उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल के विस्तार और फेरबदल को लेकर चल रही प्रतीक्षा अब जल्द समाप्त हो सकती है। संकेत हैं कि मकर संक्रांति के बाद, जनवरी के दूसरे पखवाड़े में भाजपा हाईकमान इस पर अंतिम निर्णय ले सकता है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो बजट सत्र से पहले मंत्रिमंडल में नए चेहरों की एंट्री संभव है और कई विधायकों की किस्मत खुल सकती है।
वर्तमान में धामी मंत्रिमंडल में कुल 12 पदों में से पांच पद रिक्त हैं। मुख्यमंत्री सहित अभी मंत्रिमंडल में छह मंत्री कार्यरत हैं। इनमें से एक पद मार्च 2024 में कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद खाली हुआ था। इससे पहले, वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के समय भी तीन मंत्री पद रिक्त थे। अप्रैल 2023 में कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास के निधन के बाद रिक्त पदों की संख्या और बढ़ गई। इन रिक्त विभागों का अतिरिक्त प्रभार फिलहाल मुख्यमंत्री के पास है, जिनके पास 35 से अधिक विभागों की जिम्मेदारी है।
मंत्रिमंडल का यह संभावित विस्तार और फेरबदल वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीतिक तैयारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा नेतृत्व का जोर प्रो-इनकंबेंसी को मजबूत करने पर है, ताकि विपक्ष द्वारा एंटी-इनकंबेंसी को उभारने की कोशिशों को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
चुनावों में अब ज्यादा समय शेष नहीं है। इसी क्रम में भाजपा हाईकमान ने संगठनात्मक स्तर पर प्रदेश से लेकर जिला इकाइयों तक बदलाव को प्राथमिकता दी है। अधिकांश संगठनात्मक ढांचे का गठन हो चुका है और अब केवल प्रदेश कार्यसमिति का गठन शेष है।
उधर, केंद्र सरकार का बजट सत्र एक फरवरी से शुरू होने वाला है, जिसके बाद प्रदेश सरकार भी अपने बजट सत्र की तैयारियों में जुटेगी। माना जा रहा है कि उत्तराखंड का बजट सत्र फरवरी के दूसरे पखवाड़े या मार्च में आयोजित हो सकता है। ऐसे में पार्टी रणनीतिकार चाहते हैं कि बजट सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि जनवरी के दूसरे पखवाड़े में यह विस्तार नहीं हुआ, तो फिर इसमें देरी हो सकती है। इसी कारण भाजपा नेतृत्व इस समय-सीमा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
