Tue. Apr 7th, 2026

केदारनाथ रोपवे की राह में बुनियादी ढांचा सबसे बड़ी बाधा

केदारनाथ धाम के लिए प्रस्तावित रोपवे परियोजना को धरातल पर उतारने से पहले सबसे बड़ी चुनौती सड़कों और पुलों की क्षमता को लेकर सामने आई है। रोपवे निर्माण में प्रयुक्त होने वाली भारी और तकनीकी मशीनरी को देखते हुए प्रशासन को सड़क चौड़ीकरण और पुलों की भार वहन क्षमता बढ़ाने की चिंता सता रही है।

ब्रिडकुल के अनुसार, रोपवे परियोजना में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी और निर्माण सामग्री सामान्य परियोजनाओं की तुलना में कहीं अधिक भारी, लंबी और संवेदनशील होगी। ऐसे में मौजूदा सड़कों और पुलों की स्थिति में बिना सुधार के मशीनरी का परिवहन संभव नहीं है।

गुप्तकाशी–सीतापुर–सोनप्रयाग मार्ग सबसे अधिक संवेदनशील

रुद्रप्रयाग से केदारनाथ को जोड़ने वाला गुप्तकाशी–सीतापुर–सोनप्रयाग मार्ग इस परियोजना की रीढ़ है, लेकिन यही मार्ग सबसे अधिक संवेदनशील भी है। गुप्तकाशी से सीतापुर के बीच कई स्थानों पर सड़क बेहद संकरी है। पहाड़ी कटान और तीखे मोड़ों के कारण बड़े ट्रेलरों का घूमना मुश्किल होगा।

इस खंड में कई जगह कैरिज-वे की चौड़ाई 6–7 मीटर से भी कम है, जबकि रोपवे निर्माण में प्रयुक्त भारी केबल-रील और टावर सेगमेंट के लिए न्यूनतम 10–12 मीटर चौड़ाई आवश्यक मानी जा रही है।

सोनप्रयाग तक भूस्खलन का खतरा

सीतापुर से सोनप्रयाग तक का हिस्सा भूस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। यहां सड़क नदी के बेहद करीब से गुजरती है और शोल्डर लगभग नहीं हैं। कुछ स्थानों पर सड़क का अलाइनमेंट अस्थायी सुधारों के सहारे टिका हुआ है।

सोनप्रयाग बाजार क्षेत्र में सीमित स्थान के कारण भारी वाहनों की आवाजाही लगभग असंभव है। रोपवे की समस्त सामग्री सड़क मार्ग से सोनप्रयाग तक ही पहुंचाई जाएगी, इसके बाद गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग है।

पुलों पर बढ़ेगा असामान्य भार

रोपवे के हॉल रोप और कैरियर रोप विशाल स्टील केबल-रील में आते हैं, जिनका वजन सैकड़ों टन तक होता है। इन्हें ले जाने के लिए लंबे और भारी ट्रेलरों की आवश्यकता होगी। टेंशनिंग सिस्टम और काउंटर-वेट के कारण पुलों पर सामान्य से कहीं अधिक एक्सल-लोड पड़ेगा।

इसके अलावा, रोपवे टावरों के प्री-फैब्रिकेटेड स्टील सेगमेंट, ड्राइव और रिटर्न स्टेशन की मशीनरी—जैसे बुल-व्हील, हाई-टॉर्क मोटर और गियरबॉक्स—भी अत्यधिक भारी होती हैं।

पुराने पुल बने चिंता का कारण

सोनप्रयाग में मंदाकिनी नदी पर बना प्रमुख पुल सामान्य यातायात को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। रोपवे निर्माण के दौरान इसी पुल से भारी मशीनरी और सैकड़ों टन वजन को गुजरना होगा, जिसके लिए इसकी भार वहन क्षमता बढ़ाना जरूरी है।

इसी तरह सीतापुर और गुप्तकाशी क्षेत्र में मौजूद छोटे स्पैन वाले कई पुल पुराने डिजाइन पर आधारित हैं। बिना स्ट्रक्चरल ऑडिट, री-इन्फोर्समेंट और बेयरिंग सुधार के इन पुलों से भारी ट्रेलरों का गुजरना जोखिम भरा माना जा रहा है।

लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज पांडेय के अनुसार, केदारनाथ मार्ग पर पुलों की क्षमता बढ़ाने और अत्यधिक संकरी सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य शुरू करा दिया गया है। रोपवे निर्माण शुरू होने से पहले सभी आवश्यक सुधार कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।

By The Common Man

News and public affairs

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *