देवभूमि उत्तराखंड की नदियों को छलनी कर रहे अवैध खनन माफिया की हिम्मत अब इतनी बढ़ गई है कि वे सरकारी अधिकारियों को खुलेआम धमकी देने लगे हैं। देहरादून जिले के डोईवाला क्षेत्र में तैनात खनन पर्यवेक्षक पंकज चंद , जो अपनी निष्कलंक समर्पण भावना और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं, को अवैध खनन रोकने की कोशिश करने पर माफिया से फोन पर सीधी धमकी मिली – “सिस्टम में रहो”।
यह धमकी कोई साधारण बात नहीं है। इसका मतलब साफ है – प्रभावशाली लोगों या माफिया के साथ मिलकर चलो, वरना अंजाम भुगतना पड़ेगा। पंकज चंद ने अपनी ड्यूटी निभाते हुए सोंग, सुसवा और जाखन नदियों में चल रहे अवैध रेत-बजरी उत्खनन पर कार्रवाई की कोशिश की, जिसके बाद यह धमकी मिली।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि खतरे की इस घड़ी में अधिकारी ने तुरंत 112 इमरजेंसी नंबर पर कॉल किया, लेकिन पुलिस कंट्रोल रूम से कोई त्वरित मदद या रिस्पॉन्स नहीं मिला। यह एक गंभीर सवाल उठाता है – जब एक ईमानदार अधिकारी राज्य की संपदा और पर्यावरण की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी निभा रहा हो, तब उसे तत्काल सुरक्षा क्यों नहीं प्रदान की गई? यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि ईमानदार कर्मचारियों के मनोबल पर गहरा आघात भी।
श्री पंकज चंद ने अपनी शिकायत में पुरानी घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2003 में भी डोईवाला में अवैध खनन रोकने गए एक सहायक खनन अधिकारी पर गोली चलाई गई थी। यह उदाहरण माफिया की लंबे समय से चली आ रही दबंगई को रेखांकित करता है।
डोईवाला क्षेत्र उत्तराखंड में अवैध खनन का प्रमुख हॉटस्पॉट है। यहां नदियों से अवैध उत्खनन के कारण पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है – नदियां छलनी हो रही हैं, बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है और कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। NGT और हाईकोर्ट ने कई बार इस पर सख्ती के आदेश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर माफिया बेखौफ घूम रहा है।
यह मामला एक बार फिर देवभूमि में अवैध खनन माफिया और कथित नेक्सस की पोल खोलता है। श्री पंकज चंद जैसे अधिकारी अकेले लड़ रहे हैं, जबकि उन्हें पूर्ण सुरक्षा और समर्थन मिलना चाहिए। प्रशासन से उम्मीद है कि इस मामले में तुरंत FIR दर्ज हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और ईमानदार अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
