, AI-पावर्ड ऑटोनॉमस हथियार और न्यूक्लियर आर्म्स मॉडर्नाइजेशन के बीच भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी एक मजबूत स्तंभ की तरह खड़ी है। S-400 ट्रायम्फ और ब्रह्मोस मिसाइल इस साझेदारी के सबसे चमकदार प्रतीक बने हुए हैं, जो भारत को वैश्विक स्तर पर अभेद्य सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।

1. न्यू START संधि की समाप्ति: न्यूक्लियर खतरे की नई शुरुआत

5 फरवरी 2026 को अमेरिका-रूस के बीच आखिरी न्यूक्लियर आर्म्स कंट्रोल संधि समाप्त हो रही है। ट्रंप प्रशासन ने रूस के विस्तार प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। इसके बाद पहली बार दशकों में कोई कानूनी सीमा नहीं रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका, रूस और चीन के बीच त्रिपक्षीय न्यूक्लियर रेस शुरू हो सकती है, जो वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

2. हाइपरसोनिक हथियारों की तेज़ दौड़

  • रूस: Zircon (Mach 8+), Avangard (Mach 20+), Oreshnik – 2026 में बड़े पैमाने पर उत्पादन।
  • चीन: DF-17, Xingkong-2 – पहले से ऑपरेशनल।
  • अमेरिका: Dark Eagle, CPS, ARRW – 2026 में प्रशांत में बड़े टेस्ट।
  • भारत: ब्रह्मोस-II (Mach 7+) पर रूस के साथ काम जारी, स्वदेशी स्क्रैमजेट टेस्ट सफल।

लॉन्च का मंजर: हाइपरसोनिक मिसाइल दागते ही प्लाज्मा ट्रेल, आग का गोला और बिजली जैसी चमक – दुश्मन के लिए इंटरसेप्ट लगभग असंभव।

3. AI और ऑटोनॉमस हथियार: “किलर रोबोट्स” का युग

चीन, अमेरिका और रूस AI से ड्रोन स्वार्म्स, ऑटोनॉमस निर्णय और साइबर युद्ध को मजबूत कर रहे हैं। UN ने 2026 तक LAWS (Lethal Autonomous Weapons Systems) पर बैन की मांग की है, लेकिन प्रगति धीमी है। भारत भी डिफेंस AI और स्वदेशी ऑटोनॉमस ड्रोन पर तेजी से काम कर रहा है।

4. भारत-रूस संबंध: रॉक-सॉलिड और बढ़ते हुए

अमेरिकी टैरिफ और CAATSA दबाव के बावजूद दोनों देशों का सहयोग अटूट है:

  • रूसी तेल आयात जारी – ऊर्जा सुरक्षा प्राथमिकता।
  • परमाणु ऊर्जा में नए प्रोजेक्ट्स (SMR, फ्लोटिंग रिएक्टर)।
  • BRICS 2026 में भारत की मेजबानी – रूस का पूरा समर्थन।

5. S-400 ट्रायम्फ (सुदर्शन चक्र): भारत का अभेद्य कवच

5 स्क्वाड्रन का सौदा:

  • 3 स्क्वाड्रन पूरी तरह ऑपरेशनल (पाकिस्तान-चीन सीमाओं पर)।
  • चौथा स्क्वाड्रन: मई 2026 तक डिलीवरी (ऑपरेशन सिंदूर वर्षगांठ पर)।
  • पांचवां: 2026 अंत या 2027 शुरुआत।

Operation Sindoor में S-400 ने 300+ किमी दूर दुश्मन के हाई-वैल्यू टारगेट को नेस्तनाबूद किया। 400 किमी रेंज, 600 किमी ट्रैकिंग, 36-80 टारगेट एक साथ – यह वाकई “अजेय कवच” है।

यहाँ S-400 की तैनाती और लॉन्च की तस्वीरें:

ब्रह्मोस: दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल

Mach 3 की रफ्तार, 290-800 किमी रेंज, मल्टी-प्लेटफॉर्म:

  • समुद्र से लॉन्च: युद्धपोत से निकलते ही आग का गोला, लहरों को चीरते हुए सफेद-नारंगी तीर।
  • हवा से लॉन्च: Su-30MKI से निकलकर लंबा आग का ट्रेल, आसमान चीरती हुई।
  • जमीन से सैल्वो: ट्रक लॉन्चर से एक साथ कई मिसाइलें – पूरा इलाका काँप उठता है।

ब्रह्मोस-NG (2026-27 टेस्टिंग): हल्की, तेज़, Tejas पर फिट।
फिलीपींस को एक्सपोर्ट सफल, इंडोनेशिया-वियतनाम डील अंतिम चरण में।

वैश्विक हथियारों की दौड़ में अनिश्चितता और खतरे बढ़ रहे हैं, लेकिन भारत-रूस की साझेदारी S-400 और ब्रह्मोस के माध्यम से भारत को मजबूत डिटरेंट दे रही है। यह न सिर्फ सीमा सुरक्षा, बल्कि इंडो-पैसिफिक में शांति और संतुलन का आधार भी है।

By PAL

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