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डीडीहाट की अनदेखी पिछड़ेपन के चलते एसटी या सेंट्रल ओबीसी स्टेटस की मांग

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित डीडीहाट क्षेत्र, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता है, आज भी दूरस्थता और पिछड़ेपन की मार झेल रहा है। हिमालय की गोद में बसा यह इलाका भौगोलिक चुनौतियों, बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास की कमी के कारण लगातार पिछड़ता जा रहा है। यहां के निवासी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए बड़े पैमाने पर पलायन कर रहे हैं, जिससे कृषि और अन्य क्षेत्रों का विकास ठप हो गया है। स्थानीय युवा भानु प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील की है कि प्रस्तावित डीडीहाट जिले के शेष बचे लोगों को तुरंत अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिया जाए, ताकि उनकी अनोखी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा हो सके और विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जा सके। इस रिपोर्ट में हम डीडीहाट की समस्याओं, एसटी या ओबीसी स्टेटस की जरूरत और इसके औचित्य पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

डीडीहाट का दूरस्थ और पिछड़ा स्वरूप: भौगोलिक चुनौतियां और विकास की कमी

पिथौरागढ़ जिला उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में स्थित है, और डीडीहाट इसका एक प्रमुख तहसील है, जो भारत-नेपाल सीमा के निकट है। यह क्षेत्र ऊंची पहाड़ियों, घने जंगलों और दुर्गम रास्तों से घिरा हुआ है, जिसकी वजह से यहां का भौगोलिक स्थिति अत्यंत कठिन है। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण सर्दियों में बर्फबारी और मानसून में भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएं आम हैं, जो परिवहन और संचार को बाधित करती हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिथौरागढ़ जिले में ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकांश आबादी कृषि आधारित है, लेकिन मिट्टी की उर्वरता कम होने, पानी की कमी और आधुनिक तकनीकों के अभाव में कृषि उत्पादन सीमित है। जिले में आउट-माइग्रेशन की दर बहुत ऊंची है, जहां लोग रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की तलाश में दिल्ली, देहरादून या अन्य शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन कर जाते हैं।

एक अध्ययन के अनुसार, पिथौरागढ़ में आउट-माइग्रेशन का कृषि पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जहां खेत बंजर हो रहे हैं और परिवारों की आय घट रही है। यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, पशुपालन और छोटे उद्योगों पर निर्भर है, लेकिन विकास की कमी के कारण ये क्षेत्र पिछड़ गए हैं। उदाहरण के लिए, जिले में असमान विकास के कारण ग्रामीण से शहरी पलायन बढ़ा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई है। डीडीहाट में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है—अच्छे अस्पताल नहीं हैं, जहां गंभीर बीमारियों के लिए मरीजों को पिथौरागढ़ या हल्द्वानी ले जाना पड़ता है। स्कूलों की गुणवत्ता भी खराब है; प्राथमिक स्तर पर तो शिक्षा उपलब्ध है, लेकिन उच्च शिक्षा और कॉलेज के लिए छात्रों को जिले से बाहर जाना पड़ता है। इससे युवा पीढ़ी का पलायन बढ़ रहा है, और गांव खाली हो रहे हैं।

स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सुविधाओं की कमी: पलायन का मुख्य कारण

डीडीहाट में स्वास्थ्य सुविधाएं नाममात्र की हैं। स्थानीय अस्पतालों में डॉक्टरों और उपकरणों की कमी है, जिससे सामान्य बीमारियां भी जानलेवा बन जाती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति दयनीय है—स्कूलों में शिक्षकों की कमी, खराब बुनियादी ढांचा और डिजिटल शिक्षा का अभाव है। उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को पिथौरागढ़ या अन्य जिलों में जाना पड़ता है, जिससे कई परिवार आर्थिक बोझ नहीं झेल पाते। रिपोर्ट्स दर्शाती हैं कि उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में पलायन मुख्य रूप से रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की कमी के कारण होता है। पिथौरागढ़ में ग्रामीण आबादी का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है, लेकिन भौगोलिक कठिनाइयों के कारण आधुनिक कृषि तकनीकें नहीं पहुंच पातीं, जिससे उत्पादकता कम है। अन्य क्षेत्र जैसे पर्यटन में क्षमता है, लेकिन सड़कें, बिजली और इंटरनेट जैसी सुविधाओं की कमी से विकास रुका हुआ है।

एसटी और ओबीसी स्टेटस की स्थिति: कई शामिल, लेकिन कई छूटे हुए

उत्तराखंड में अनुसूचित जनजातियां (एसटी) की कुल आबादी करीब 3-4 प्रतिशत है, जिसमें थारू, बुक्सा, भोटिया, जौनसारी और राजी (वन राजी) जैसी जनजातियां शामिल हैं। पिथौरागढ़ जिले में वन राजी जनजाति मुख्य रूप से धारचूला, कनालीछीना और डीडीहाट ब्लॉकों में फैली हुई है, जिनकी संख्या मात्र 1075 है। ये जनजातियां एसटी स्टेटस प्राप्त हैं, लेकिन डीडीहाट के कई अन्य समुदाय, जो सांस्कृतिक रूप से अनोखे हैं, और वन राजी से जुड़े हुवे हैं, अभी भी इस सूची से बाहर हैं। कोई स्पष्ट कारण या प्रतिनिधित्व की कमी के कारण ये समुदाय छूट गए हैं। इसी तरह, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में कई शामिल हैं, लेकिन केंद्रीय ओबीसी सूची में अपडेट की जरूरत है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कुछ समुदायों को एसटी सूची से बाहर रखा गया है, जिससे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।

एसटी स्टेटस देने का औचित्य: अनोखी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा

डीडीहाट क्षेत्र के लोगों को एसटी स्टेटस देने की मांग इसलिए मजबूत है क्योंकि यहां की सांस्कृतिक विरासत अनोखी है और इसे संरक्षण की जरूरत है। पिथौरागढ़ की संस्कृति मेले-ठेलों, लोक नृत्यों और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है, जो स्थानीय लोगों की सामाजिक और सांस्कृतिक आकांक्षाओं को दर्शाती है। डीडीहाट में कुमाऊंनी संस्कृति के अलावा वन राजी जैसे जनजातीय तत्व हैं, जिनमें अनोखी भाषा, लोक परंपराएं और प्रकृति-आधारित जीवनशैली शामिल है।
कई पूर्व से ही एसटी या ओबीसी वर्ग का लाभ ले रहे हैं किन्तु उसके समकक्ष या बिरादरी के लोग उस से बाहर हैं जो सरासर अन्याय है। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रस्तावित डीडीहाट जिले के छुटे हुवे सभी वर्ग को एसटी वर्ग में शामिल किया जाए, और यहां की मूल भौगोलिक परिस्थिति की रक्षा की जाए, यह क्षेत्र संवेदनशील है और बॉर्डर का इलाका है तथा बाहरी लोगों को यहां जमीन और अन्य हस्तक्षेप से पूर्णतया बाहर रखा जाए।
यहां कई समुदाय जंगलों में रहते हैं, शिकार और संग्रहण पर निर्भर हैं, और उनकी परंपराएं मुख्यधारा से अलग हैं।

एसटी स्टेटस देने का औचित्य:

  1. सांस्कृतिक विशिष्टता: डीडीहाट के लोग कुमाऊंनी बोलियां बोलते हैं, लोक गीत और नृत्य जैसे ‘जौड़ा’ और ‘छोलिया’ में भाग लेते हैं। वन राजी जनजाति की एनिमिस्टिक रस्में और जनजातीय परंपराएं मुख्यधारा से अलग हैं, जो संरक्षण योग्य हैं। असम जैसे राज्यों में समान आधार पर एसटी स्टेटस दिया गया है, जहां अनोखी भाषा और परंपराओं को आधार बनाया गया।
  2. सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन: कम साक्षरता, दो-बच्चा नियम के कारण पंचायत से बहिष्कार, और विकास की कमी। एसटी स्टेटस से आरक्षण, विकास योजनाएं और सुरक्षा मिलेगी।
  3. भौगोलिक अलगाव: दूरस्थता के कारण मुख्यधारा से कटे हुए, जो एसटी मानदंडों में शामिल है—अलगाव, पिछड़ापन और अनोखी जीवनशैली।
  4. संरक्षण की जरूरत: यदि स्टेटस नहीं दिया गया, तो सांस्कृतिक विरासत लुप्त हो सकती है, जैसे कि लोक कलाएं और परंपराएं। एसटी स्टेटस से केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ मिलेगा, जैसे शिक्षा और रोजगार में आरक्षण।
  5. अन्य राज्यों के उदाहरण: हिमाचल में हट्टी समुदाय को एसटी दिया गया, असम में छह समुदायों को सामाजिक पिछड़ेपन पर आधारित। प्रस्तावित डीडीहाट जिले के छूटे समुदायों को समान आधार पर शामिल किया जा सकता है।

वर्तमान में देहरादून में रह रहे स्थानीय युवा भानु प्रताप सिंह की अपील: मुख्यमंत्री धामी से तुरंत कार्रवाई की मांग

क्षेत्रीय युवा ने हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर प्रस्तावित डीडीहाट जिले के सभी शेष लोगों को एसटी स्टेटस देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिना कारण दुर्भाग्यपूर्ण रूप से कई समुदाय छूट गए हैं, और उनकी सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए यह जरूरी है। सिंह ने जोर दिया कि इससे पलायन रुकेगा, विकास आएगा, स्थानीय लोगों की जल,जंगल,जमीन बचेगी जो इस संवेदनशील बॉर्डर क्षेत्र में हमेशा से सीमाओं की रक्षा करते हुए आए हैं और मुख्यत: जनजातीय जीवनशैली बचेगी। मुख्यमंत्री धामी, जो राज्य के विकास पर फोकस कर रहे हैं, से उम्मीद है कि वे इस मांग पर विचार करेंगे।

यह मुद्दा न केवल डीडीहाट बल्कि पूरे भारत के सीमा पर रह रहे लोगों की विकास यात्रा से जुड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एसटी या ओबीसी स्टेटस से सरकारी योजनाएं पहुंचेंगी, जिससे सुविधाएं बढ़ेंगी और पलायन रुकेगा। राज्य सरकार को इस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है, ताकि डीडीहाट मुख्यधारा में शामिल हो सके और अपने संसाधन और विराट संस्कृति की रक्षा कर सकें।

By devbhoomikelog.com

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