देहरादून में जिलाधिकारी सविन बंसल की सख्त प्रशासनिक कार्रवाइयों के बीच अब एक नया विवाद सामने आया है। क्लेमेंट टाउन कैंटोनमेंट बोर्ड की मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) अंकिता सिंह (एक क्लास-वन महिला अधिकारी) ने डीएम सविन बंसल पर मानसिक उत्पीड़न, सत्ता के दुरुपयोग और तानाशाही रवैये के गंभीर आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मुख्य सचिव, राज्यपाल, राष्ट्रीय महिला आयोग और अन्य उच्च अधिकारियों को भेजी गई है।
घटना का विवरण और पृष्ठभूमि
शिकायत के अनुसार, 31 जनवरी 2026 को जिला प्रशासन ने आपात प्रावधानों का हवाला देकर कैंटोनमेंट बोर्ड के वाहन को शाम 6:30 से 8:00 बजे के बीच अधिगृहीत करने का आदेश जारी किया। आरटीओ, पुलिस और अन्य अधिकारियों को महिला अधिकारी के कार्यालय और आवास पर भेजा गया, जिससे मानसिक प्रताड़ना की स्थिति बनी। अंकिता सिंह ने दावा किया कि कैंटनमेंट एक्ट, 2006 के तहत रक्षा मंत्रालय के अधीन स्वायत्त निकाय के वाहनों को बिना सक्षम रक्षा संपदा प्राधिकरण की अनुमति के अधिग्रहीत नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसे अवैध और बार-बार दोहराए जा रहे दुरुपयोग का हिस्सा बताया।
इसके अलावा, जुलाई 2025 में पंचायत चुनावों के दौरान भी महिला अधिकारी पर अत्यधिक प्रशासनिक दबाव डालने का आरोप है।
महत्वपूर्ण बिंदु (विवादों के संदर्भ में)
- छावनी बोर्ड स्वायत्त हैं लेकिन रक्षा मंत्रालय के नियंत्रण में।
- सैन्य अधिकारी (जैसे स्टेशन कमांडर) सुरक्षा, आवागमन और निर्माण पर विशेष शक्तियां रखते हैं।
- वाहन अधिग्रहण या जब्ती: अधिनियम में चुनाव या आपात स्थिति में वाहन उपयोग से संबंधित कुछ प्रावधान हैं (जैसे corrupt practices में वाहन उपयोग प्रतिबंध—धारा 31 और संबंधित नियम), लेकिन बोर्ड के आधिकारिक वाहनों को जिला प्रशासन द्वारा बिना सक्षम प्राधिकरण (रक्षा संपदा) की अनुमति के अधिग्रहीत करने का कोई स्पष्ट अधिकार नहीं दिया गया है। ऐसे मामलों में कैंटनमेंट एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन माना जा सकता है। अधिनियम मुख्य रूप से बोर्ड की आंतरिक शक्तियों (जैसे धारा 91 में टैक्स चोरी पर जब्ती, या स्वास्थ्य आपात में डिसइन्फेक्शन) पर केंद्रित है, लेकिन सिविल अधिकारियों (जैसे डीएम) को बोर्ड की संपत्ति/वाहनों पर बिना रक्षा मंत्रालय/केंद्र सरकार की मंजूरी के हस्तक्षेप का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
डीएम पक्ष की प्रतिक्रिया
जिला सूचना कार्यालय के माध्यम से डीएम सविन बंसल ने स्पष्ट किया कि अंकिता सिंह आगामी जनगणना की दो अति-आवश्यक बैठकों में अनुपस्थित रहीं, जिसके कारण नोटिस जारी किया गया। जनगणना कार्य निदेशक की नाराजगी के चलते यह कार्रवाई हुई। प्रशासन ने बताया कि वाहन अधिग्रहण की कार्रवाई तीसरी बार की जा रही थी, लेकिन कोई अतिरिक्त विवरण साझा नहीं किया।
शिकायत में प्रमुख आरोप
- मानसिक उत्पीड़न और सत्ता का अनुचित प्रयोग।
- लैंगिक भेदभाव के संकेत (महिला अधिकारी होने के कारण दबाव बढ़ाने का दावा)।
- स्वतंत्र जांच की मांग, जिसमें केंद्र, राज्य, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय महिला आयोग के प्रतिनिधि शामिल हों।
- शिकायत पत्र की प्रतियां मंडलायुक्त, डीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, सीडीओ और आरटीओ को भी भेजी गईं।
प्रशासनिक हलचल
यह मामला देहरादून प्रशासन में बड़े स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, खासकर तब जब डीएम बंसल पिछले कुछ महीनों में पिटकुल पर रोड कटिंग प्रतिबंध, जर्जर स्कूल भवनों पर बुलडोजर, सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने, हथियार लाइसेंस रद्द करने, बाल श्रम मुक्ति और अन्य सख्त कार्रवाइयों के लिए चर्चित रहे हैं। कई निवासियों ने उनकी इन कार्रवाइयों की सराहना की है, लेकिन यह नया आरोप उनकी छवि पर सवाल उठा रहा है।
शिकायतकर्ता ने इसे सरकारी कार्य से बचने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जबकि प्रशासन इसे अनुपस्थिति और जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य से जोड़ रहा है। अभी तक कोई आधिकारिक जांच शुरू होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामला उच्च स्तर पर पहुंचने से आगे की कार्रवाई की संभावना है।
डीएम सविन बंसल का पूर्व बयान रहा है कि “जनता की सुरक्षा और नियमों से कोई समझौता नहीं होगा।” अब इस विवाद में दोनों पक्षों की जांच जरूरी लग रही है ताकि सच्चाई सामने आए।
हालांकि देहरादून में जिलाधिकारी सविन बंसल की जीरो टॉलरेंस नीति, साहसिक फैसले और जन-केंद्रित प्रशासन ने शहर को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और निवासी-अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान उनकी कई जिम्मेदार कार्रवाइयों ने यातायात, शिक्षा, पर्यावरण, भ्रष्टाचार पर अंकुश और नागरिक सुविधाओं को मजबूत किया है। ये फैसले आम जनता के लिए राहत लेकर आए हैं और अन्य जिलों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हैं। वहीं, देहरादून छावनी बोर्ड (Cantonment Board) जैसे क्षेत्रों में अक्सर नियमों की अनदेखी, कार्रवाई में देरी और नागरिक शिकायतों पर निष्क्रियता की शिकायतें सामने आती रहती हैं—जैसे स्ट्रीट लाइट्स खराब होना, कचरा प्रबंधन की कमी, टूटी सड़कें और अवैध निर्माण पर कोई ठोस एक्शन न होना। बोर्ड के विघटन (dissolution) के बाद ये मुद्दे और बढ़ गए हैं, जिससे निवासी परेशान हैं और बोर्ड की जवाबदेही पर सवाल उठते हैं। DM बंसल की सक्रियता ऐसे क्षेत्रों में भी जवाबदेही लाने का संदेश देती है।
DM सविन बंसल की प्रमुख जिम्मेदार और सराहनीय कार्रवाइयां
- पिटकुल और अन्य एजेंसियों पर रोड कटिंग प्रतिबंध (फरवरी 2026)
पिटकुल, यूपीसीएल और गेल जैसी सरकारी एजेंसियों पर दिन के समय रोड कटिंग करने के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई। अनुमति निरस्त, मशीनरी जब्त, मुकदमा दर्ज और सड़कों को मूल स्थिति में बहाल करने के निर्देश। इससे व्यस्त इलाकों (एलआईसी बिल्डिंग, आईएसबीटी, सहारनपुर रोड) में ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाएं कम हुईं। - जर्जर स्कूल भवनों पर बुलडोजर एक्शन (जनवरी 2026)
79 स्कूल भवनों को तत्काल ध्वस्त कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की। ₹1 करोड़ मंजूर कर वैकल्पिक व्यवस्था की। माता-पिता ने इसे “बच्चों के भविष्य की रक्षा” बताया। - पर्यावरण संरक्षण और अवैध निर्माण पर कार्रवाई
मालदेवता क्षेत्र में अवैध नदी डायवर्जन पर उच्च स्तरीय जांच शुरू की, रिसॉर्ट मालिक के खिलाफ एक्शन। ₹6 करोड़ के सरकारी नुकसान (सड़क धुलना आदि) पर सख्ती। प्राकृतिक जल स्रोतों की पहचान और संरक्षण अभियान। - संकटकालीन राहत और ग्राउंड-लेवल प्रशासन
आपदा प्रभावित गांवों (फुलेत, चमरौली) में 12 किमी पैदल ट्रेक कर स्थिति का जायजा लिया और हेलीकॉप्टर से खाद्य सामग्री एयरड्रॉप का आदेश दिया। यह हाथों-हाथ राहत पहुंचाने का उदाहरण है। - शिक्षा और लड़कियों का सशक्तिकरण
प्रोजेक्ट ‘नंदा-सुनंदा’: अनाथ, गरीब और प्रतिकूल परिस्थितियों वाली मेधावी लड़कियों की ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन और स्किल ट्रेनिंग की जिम्मेदारी ली। कई लड़कियों को वित्तीय सहायता दी, शिक्षा बहाल की। - भ्रष्टाचार, भूमि माफिया और अन्य सख्त कदम
- भूमि अतिक्रमण पर निरंतर अभियान, जनसुनवाई में 174+ शिकायतों का त्वरित निस्तारण।
- पटवारी/अधिकारियों को भ्रष्टाचार पर निलंबित किया।
- अवैध हथियार लाइसेंस रद्द, बाल श्रम मुक्ति।
- जनसुनवाई में सैकड़ों शिकायतों का समाधान (जैसे 101 शिकायतें स्पॉट पर निपटाई)।
- अन्य संवेदनशील पहल
- पिंक पुलिस बूथ से महिलाओं की सुरक्षा।
- स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को फ्री बस यात्रा, दिव्यांगों को नौकरी।
- अस्पताल में पत्नी को सामान्य कतार में खड़ा कर वीआईपी कल्चर से दूरी।
- मुसूरी में विंटर ट्रैवल सिस्टम लागू कर पर्यटक व्यवस्था मजबूत की।
देहरादून निवासियों पर प्रभाव
- यातायात सुचारू, सड़कें सुरक्षित, बच्चों की जान बचाई, पर्यावरण संरक्षित।
- जनता का प्रशासन पर भरोसा बढ़ा—सोशल मीडिया पर “रियल हीरो” कहकर सराहना।
- छावनी बोर्ड जैसे क्षेत्रों में जहां शिकायतें अनसुनी रहती हैं (स्ट्रीट लाइट्स, कचरा, सड़कें), DM की सख्ती जवाबदेही का संदेश देती है।
DM सविन बंसल का बयान: “जनता की सुरक्षा, नियमों का पालन और संवेदनशील प्रशासन सर्वोपरि है। नियम तोड़ने वालों पर कोई समझौता नहीं।”
ये कार्रवाइयां देहरादून को बेहतर बनाने के साथ-साथ पूरे राज्य के लिए मिसाल हैं कि ईमानदार और सक्रिय प्रशासन से बड़े बदलाव संभव हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु (विवादों के संदर्भ में)
छावनी बोर्ड स्वायत्त हैं लेकिन रक्षा मंत्रालय के नियंत्रण में, सैन्य अधिकारी (जैसे स्टेशन कमांडर) सुरक्षा, आवागमन और निर्माण पर विशेष शक्तियां रखते हैं। वाहन अधिग्रहण या जब्ती: अधिनियम में चुनाव या आपात स्थिति में वाहन उपयोग से संबंधित कुछ प्रावधान हैं (जैसे corrupt practices में वाहन उपयोग प्रतिबंध)। आकस्मिक स्थिति में जिलाधिकारी की भी अपनी शक्तियां हैं, जो जिले के समग्र विकास के लिए आवश्यक भी हैं I अब देखना होगा इसपर आगे क्या कार्यवाही होती है, परंतु हर सरकारी कर्मचारी जनता के प्रति जवाबदेह है, जो आवश्यक है I